DLF ने Gurugram में बेचे 1,985 करोड़ रुपये के लक्जरी सीनियर लिविंग घर
नयी दिल्ली, चार अक्टूबर रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ ने गुरुग्राम में वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाई जा रही अपनी आवासीय परियोजना के सभी 172 घर 1,985 करोड़ रुपये में बेच दिए हैं। कंपनी ने रविवार को यह जानकारी दी। देश की सबसे बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों में शामिल डीएलएफ ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए हाल में शुरू किए गए ‘द ऑरेवा’ परियोजना के सभी घर बिक गए हैं।
यह परियोजना गुरुग्राम के सेक्टर 63 में 4.17 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जा रही है। डीएलएफ ने कहा, ‘‘इस परियोजना से करीब 1,985 करोड़ रुपये की बिक्री हुई है। यह वरिष्ठ नागरिकों के लिए ऐसी लक्जरी आवासीय इकाइयों की बढ़ती मांग को दर्शाता है, जहां सुविधाओं के साथ स्वास्थ्य, सुविधा और सामुदायिक जुड़ाव पर भी ध्यान दिया जाता है।’’ प्रत्येक अपार्टमेंट की औसत बिक्री कीमत करीब 11.5 करोड़ रुपये रही, जबकि इनकी बिक्री 28,000 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से हुई।
कंपनी इस परियोजना में 172 लक्जरी आवास विकसित कर रही है। इनका कुल कारपेट एरिया चार लाख वर्ग फुट से अधिक और बिक्री योग्य क्षेत्र 7.5 लाख वर्ग फुट से अधिक है। डीएलएफ होम डेवलपर्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और मुख्य कारोबार अधिकारी आकाश ओहरी ने कहा कि यह परियोजना भारत में लक्जरी सेवानिवृत्ति आवास की अवधारणा को नए सिरे से परिभाषित करने की डीएलएफ की सोच को दर्शाती है।
परियोजना में आपातकालीन सहायता वाली पेशेवर रूप से संचालित चिकित्सा सुविधा भी होगी। ओहरी ने कहा कि परियोजना की मजबूत बिक्री भारत में इस क्षेत्र में प्रीमियम और बेहतर अनुभव देने वाले आवासीय विकल्पों की बढ़ती मांग को दर्शाती है। डीएलएफ ने अब तक 185 से अधिक रियल एस्टेट परियोजनाएं विकसित की हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 35.2 करोड़ वर्ग फुट से अधिक है।
वित्त वर्ष 2025-26 में डीएलएफ की बिक्री बुकिंग पांच प्रतिशत घटकर 20,143 करोड़ रुपये रही, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 21,223 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर थी। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 20,000 करोड़ रुपये की सालाना बिक्री बुकिंग का लक्ष्य रखा है।
तंबाकू की लत छुड़ाने के लिए चिकित्सकीय मदद जरूरी, विशेषज्ञों ने Smoking पर चेताया
नयी दिल्ली, चार अक्टूबर विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान करने वालों को इसे छोड़ने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है और तंबाकू की लत से जूझ रहे लोगों के लिए चिकित्सकीय सहायता पर अधिक जोर दिए जाने की जरूरत है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों को उभरते वैज्ञानिक साक्ष्यों के अनुरूप समय-समय पर विकसित किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों ने 28 से 30 सितंबर तक तंबाकू से होने वाले नुकसान को कम करने पर ऑनलाइन आयोजित नौवें शिखर सम्मेलन में यह बात कही।
सम्मेलन में चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और नीति विशेषज्ञों ने तंबाकू पर निर्भरता, धूम्रपान छोड़ने, युवाओं में निकोटीन के इस्तेमाल तथा तंबाकू नियंत्रण नीतियों को आकार देने में वैज्ञानिक साक्ष्यों की भूमिका पर चर्चा की। दिल्ली स्थित पैसिफिक वनहेल्थ में आंतरिक चिकित्सा के वरिष्ठ सलाहकार और ‘डॉक्टर्स अगेंस्ट एडिक्शन’ (डीएएडी) के संस्थापक सदस्य डॉ. मोहसिन वली ने कहा कि किसी धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को इसे छोड़ने की सलाह देने और उसे वास्तव में तंबाकू की निर्भरता से उबरने में मदद करने के बीच बड़ा अंतर है। वली ने कहा, ‘‘हर धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को इसे छोड़ने के लिए प्रोत्साहित और सहयोग दिया जाना चाहिए, लेकिन चार दशक से अधिक के चिकित्सकीय अनुभव में मैंने देखा है कि किसी व्यक्ति को धूम्रपान छोड़ने के लिए कहना और उसे वास्तव में छोड़ने में मदद करना दो अलग-अलग बातें हैं।’’ उन्होंने कहा कि उनके बड़ी संख्या में ऐसे मरीज हैं, जो सिगरेट या बीड़ी पीते हैं और इसे छोड़ने के लिए संघर्ष करते हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसे में चिकित्सकों को मरीजों की मदद करते समय उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों को ध्यान में रखना चाहिए। वली ने कहा, ‘‘कोई भी निकोटीन उत्पाद 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं है, लेकिन अलग-अलग उत्पादों से जुड़े जोखिम का स्तर अलग हो सकता है।’’ उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे नए वैज्ञानिक साक्ष्य सामने आते हैं, नीतियों की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े फैसले विज्ञान पर आधारित रहें। कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, सैन फ्रांसिस्को में प्रोफेसर एमेरिटस ऑफ मेडिसिन नील एल. बेनोविट्ज ने कहा कि स्वास्थ्य प्रभावों का आकलन करते समय निकोटीन और सिगरेट पीने को एक समान नहीं माना जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि निकोटीन और सिगरेट का धूम्रपान एक ही चीज नहीं हैं तथा इसके स्वास्थ्य प्रभावों को समझने के लिए निकोटीन के औषधीय प्रभावों और तंबाकू जलाने से होने वाले व्यापक नुकसान के बीच अंतर करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि निकोटीन की लत लग सकती है और हृदय गति, रक्तचाप तथा रक्त वाहिकाओं के संकुचन पर इसके प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि हालांकि, निकोटीन उत्पादों से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम जरूरी नहीं कि सिगरेट पीने से होने वाले जोखिमों के समान हों।
उन्होंने अलग-अलग उत्पादों के वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर आकलन की जरूरत पर जोर दिया। बेनोविट्ज ने कहा कि युवाओं को निकोटीन का इस्तेमाल शुरू करने से रोकना प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वहीं, पहले से धूम्रपान कर रहे वयस्कों के मामले में उन्हें धूम्रपान छोड़ने में मदद करने और निकोटीन पहुंचाने वाले विभिन्न उत्पादों के सापेक्ष जोखिम को समझने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
भारत पर केंद्रित चर्चा में देश के तंबाकू नियंत्रण ढांचे तथा तंबाकू पर निर्भरता, नियमों के प्रवर्तन और अनौपचारिक बाजारों से जुड़ी चुनौतियों को रेखांकित किया गया। वक्ताओं ने रोकथाम और धूम्रपान छोड़ने संबंधी सेवाओं को मजबूत करने, बच्चों और धूम्रपान न करने वाले लोगों की सुरक्षा करने तथा यह सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा संचार पारदर्शी हो और विश्वसनीय वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित हो।
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