हाईवे से जुड़े मुद्दों पर सरकार का फोकस, गुजरात में दो दिन चलेगा MoRTH का ‘चिंतन शिविर’
MoRTH Chintan Shivir: देशभर में सड़कों और हाइवे के जाल को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित एकता नगर में 5 और 6 अक्टूबर को दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' का आयोजन करने जा रहा है. इस अहम बैठक का मुख्य मकसद देश में चल रहे बुनियादी ढांचागत प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करना और उनके रास्ते में आने वाली रुकावटों को जड़ से खत्म करना है.
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इस पूरे कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे और इसका औपचारिक उद्घाटन करेंगे. इस खास मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और हर्ष मल्होत्रा भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे. बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ नीति निर्माताओं के साथ कई अहम एजेंसियों के प्रतिनिधि एक मंच पर बैठकर भविष्य की योजनाएं बनाएंगे.
एकता नगर में जुटेगा देश भर का नेतृत्व
गुजरात के एकता नगर में होने वाला यह चिंतन शिविर केवल एक सामान्य बैठक नहीं है, बल्कि देश की परिवहन व्यवस्था को बदलने की एक बड़ी पहल है. इसमें राज्यों के लोक निर्माण विभाग और सड़क परिवहन मंत्रालय से जुड़े मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और जमीन पर काम करने वाली निर्माण एजेंसियों के प्रमुख हिस्सा लेंगे. मंत्रालय का साफ मानना है कि जब तक केंद्र और राज्यों के बीच सीधा और पारदर्शी तालमेल नहीं होगा, तब तक बड़ी ढांचागत परियोजनाओं को समय पर पूरा करना आसान नहीं होता. इस मंच के जरिए अलग अलग राज्यों को अपने धरातल के अनुभव साझा करने और एक दूसरे के बेहतरीन मॉडल्स को समझने का बेहतरीन मौका मिलेगा.
परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने पर होगा सीधा फोकस
इस पूरे कार्यक्रम का केंद्र बिंदु उन बाधाओं को पहचानना है जो हाइवे निर्माण में देरी का कारण बनती हैं. अक्सर देखा गया है कि लालफीताशाही, नीतिगत उलझनों और आपसी तालमेल की कमी से कई बड़े हाइवे सालों तक अटके रहते हैं. इस शिविर में ऐसे आधुनिक और व्यावहारिक उपाय तलाशे जाएंगे जिन्हें पूरे देश में आसानी से लागू किया जा सके. इसके साथ ही हाइवे की निर्माण गुणवत्ता, यात्रा को सुरक्षित बनाने और उनके रखरखाव की लागत कम करने से जुड़े नीतिगत सुधारों पर भी गहरी बातचीत होगी, ताकि आम यात्रियों को विश्वस्तरीय सड़कें मिल सकें.
पांच मुख्य विषयों पर केंद्रित रहेगा मंथन
दो दिनों तक चलने वाले इस शिविर में पांच बेहद महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे. इनमें पहला सत्र पीएम गतिशक्ति और समग्र अवसंरचना योजना पर होगा, जिसमें रेलवे, बंदरगाह और हाइवे को एक साथ जोड़कर काम करने पर चर्चा होगी. दूसरा सत्र सबसे संवेदनशील मुद्दे यानी जमीन अधिग्रहण और भूमि राशि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहेगा, जिससे किसानों और जमीन मालिकों को समय पर मुआवजा मिले और काम न रुके. इसके अलावा मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और एजेंसियों की रेटिंग, हाइवे सुरक्षा तथा निर्माण गुणवत्ता की निगरानी पर अलग अलग गंभीर सत्र रखे गए हैं.
सुरक्षा और गुणवत्ता से नहीं होगा कोई समझौता
सरकार का बड़ा जोर इस बात पर भी है कि केवल सड़कें बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित बनाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. बैठक में इस बात पर विचार होगा कि जब किसी सड़क का नक्शा तैयार हो, तभी से उसमें सुरक्षा मानकों को पूरी तरह शामिल कर लिया जाए. इसके अलावा निर्माण के दौरान आधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी के जरिए काम की गुणवत्ता की जांच की जाएगी, ताकि घटिया निर्माण की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो सके.
भविष्य के नए भारत की मजबूत सड़क नीति
इस दो दिवसीय गहरे मंथन के जरिए देश में सड़क अवसंरचना के लिए एक नया और व्यावहारिक रोडमैप तैयार होने की उम्मीद है. मंत्रालय को भरोसा है कि एकता नगर का यह शिविर केंद्र और राज्यों के संबंधों को नया बल देगा. समयबद्ध तरीके से काम पूरा होने से न केवल सरकारी खजाने की बचत होगी, बल्कि देश के सुदूर इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी बहुत बड़ा सहारा मिलेगा.
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रिलायंस कम्युनिकेशंस के खिलाफ CBI ने दाखिल की चार्जशीट, 4 आरोपी बनाए गए
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom) से जुड़े LIC Investment Fraud Case में मुंबई की विशेष CBI अदालत के समक्ष चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. चार्जशीट में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस ADA ग्रुप के दो अधिकारियों और LIC के तत्कालीन चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर को आरोपी बनाया गया है.
CBI ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से जुड़ी IPC की धाराओं के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत भी आरोप लगाए हैं.
चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट
CBI के मुताबिक चार्जशीट में ये आरोपी शामिल हैं—
रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCom)
अमिताभ झुनझुनवाला, ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर, रिलायंस ADA ग्रुप
विश्वास जोशी, तत्कालीन सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, रिलायंस कैपिटल लिमिटेड
पी. वेणुगोपाल, तत्कालीन चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर, LIC
जांच एजेंसी के अनुसार मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका और दूसरे आरोपों की जांच अभी जारी है.
2012 में LIC ने लगाए थे 1,500 करोड़ रुपये
CBI की अब तक की जांच में सामने आया है कि 2012 में LIC ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड की ओर से जारी नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स (NCDs) में 1,500 करोड़ रुपये का निवेश किया था. CBI का आरोप है कि यह निवेश गंभीर गलत प्रस्तुतियों (serious misrepresentations) के आधार पर किया गया. जांच के मुताबिक, NCD के जरिए प्राप्त रकम को बाद में ADA ग्रुप की अन्य कंपनियों में डायवर्ट कर दिया गया. CBI के अनुसार इस कथित फंड डायवर्जन से LIC को नुकसान हुआ, जबकि आरोपी व्यक्तियों और संबंधित संस्थाओं को कथित तौर पर अनुचित लाभ मिला.
LIC को 3,750 करोड़ रुपये के नुकसान का आरोप
CBI ने बताया कि इस मामले में LIC को हुए कथित कुल नुकसान की राशि 3,750 करोड़ रुपये है. एजेंसी ने यह मामला 1 अप्रैल 2026 को LIC से मिली शिकायत के आधार पर दर्ज किया था.
Reliance ADA Group के खिलाफ CBI की कार्रवाई जारी
CBI के मुताबिक, CBI की बैंकिंग, सिक्योरिटीज एंड फ्रॉड ब्रांच (BSFB), दिल्ली ने विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, LIC और EPFO से मिली शिकायतों के आधार पर रिलायंस ADA ग्रुप की कई कंपनियों के खिलाफ कुल 9 FIR दर्ज की हैं.
इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं—
Reliance Communications Limited (RCom)
Reliance Home Finance Limited (RHFL)
Reliance Commercial Finance Limited (RCFL)
Reliance Telecom Limited (RTL)
रिलायंस ADA ग्रुप की अन्य कंपनियां
CBI इससे पहले रिलायंस ADA ग्रुप से जुड़े मामलों में 7 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. मौजूदा चार्जशीट को मिलाकर इन मामलों में अब तक 8 चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं. CBI के अनुसार, इन मामलों में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच
CBI ने कहा है कि इन मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में की जा रही है. एजेंसी के मुताबिक, वह इन मामलों में तेजी से और व्यापक जांच करने के लिए प्रतिबद्ध है.
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