Union Budget 2026: क्या है 'ऑरेंज इकोनॉमी'? किस क्षेत्र को होगा सबसे ज्यादा फायदा
Union Budget 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को लोकसभा में यूनियन बजट 2026-27 पेश करते हुए एक नए और तेजी से उभरते सेक्टर ऑरेंज इकोनॉमी का जिक्र किया. लगातार नौवां बजट पेश कर रहीं वित्त मंत्री ने संकेत दिया कि आने वाले वर्षों में भारत का आर्थिक विकास केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्रिएटिव सेक्टर भी इसकी बड़ी ताकत बनेगा.
क्या होती है ऑरेंज इकोनॉमी?
ऑरेंज इकोनॉमी को आमतौर पर क्रिएटिव इकोनॉमी भी कहा जाता है. यह एक ऐसा आर्थिक मॉडल है, जो रचनात्मकता, नवाचार और बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) पर आधारित होता है. इसमें कला, संस्कृति, डिज़ाइन, मीडिया, डिजिटल कंटेंट, एनीमेशन, गेमिंग, फैशन, म्यूज़िक और टूरिज्म जैसे क्षेत्र शामिल होते हैं.
इस इकोनॉमी की खास बात यह है कि इसमें विचार और हुनर ही सबसे बड़ी पूंजी होते हैं, जो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को एक साथ आगे बढ़ाते हैं.
AVGC सेक्टर से पैदा होंगे लाखों रोजगार
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने बताया कि भारत का एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स (AVGC) सेक्टर बेहद तेज़ी से बढ़ रहा है. सरकार के अनुमान के मुताबिक, 2030 तक इस सेक्टर में करीब 20 लाख प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी.
इस बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार ने मुंबई स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज के सहयोग से...
- 15,000 माध्यमिक विद्यालयों और
- 500 कॉलेजों में AVGC कंटेंट क्रिएटर लैब स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है
शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट को मिलेगा बढ़ावा
ऑरेंज इकोनॉमी के जरिए सरकार का फोकस युवाओं को भविष्य के रोजगार के लिए तैयार करने पर है. इन क्रिएटर लैब्स के माध्यम से छात्रों को डिजिटल कंटेंट, डिजाइन और गेमिंग जैसे क्षेत्रों में शुरुआती स्तर से ही प्रशिक्षण मिलेगा, जिससे उनकी रोजगार क्षमता बढ़ेगी.
डिजाइन सेक्टर को भी मिलेगा नया प्लेटफॉर्म
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में यह भी बताया कि भारत का डिज़ाइन उद्योग तेजी से विस्तार कर रहा है. इसे और मजबूती देने के लिए सरकार ने पूर्वी भारत में एक नया नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन (NID) स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है.
क्यों अहम है ऑरेंज इकोनॉमी?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑरेंज इकोनॉमी भारत को-
- रोजगार सृजन,
- स्टार्टअप कल्चर,
- वैश्विक क्रिएटिव हब बनाने में मदद कर सकती है.
यह न केवल आर्थिक विकास को गति देगी, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी वैश्विक मंच पर मजबूत करेगी. बजट 2026 में ऑरेंज इकोनॉमी का जिक्र यह संकेत देता है कि भारत अब क्रिएटिव पावरहाउस बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जहां कल्पनाशीलता ही विकास की सबसे बड़ी ताकत होगी.
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केंद्रीय बजट 2026-27: रक्षा बजट में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी, 7.8 लाख करोड़ रुपए का आवंटन
नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 में देश के रक्षा क्षेत्र के लिए 7.8 लाख करोड़ रुपए का आवंटन किया है। यह राशि पिछले वित्त वर्ष के 6.81 लाख करोड़ रुपए की तुलना में करीब 15 प्रतिशत ज्यादा है।
बजट में रक्षा बलों के लिए सैन्य उपकरणों की खरीद के लिए 2.19 लाख करोड़ रुपए रखे गए हैं। यह रकम पूंजीगत खर्च का हिस्सा है और यह वित्त वर्ष 2025-26 में दिए गए 1.80 लाख करोड़ रुपए से लगभग 21.8 प्रतिशत अधिक है।
रक्षा बजट में ये बढ़ोतरी ऐसे समय में की गई है, जब हाल ही में भारत ने कश्मीर में हुए आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर चलाया और दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ रहे हैं। यह कदम सरकार की आत्मनिर्भर भारत नीति के अनुरूप है, जिसमें देश में ही रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने यह भी प्रस्ताव रखा कि विमानों के रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल के लिए इस्तेमाल होने वाले पुर्जों को बनाने में लगने वाले कच्चे माल के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी माफ की जाएगी। इससे रक्षा क्षेत्र की कंपनियों को फायदा मिलेगा।
बजट 2026-27 पर प्रतिक्रिया देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के बाद यह बजट देश की रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के संकल्प को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के बीच संतुलन बनाता है।
इस बजट का रुख पहले से चल रही उस रणनीति को आगे बढ़ाता है, जिसमें सेना के आधुनिकीकरण, एयर डिफेंस सिस्टम और नई पीढ़ी के प्लेटफॉर्म पर ज्यादा खर्च किया जा रहा है।
कैपेक्स में बढ़ोतरी का कारण फाइटर जेट, युद्धपोत, मिसाइल, तोप और अन्य आधुनिक रक्षा उपकरणों के लिए ज्यादा बजट दिया जाना है।
रक्षा उपकरणों की खरीद के लिए ज्यादा बजट मिलने से सरकारी रक्षा कंपनियों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की सप्लायर कंपनियों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि पूरे सेक्टर में ऑर्डर तेजी से बढ़े हैं।
सरकारी क्षेत्र की जिन कंपनियों को फायदा होने की संभावना है, उनमें हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) शामिल हैं, जो सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए उपकरण बनाती हैं।
इसके अलावा मिधानी, बीईएमएल, भारत डायनामिक्स जैसी छोटी निजी कंपनियों और ड्रोन सेक्टर से जुड़े स्टार्टअप्स को भी फायदा मिलने की उम्मीद है। यह सब भारत में ही रक्षा उपकरणों की खरीद को बढ़ावा देने की सरकार की नीति का हिस्सा है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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