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आरक्षण पर दिए बयान पर अड़े Shankersinh Vaghela, बोले- माफी मांगने का सवाल ही नहीं उठता

अहमदाबाद, चार अक्टूबर गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने आरक्षण से जुड़े अपने विवादित बयान के लिए माफी मांगने से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने यह बयान “पूरी जिम्मेदारी के साथ” दिया था और अपने राजनीतिक जीवन में कभी भी अपनी किसी बात से पीछे नहीं हटे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने रविवार को जारी एक वीडियो संदेश में कहा कि उन्होंने गांधी जयंती पर नर्मदा जिले के सागबारा में आदिवासी किसानों की एक सभा में जो बातें कही थीं, वे केंद्र और गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकारों पर लक्षित थीं, जो “आरक्षण-विरोधी” हैं। उन्होंने कहा, “शंकरसिंह वाघेला अपनी जिंदगी में कभी अपने बयानों से पीछे नहीं हटे हैं।

मैंने जो कुछ भी कहा, वह कह दिया और उसके लिए माफी मांगने का कोई सवाल ही नहीं उठता।” वाघेला ने कहा कि यह बात भाजपा सरकार और आरक्षण के प्रति उसके “विरोध” के संदर्भ में कही गई थी। उन्होंने कहा, “ये लोग समाज का 70 प्रतिशत हिस्सा हैं। भाजपा सरकार इनका विरोध करती है।

मैंने इस बारे में बात की कि आरक्षण आखिर क्यों दिया गया था।” वाघेला ने शुक्रवार को यह कहते हुए विवाद खड़ा कर दिया था कि अगर “पटेल, बनिया या ब्राह्मण” समुदायों के लोग हाथ से मैला उठाने का काम करने को तैयार हों, तो वे उन्हें हर महीने 50,000 रुपये देंगे। उन्होंने ऐतिहासिक रूप से पिछड़े समुदायों के लिए आरक्षण का समर्थन करते हुए यह टिप्पणी की थी। वाघेला ने कहा था, “आरक्षण कोई एहसान के तौर पर नहीं मिला है; यह जीवन भर की तकलीफों और संघर्ष से हासिल किया गया है।” यह विवाद ऐसे समय में पैदा हुआ है, जब 86 वर्षीय वाघेला के एक बार फिर कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने अपने वीडियो संदेश में कहा कि वह दलित समुदाय के साथ ऐतिहासिक रूप से हुए भेदभाव की बात कर रहे थे, जिसमें मंदिरों और पीने के पानी तक पहुंच से वंचित किया जाना और बारात निकालने से रोका जाना शामिल है। उन्होंने कहा, “मैंने इस बारे में बात की कि आरक्षण क्यों दिया गया था। दलित समुदाय के संदर्भ में—जिन्हें हाथ से मैला उठाना पड़ता था, जो मंदिरों में नहीं जा सकते थे, जिनके पास पीने के पानी की सुविधा नहीं थी और जो गांव में बारात नहीं निकाल सकते थे—मैंने कहा कि आरक्षण उनके लिए मुआवजा था।” वाघेला ने इन आरोपों को भी खारिज कर दिया कि उनकी टिप्पणी ब्राह्मणों या किसी अन्य “अगड़ी जाति” के खिलाफ थी।

उन्होंने पूछा, “मुझे समझाएं कि मैं ब्राह्मण-विरोधी कैसे हूं। (जब मैं मुख्यमंत्री था) परशुराम जयंती की छुट्टी की अनुमति किसने दी थी? जिस व्यक्ति ने ब्राह्मण समाज को भगवान परशुराम जयंती की छुट्टी दी, क्या वह आज आपका विरोधी हो सकता है?” वाघेला ने पूछा कि क्या कोई ऐसी घटना बता सकता है, जब उन्होंने पटेल समुदाय का विरोध किया हो।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने आरक्षण के बारे में एक साल पहले भी ऐसी ही बातें कही थीं और सवाल किया कि तब किसी ने आपत्ति क्यों नहीं जताई थी। वाघेला ने भाजपा पर विवाद खड़ा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी टिप्पणी सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ थी। उन्होंने कहा, “भाजपा के लोग ही आरक्षण-विरोधी हैं।” वाघेला ने कहा कि उनकी टिप्पणी का मकसद अलग-अलग समुदायों के अधिकारों का समर्थन करना था।

उन्होंने कहा, “मैंने जो कुछ भी कहा है, पूरी जिम्मेदारी के साथ कहा है। मैंने दलित समुदाय, आदिवासियों, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और महिलाओं के आरक्षण के अधिकारों के लिए ये बातें कहीं।” पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “शंकरसिंह वाघेला कभी भी किसी अगड़ी जाति के विरोधी नहीं हो सकते।” भाजपा की गुजरात इकाई के पूर्व मीडिया समन्वयक और ‘समस्त ब्रह्म समाज’ के समन्वयक यज्ञेश दवे ने शनिवार को वाघेला की टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि समुदायों या जातियों के बीच दुश्मनी पैदा करना गलत है।

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AISA अध्यक्ष Neha की हिरासत पर भड़के INDIA गठबंधन के नेता, पुलिस कार्रवाई की निंदा

(तस्वीरों के साथ) नयी दिल्ली, चार अक्टूबर विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन के नेताओं ने रविवार को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा का समर्थन किया, जिन्हें पुलिस ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने के प्रयास के दौरान हिरासत में ले लिया था। आरोप है कि उन्हें एक ऐसी निजी गाड़ी में ले जाया गया, जिस पर आधिकारिक नंबर प्लेट नहीं थी, जिसके कारण शुरुआत में उनके सहयोगियों और समर्थकों को उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। आइसा के सदस्यों ने आरोप लगाया कि गाड़ी में कोई भी महिला पुलिस अधिकारी मौजूद नहीं थी।

उन्होंने यह भी कहा कि नेहा को ले जाए जाने के बाद से वे उनसे संपर्क करने में असमर्थ थे। ‘ऑल इंडिया डेमोक्रेटिक विमेंस एसोसिएशन’ (एआईडीडब्ल्यूए) की नेता आशा शर्मा और मैमूना मुल्ला, आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज, सामाजिक कार्यकर्ता नवशरण सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता संसद मार्ग थाने पहुंचे। वे नेहा और अन्य महिला कार्यकर्ताओं के बारे में जानकारी लेने गए थे, जिन्हें कथित तौर पर बिना नंबर वाली निजी कारों में ले जाया गया था।

बाद में, नेहा को नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाने से रिहा कर दिया गया। उनकी रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए, राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि नेहा को (पुलिस द्वारा) ले जाए जाने की खबर मिलने के बाद से वह काफी चिंतित थे। ओ ब्रायन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘काफी चिंतित था... यह जानकर राहत मिली कि पुलिस कार में जबरन धकेले जाने के बाद, अब नेहा को नरेला थाने से रिहा कर दिया गया है।

बैठकों से परे, ‘इंडिया’ (गठबंधन) जमीन पर मजबूती से खड़ा है।’’ भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने इससे पहले कहा कि नेहा को हिरासत में लेना ‘‘अपहरण’’ के समान है और दिल्ली पुलिस तुरंत उनके ठिकाने का खुलासा करे। उनकी रिहाई के बाद, भट्टाचार्य ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि नेहा को नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाने से रिहा कर दिया गया है। भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘अभी-अभी खबर मिली है कि कॉमरेड नेहा को नरेला औद्योगिक क्षेत्र थाने से रिहा कर दिया गया है।

एक महिला कार्यकर्ता को केवल पुरुषों से भरी बिना नंबर वाली गाड़ी में जबरन उठा ले जाना और फिर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के बाद रिहा करना... यह दिल्ली पुलिस के लिए भी गिरावट का एक नया निचला स्तर है!’’ राजद सदस्य मनोज झा ने भी पुलिस की कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘भले ही दिल्ली पुलिस किसी ‘शहंशाह’ के इशारे पर काम कर रही हो, लेकिन उसे कम से कम एक बार ठहरकर यह जरूर सोचना चाहिए कि वे अपने जैसे ही परिवारों के सदस्यों के साथ ऐसा बर्बर व्यवहार क्यों कर रहे हैं।’’ झा ने कहा, ‘‘ये तस्वीरें लंबे समय तक लोगों के दिलो-दिमाग को झकझोरती रहेंगी। इतिहास गवाह है कि कोई भी ‘शाह’ हमेशा के लिए शाह नहीं रहता।’’ आइसा ने कहा कि नेहा को थाने से रिहा कर दिया गया, लेकिन कथित तौर पर उनका फोन और बैग उनके पास नहीं था।

यह घटनाक्रम तब हुआ जब आइसा के कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार तीसरे दिन जंतर-मंतर लौटने का प्रयास किया।

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  Sports

रोनाल्डो को देखकर सीखा फुटबॉल, राज्य-स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में छतरपुर की बेटी ने पाई तीसरी रैंक

Chhatarpur News: अंत्रा जैन ने लोकल 18 से कहा कि वह टीवी पर रोनाल्डो और मेसी को फुटबॉल खेलते देखती थीं, तो उनका भी फुटबॉल खेलने में इंट्रेस्ट बढ़ने लगा. उन्होंने ठान लिया कि खेल की दुनिया में कुछ करके दिखाना है. अभी तो राज्यस्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता में तीसरा स्थान हासिल किया है, वह आगे राष्ट्रीय स्तर पर खेलना चाहती हैं. Mon, 5 Oct 2026 07:39:23 +0530

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