नंदीग्राम उपचुनाव: Suvendu Adhikari ने Mamata Banerjee की चोट को नाटक बताकर साधा निशाना
नंदीग्राम (पश्चिम बंगाल), चार अक्टूबर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रचार के अंतिम दिन आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार ने 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान ममता बनर्जी के पैर में चोट लगने की ‘‘झूठी’’ कहानी के आधार पर भाजपा नेताओं को फंसाने के लिए सीआईडी का ‘‘दुरुपयोग’’ किया था। मुख्यमंत्री ने रविवार को भाजपा प्रत्याशी हासिरानी रथ के समर्थन में पदयात्रा निकाली और इस दौरान उन्होंने ममता बनर्जी की पैर की चोट को लेकर उन पर अपना हमला जारी रखा। भाजपा प्रत्याशी रथ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के करीबी रहे चंद्रनाथ रथ की मां हैं।
एक दिन पहले शुभेंदु ने संवाददाता सम्मेलन में दावा किया था कि बनर्जी ने 2021 में नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान पैर में चोट लगने का नाटक किया था। उन्होंने एक दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया था कि यह बनर्जी की चिकित्सकीय रिपोर्ट है और इसमें ‘हड्डी टूटने का कोई प्रमाण नहीं’ है। रविवार को चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा, ‘‘पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार के दौरान सीआईडी ने पूरी तरह झूठे आरोपों के आधार पर भाजपा नेताओं को परेशान किया।
उनके खिलाफ हत्या के प्रयास के मामले दर्ज किए गए, जबकि आधिकारिक दस्तावेजों में किसी तरह के फ्रैक्चर का उल्लेख नहीं था।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आचार संहिता हटने के बाद मैं कानून के तहत जरूरी सभी कदम उठाऊंगा। यदि आप वास्तव में पीड़ित हैं, तो आपको कानूनी संरक्षण मिलेगा। लेकिन यदि आप झूठे आरोप लगाते हैं, तो भारतीय न्याय संहिता में सजा के स्पष्ट प्रावधान हैं।’’ उन्होंने छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में मतदाताओं से भाजपा को पहले से अधिक समर्थन देने की अपील करते हुए कहा कि भाजपा प्रत्याशी की जीत का अंतर इस साल हुए विधानसभा चुनाव में उनके जीत के अंतर से भी अधिक होना चाहिए।
नंदीग्राम में उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री ने यह सीट छोड़कर भवानीपुर सीट बरकरार रखी है। नंदीग्राम में उन्होंने ममता बनर्जी को हराया था। शुभेंदु ने यह भी कहा कि पिछले तीन चुनावों में भाजपा को अल्पसंख्यक समुदाय के वोट नहीं मिले और उम्मीद जताई कि इस बार स्थिति बदल सकती है।
उन्होंने कहा, “देखते हैं कि क्या मुसलमान अब राम राज्य चाहते हैं। हम किसी को ‘जय श्री राम’ कहने के लिए मजबूर नहीं करते।” इस बीच, ममता बनर्जी गुट के विधायक कुणाल घोष ने शुभेंदु के आरोपों के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, “वह उपचुनाव की पूर्व संध्या पर ही यह दावा क्यों कर रहे हैं?” उन्होंने दावा किया कि उपचुनाव में ममता बनर्जी के गुट का कोई प्रत्याशी नहीं होने के बावजूद बनर्जी अब भी शुभेंदु अधिकारी की सबसे बड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बनी हुई हैं।
ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को समर्थन दिया है। दरअसल उनकी पार्टी प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद चुनाव मैदान से अपना नाम वापस ले लिया था।
MPSC अभ्यर्थियों की मांगें सुलझाने के लिए Sharad Pawar ने सरकार से संवाद की अपील की
पुणे, चार अक्टूबर राकांपा (शप) के प्रमुख शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार से एमपीएससी के अभ्यर्थियों के साथ तत्काल बातचीत शुरू करने की रविवार को अपील की, ताकि परीक्षा में पारदर्शिता और प्रशासनिक सुधारों को लेकर उनकी शिकायतों का समाधान किया जा सके। पवार ने पत्रकारों से बातचीत में पुणे और मुंबई में छात्रों के बीच व्याप्त बेचैनी का जिक्र किया और कहा कि गतिरोध समाप्त करने के लिए राज्य के नेतृत्व और छात्र संगठनों के बीच सार्थक संवाद आवश्यक है। अभ्यर्थी एमपीएससी के अध्यक्ष को हटाने और परीक्षाओं के संचालन में पारदर्शिता समेत विभिन्न मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) ने तीन अक्टूबर को निर्धारित राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2026 को स्थगित कर दिया। इससे पहले, आयोग ने कहा था कि मौजूदा परीक्षा प्रणालियों की समीक्षा कर रही एक उच्चस्तरीय समिति ने बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और अन्य हितधारकों के साथ व्यापक चर्चा की है तथा परीक्षा प्रणाली से जुड़ी बेहतर प्रक्रियाओं का भी अध्ययन किया है। पवार ने कहा, ‘‘पुणे, मुंबई और राज्य के कुछ अन्य हिस्सों में छात्रों के बीच स्पष्ट रूप से बेचैनी का माहौल है।
उन्होंने अपनी मांगों को लेकर संघर्ष का रास्ता अपनाया है और आंदोलन शुरू किया है। इस अशांति के माहौल को देखते हुए, राज्य सरकार और संबंधित संस्थानों को स्थिति का संज्ञान लेना चाहिए और आगे का रास्ता निकालने के लिए कदम उठाने चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि कुछ छात्र प्रतिनिधियों ने उनसे मुलाकात की थी और अपनी चिंताओं तथा मांगों से उन्हें अवगत कराया था। उन्होंने कहा कि सभी कदम उनकी सहमति से उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘एक तरफ मुख्यमंत्री और उनके सहयोगी हैं, तो दूसरी तरफ छात्र प्रतिनिधि हैं। अगर दोनों के बीच संवाद नहीं होगा, तो समस्या का समाधान नहीं होगा। यदि इस मुद्दे को हल करना है, तो सार्थक बातचीत होना जरूरी है।’’ पवार ने कहा कि उन्होंने आंदोलन को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से फोन पर बात की है और उनसे आग्रह किया कि नागपुर से मुंबई लौटने के बाद वह तुरंत इस मुद्दे पर ध्यान दें और छात्रों के साथ बातचीत करें।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर जरूरत पड़ी और छात्र प्रतिनिधि बातचीत के लिए तैयार हुए, तो मैं भी इसमें शामिल होने और समाधान खोजने में अपना योगदान देने के लिए तैयार हूं।’’ उन्होंने कहा कि सरकार को विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत की पहल करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनकी चिंताओं का समाधान किया जाए। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख ने कहा, ‘‘अगर राज्य का प्रमुख पहल करता है, तो छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित करने और उनकी समस्याओं का समाधान करने के प्रयासों में शामिल होना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।’’ पवार ने कहा कि उन्होंने दोनों पक्षों तक अपनी बात पहुंचा दी है और अब वह मुख्यमंत्री के जवाब और फैसले का इंतजार करेंगे।
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