चुन्नीलाल के किरदार के लिए पहली पसंद नहीं थे जैकी श्रॉफ, कई एक्टर्स ने ठुकराई थी शाहरुख खान की 'देवदास'
जैकी श्रॉफ ने शाहरुख खान की कल्ट फिल्म 'देवदास' को लेकर एक खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि संजय लीला भंसाली की इस सुपरहिट फिल्म में 'चुन्नीलाल' का आइकॉनिक किरदार उन्हें तब मिला, जब इंडस्ट्री के कई स्टार्स इसे रिजेक्ट कर चुके थे. असल में, शाहरुख खान की मूवी 'देवदास' दूसरे एक्टर्स साइड रोल करने से डर रहे थे. हालांकि, जैकी श्रॉफ ने इस चुनौती को खुशी-खुशी स्वीकारा और इस रोल को हमेशा के लिए अमर कर दिया.
गांव की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही लखपति दीदी योजना, जानिए क्या हैं नियम और कैसे मिलेगा लाभ
UP Lakhpati Didi Yojana: गांव के घरों को कुशलता से संभालने वाली महिलाएं अब अपने दम पर परिवार की आर्थिक नींव मजबूत कर रही हैं. लखपति दीदी पहल ग्रामीण समाज में महिलाओं को नई पहचान दिलाने और उनकी कमाई बढ़ाने का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरी है. कई बार जानकारी के अभाव में लोगों को लगता है कि सरकार सीधे हर महिला के खाते में एक लाख रुपये की नकद सहायता भेज रही है, जबकि हकीकत इससे अलग है.
यह योजना महिलाओं को मुफ्त पैसे बांटने की नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और सफल उद्यमी बनाने की एक सुव्यवस्थित व्यवस्था है. इस पहल के तहत महिलाओं को सही कौशल, सरकारी मदद और आसान बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है, ताकि वे खुद का काम शुरू करके हर साल कम से कम एक लाख रुपये की टिकाऊ आय कमा सकें.
दीनदयाल अंत्योदय योजना से जुड़ी है यह पहल
लखपति दीदी पहल दरअसल केंद्र सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का ही एक अहम हिस्सा है. इसका पूरा ध्यान ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले स्वयं सहायता समूहों यानी एसएचजी की महिलाओं की आजीविका को नई दिशा देना है. गांवों में महिलाओं के पास मेहनत करने का जज्बा तो होता है, लेकिन सही मार्गदर्शन और पूंजी की कमी आड़े आ जाती है. इसी बाधा को दूर करने के लिए इस मिशन के तहत महिलाओं को आधुनिक खेती, उन्नत पशुपालन, हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई और दूसरे गैर-कृषि कारोबार से जोड़ा जाता है. सरकार का लक्ष्य केवल महिलाओं को काम सिखाना नहीं है, बल्कि उन्हें तैयार उत्पाद बेचने के लिए बड़े बाजारों और डिजिटल मंचों से जोड़ना भी है, ताकि उनकी मेहनत का पूरा दाम मिल सके.
एक लाख रुपये की मदद को लेकर क्या है असली सच्चाई
सोशल मीडिया और आम चर्चाओं में अक्सर यह दावा किया जाता है कि योजना में हर महिला को सीधे तीन किस्तों में एक लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है. आधिकारिक नियमों को देखें तो यह बात पूरी तरह सही नहीं है. सरकार किसी भी महिला को सीधे एकमुश्त या किस्तों में ऐसा कोई व्यक्तिगत नकद अनुदान नहीं देती है. इसकी जगह स्वयं सहायता समूहों को संस्थागत रूप से मजबूत किया जाता है. आधिकारिक व्यवस्था के मुताबिक पात्र समूहों को बीस से तीस हजार रुपये तक का रिवॉल्विंग फंड उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उनकी बुनियादी जरूरतें पूरी हो सकें. इसके अलावा अच्छे रिकॉर्ड वाले स्वयं सहायता समूहों को बीस लाख रुपये तक का बिना गारंटी बैंक ऋण मिलने की सुविधा है. व्यक्तिगत स्तर पर छोटे उद्योग शुरू करने की इच्छुक महिलाओं को पांच लाख रुपये तक के ऋण पर क्रेडिट गारंटी का लाभ भी दिया जाता है.
कौन बन सकती हैं इस पहल में लखपति दीदी
इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ बुनियादी मानक तय किए गए हैं, जिनका पालन करना जरूरी होता है. लखपति दीदी बनने की प्राथमिक शर्त यह है कि महिला किसी सक्रिय स्वयं सहायता समूह की नियमित सदस्य हो. आमतौर पर कम से कम दो साल तक समूह में सक्रिय रहने और कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड का लाभ ले चुकी महिलाओं को इसके लिए प्राथमिकता दी जाती है. इसके साथ ही महिला का मिशन के तहत आजीविका संबंधी प्रशिक्षण लेना और परिवार की आय बढ़ाने के लिए कम से कम दो अलग-अलग आजीविका गतिविधियों से जुड़ना भी जरूरी माना जाता है. जैसे एक महिला खेती के साथ-साथ डेयरी का काम कर सकती है या सिलाई केंद्र चला सकती है. विभिन्न राज्यों को अपने इलाके की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों के आधार पर इन शर्तों में कुछ बदलाव करने का अधिकार भी रहता है.
जुड़ने और आवेदन करने की पूरी प्रक्रिया
यदि कोई ग्रामीण महिला इस योजना का लाभ लेना चाहती है, तो उसका पहला कदम अपने गांव के स्वयं सहायता समूह से जुड़ना होना चाहिए. जो महिलाएं पहले से समूह से जुड़ी हैं, वे सीधे अपनी ग्राम संगठन, संकुल स्तरीय संघ या ब्लॉक स्तर पर बने आजीविका मिशन कार्यालय में जाकर संपर्क कर सकती हैं. इसके अलावा गांवों में सक्रिय कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन यानी सीआरपी दीदियां भी इस प्रक्रिया में पूरी मदद करती हैं. आवेदन के बाद महिला की रुचि और क्षमता के आधार पर उसे प्रशिक्षण दिलाया जाता है. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद समूह और बैंकों के माध्यम से आवश्यक वित्तीय सहायता दी जाती है. इसका सीधा मकसद महिलाओं को ऐसा सफल कारोबारी बनाना है, जिससे वे पूरे सम्मान के साथ अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकें.
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