मध्य प्रदेश भाजपा ने आम बजट को सराहा, कांग्रेस ने आम लोगों के लिए नाकाफी बताया
भोपाल, 1 फरवरी (आईएएनएस)। संसद में रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए 2026-2027 के केंद्रीय बजट पर मध्य प्रदेश की राजनीतिक पार्टियों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है।
जहां विपक्ष पार्टी कांग्रेस ने केंद्रीय बजट की आलोचना करते हुए इसे कॉरपोरेट बजट बताया, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे विकसित भारत की दिशा में एक कदम कहा।
राज्य भाजपा प्रमुख हेमंत खंडेलवाल ने एक बयान में कहा कि केंद्रीय बजट सर्विस सेक्टर को बढ़ावा देता है और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज योजना के तहत प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव को बढ़ाकर 40,000 करोड़ रुपए करके इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को नई गति देता है।
खंडेलवाल ने आगे कहा, एमएसएमई ग्रोथ फंड के लिए 10,000 करोड़ रुपए का प्रावधान उद्योग, निवेश और रोजगार सृजन के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
भाजपा नेता ने यह भी कहा कि अगले पांच सालों में 10,000 करोड़ रुपए के खर्च के साथ बायो-फार्मा शक्ति योजना का प्रस्ताव, जिसका मकसद भारत को एक ग्लोबल बायो-फार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना है, सराहनीय है।
उन्होंने आगे कहा, ये पहल देश में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर के घरेलू उत्पादन के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाएंगी। देश के हर जिले में हॉस्टल स्थापित करने की घोषणा लड़कियों की सुरक्षा और शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक बहुत ही सराहनीय कदम है।
भाजपा सोमवार (2 फरवरी) से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के केंद्रीय बजट को उजागर करने के लिए 15-दिवसीय राज्यव्यापी अभियान भी शुरू करने वाली है।
कई भाजपा नेताओं और मंत्रियों को राज्य के शहरी और ग्रामीण दोनों हिस्सों में लोगों तक पहुंचने और उन्हें केंद्रीय बजट से होने वाले फायदों के बारे में बताने का काम सौंपा गया है।
वहीं, भाजपा शासित मध्य प्रदेश सरकार में कांग्रेस ने रविवार को वित्त मंत्री सीतारमण द्वारा पेश किए गए साल 2026-2027 के केंद्रीय बजट की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र ने मजदूरों, किसानों और बेरोजगार युवाओं को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है।
विपक्ष के नेता और वरिष्ठ कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मध्यम वर्ग को आयकर में राहत की उम्मीद थी, लेकिन केंद्र सरकार ने एक बार फिर उन्हें निराश किया है।
उन्होंने एक बयान में कहा, बड़े कॉरपोरेट घरानों के करोड़ों रुपए के लोन माफ किए जा सकते हैं, लेकिन आम टैक्सपेयर्स की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। मैंने पूरा बजट देखा। यह आम लोगों के लिए नहीं है, बल्कि यह कॉरपोरेट घरानों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया एक दस्तावेज है।
सिंघार ने यह भी आरोप लगाया कि बजट में आदिवासियों और दूसरे समुदायों के लिए कोई खास राहत नहीं दी गई है, जिन्हें पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है।
उन्होंने आरोप लगाया, साफ है कि इस बजट से आम लोगों को सिर्फ निराशा ही मिली है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि देश के आम आदमी के प्रति उसकी नीति और इरादे दोनों ही उदासीन हैं।
राज्य कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने रविवार को रीवा जिले के दौरे के दौरान केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, भाजपा सरकार, जो इतने सारे वादे करके सत्ता में आई थी, उसने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, किसान कल्याण और ग्रामीण और शहरी विकास को लेकर 12 साल पहले दिखाए गए सपनों को तोड़ दिया है।
--आईएएनएस
डीकेपी/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
बजट 2026-27 में टैक्स रेवेन्यू में 8 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान, 44.04 लाख करोड़ रुपए कमाई की उम्मीद
नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया। इस बजट में सरकार ने कुल सकल कर राजस्व (ग्रॉस टैक्स रेवेन्यू) 44.04 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया है, जो वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में करीब 8 प्रतिशत ज्यादा है।
डायरेक्ट टैक्स, जिसमें कॉरपोरेट टैक्स और पर्सनल इनकम टैक्स शामिल हैं, से 26.97 लाख करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है, जो कुल टैक्स आमदनी का करीब 61.2 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं, इनडायरेक्ट टैक्स से 17.07 लाख करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद जताई गई है।
बजट अनुमान 2026-27 में टैक्स और जीडीपी का अनुपात 11.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह बजट सोलहवें वित्त आयोग (16वां फाइनेंस कमीशन) की सिफारिशों के लागू होने का पहला साल भी है। वित्त आयोग ने राज्यों को मिलने वाले टैक्स हिस्से को 41 प्रतिशत पर ही बनाए रखने की सिफारिश की है।
केंद्र सरकार को मिलने वाली शुद्ध टैक्स आमदनी (नेट टू सेंटर) 28.67 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। इसके अलावा, गैर-कर राजस्व (नॉन-टैक्स रेवेन्यू-एनटीआर) 6.66 लाख करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है।
वहीं, केंद्र सरकार की कुल रेवेन्यू रिसीट, जिसमें टैक्स और नॉन-टैक्स दोनों शामिल हैं, 35.33 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। यह राशि 2025-26 के मुकाबले करीब 5.7 प्रतिशत ज्यादा है।
बजट 2026-27 में केंद्र सरकार का कुल खर्च 53.47 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो जीडीपी का करीब 13.6 प्रतिशत है और पिछले साल (49.65 लाख करोड़ रुपए) की तुलना में 7.7 प्रतिशत ज्यादा है।
वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने पूंजीगत खर्च (कैपिटल एक्सपेंडिचर) के लिए 12.22 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया है, जो जीडीपी का 3.1 प्रतिशत है। इसमें राज्यों को दिए जाने वाले विशेष ऋण के रूप में 2.0 लाख करोड़ रुपए की सहायता भी शामिल है।
केंद्र सरकार का प्रभावी पूंजीगत खर्च, सरकार के अपने खर्च और पूंजीगत संपत्ति बनाने के लिए दी जाने वाली सहायता राशि को मिलाकर तय किया जाता है। यह निवेश देश की आर्थिक क्षमता को मजबूत करने में मदद करता है।
बजट 2026-27 में पूंजीगत संपत्ति बनाने के लिए अनुदान के रूप में 4.93 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जो जीडीपी का करीब 1.3 प्रतिशत है।
इस तरह वित्त वर्ष 2026-27 में केंद्र सरकार का कुल प्रभावी पूंजीगत खर्च 17.15 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो जीडीपी का लगभग 4.4 प्रतिशत है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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