बैंक को 93 करोड़ का चूना लगाने वाली बायोटेक फर्म पर CBI का शिकंजा, मुंबई में कई ठिकानों पर छापेमारी
CBI Major Action: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने करीब 93.44 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड के मामले में मुंबई की कंपनी Hanjer Biotech Energies Pvt. Ltd. और उसके निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इस मामले में CBI ने 2 अक्टूबर को मुंबई में कंपनी के निदेशकों से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया.
पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत पर केस दर्ज
CBI ने यह मामला 30 सितंबर 2026 को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की मुंबई स्थित SAM ब्रांच की शिकायत पर दर्ज किया. FIR में Hanjer Biotech Energies Pvt. Ltd., कंपनी के निदेशकों और गारंटरों के अलावा अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अज्ञात निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है.
CBI के मुताबिक, आरोपियों पर धोखाधड़ी के लिए आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अपराध किए जाने का आरोप है. बैंक की शिकायत के आधार पर करीब 93.44 करोड़ रुपये के नुकसान की बात सामने आई है.
135 करोड़ रुपये का टर्म लोन लेने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक साजिश के तहत अपनी संबंधित कंपनी के चालानों के आधार पर बैंक से 135 करोड़ रुपये का टर्म लोन हासिल किया.
CBI का आरोप है कि लोन से मिली रकम को उस उद्देश्य के लिए इस्तेमाल नहीं किया गया, जिसके लिए बैंक ने कर्ज मंजूर किया था. आरोप है कि रकम को दूसरे कामों में डायवर्ट और कथित तौर पर siphon off किया गया. इससे बैंक को करीब 93.44 करोड़ रुपये का नुकसान होने का आरोप है.
तलाशी में अहम दस्तावेज बरामद
CBI ने 2 अक्टूबर को मुंबई में आरोपियों से जुड़े कई परिसरों पर तलाशी ली. इस दौरान जांच से संबंधित बैंकिंग दस्तावेज और संपत्ति से जुड़े कागजात बरामद किए गए, जिन्हें जांच एजेंसी ने जब्त कर लिया है.
CBI खंगाल रही लोन की रकम का इस्तेमाल
CBI अब पूरे कथित षड्यंत्र की जांच कर रही है. एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में कौन-कौन लोग शामिल थे, सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की क्या भूमिका रही और 135 करोड़ रुपये के लोन की रकम का वास्तविक इस्तेमाल कहां किया गया. जांच के दौरान आरोपों और कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है.
हाईवे से जुड़े मुद्दों पर सरकार का फोकस, गुजरात में दो दिन चलेगा MoRTH का ‘चिंतन शिविर’
MoRTH Chintan Shivir: देशभर में सड़कों और हाइवे के जाल को अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय गुजरात के नर्मदा जिले में स्थित एकता नगर में 5 और 6 अक्टूबर को दो दिवसीय 'चिंतन शिविर' का आयोजन करने जा रहा है. इस अहम बैठक का मुख्य मकसद देश में चल रहे बुनियादी ढांचागत प्रोजेक्ट्स की समीक्षा करना और उनके रास्ते में आने वाली रुकावटों को जड़ से खत्म करना है.
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी इस पूरे कार्यक्रम की अगुवाई करेंगे और इसका औपचारिक उद्घाटन करेंगे. इस खास मौके पर केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा और हर्ष मल्होत्रा भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे. बैठक में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ नीति निर्माताओं के साथ कई अहम एजेंसियों के प्रतिनिधि एक मंच पर बैठकर भविष्य की योजनाएं बनाएंगे.
एकता नगर में जुटेगा देश भर का नेतृत्व
गुजरात के एकता नगर में होने वाला यह चिंतन शिविर केवल एक सामान्य बैठक नहीं है, बल्कि देश की परिवहन व्यवस्था को बदलने की एक बड़ी पहल है. इसमें राज्यों के लोक निर्माण विभाग और सड़क परिवहन मंत्रालय से जुड़े मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और जमीन पर काम करने वाली निर्माण एजेंसियों के प्रमुख हिस्सा लेंगे. मंत्रालय का साफ मानना है कि जब तक केंद्र और राज्यों के बीच सीधा और पारदर्शी तालमेल नहीं होगा, तब तक बड़ी ढांचागत परियोजनाओं को समय पर पूरा करना आसान नहीं होता. इस मंच के जरिए अलग अलग राज्यों को अपने धरातल के अनुभव साझा करने और एक दूसरे के बेहतरीन मॉडल्स को समझने का बेहतरीन मौका मिलेगा.
परियोजनाओं की रफ्तार बढ़ाने पर होगा सीधा फोकस
इस पूरे कार्यक्रम का केंद्र बिंदु उन बाधाओं को पहचानना है जो हाइवे निर्माण में देरी का कारण बनती हैं. अक्सर देखा गया है कि लालफीताशाही, नीतिगत उलझनों और आपसी तालमेल की कमी से कई बड़े हाइवे सालों तक अटके रहते हैं. इस शिविर में ऐसे आधुनिक और व्यावहारिक उपाय तलाशे जाएंगे जिन्हें पूरे देश में आसानी से लागू किया जा सके. इसके साथ ही हाइवे की निर्माण गुणवत्ता, यात्रा को सुरक्षित बनाने और उनके रखरखाव की लागत कम करने से जुड़े नीतिगत सुधारों पर भी गहरी बातचीत होगी, ताकि आम यात्रियों को विश्वस्तरीय सड़कें मिल सकें.
पांच मुख्य विषयों पर केंद्रित रहेगा मंथन
दो दिनों तक चलने वाले इस शिविर में पांच बेहद महत्वपूर्ण विषयों पर सत्र आयोजित किए जाएंगे. इनमें पहला सत्र पीएम गतिशक्ति और समग्र अवसंरचना योजना पर होगा, जिसमें रेलवे, बंदरगाह और हाइवे को एक साथ जोड़कर काम करने पर चर्चा होगी. दूसरा सत्र सबसे संवेदनशील मुद्दे यानी जमीन अधिग्रहण और भूमि राशि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रहेगा, जिससे किसानों और जमीन मालिकों को समय पर मुआवजा मिले और काम न रुके. इसके अलावा मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट और एजेंसियों की रेटिंग, हाइवे सुरक्षा तथा निर्माण गुणवत्ता की निगरानी पर अलग अलग गंभीर सत्र रखे गए हैं.
सुरक्षा और गुणवत्ता से नहीं होगा कोई समझौता
सरकार का बड़ा जोर इस बात पर भी है कि केवल सड़कें बनाना ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सुरक्षित बनाना सबसे पहली प्राथमिकता होनी चाहिए. बैठक में इस बात पर विचार होगा कि जब किसी सड़क का नक्शा तैयार हो, तभी से उसमें सुरक्षा मानकों को पूरी तरह शामिल कर लिया जाए. इसके अलावा निर्माण के दौरान आधुनिक तकनीक और डिजिटल निगरानी के जरिए काम की गुणवत्ता की जांच की जाएगी, ताकि घटिया निर्माण की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो सके.
भविष्य के नए भारत की मजबूत सड़क नीति
इस दो दिवसीय गहरे मंथन के जरिए देश में सड़क अवसंरचना के लिए एक नया और व्यावहारिक रोडमैप तैयार होने की उम्मीद है. मंत्रालय को भरोसा है कि एकता नगर का यह शिविर केंद्र और राज्यों के संबंधों को नया बल देगा. समयबद्ध तरीके से काम पूरा होने से न केवल सरकारी खजाने की बचत होगी, बल्कि देश के सुदूर इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी बहुत बड़ा सहारा मिलेगा.
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