Wedding Season से पहले Hotels में भारी मांग, Booking में 15 फीसदी तक का उछाल
सर्दियां शुरू होने से पहले ही होटल उद्योग में शादी समारोहों के लिए मांग तेज हो गई है। लोकप्रिय होटल और रिजॉर्ट में महीनों पहले से बुकिंग हो रही है। कई प्रमुख होटल संपत्तियों ने शादी से जुड़े कारोबार में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की है, जबकि नवंबर और फरवरी जैसे प्रमुख महीनों के लिए होटल में बुकिंग लगभग पूरी हो चुकी है। यानी इनमें बहुत कम दिन के लिए बुकिंग उपलब्ध है। देश के पहले ऑटोग्राफ कलेक्शन होटल के रूप में ब्रांडेड मैरियट इंटरनेशनल के नूर महल दिल्ली एनसीआर, करनाल के कार्यकारी निदेशक रूप प्रताप चौधरी ने पीटीआई-से कहा कि होटल के विवाह कारोबार में पिछले साल की तुलना में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि 2027 के लिए भी पर्याप्त संख्या में शादियों की बुकिंग पहले ही हो चुकी है और नवंबर, 2027 तक के लिए पूछताछ मिल रही है। चौधरी ने कहा, “विवाह समारोह के क्षेत्र में उत्साहजनक गति देखने को मिल रही है। पिछले वर्ष की तुलना में कारोबार में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और ग्राहकों का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।” उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि परिवार अब शादी के आयोजन के लिए होटल और आयोजन स्थल पहले की तुलना में काफी पहले तय कर रहे हैं। इससे होटल उद्योग को आगामी वर्षों के कारोबार की बेहतर जानकारी मिल रही है।
उन्होंने कहा कि शादी समारोह के स्वरूप में भी बदलाव आया है। परिवार अब अधिक दिन तक चलने वाले समारोह और अपनी पसंद के अनुसार व्यक्तिगत आयोजन को प्राथमिकता दे रहे हैं। नूर महल के कुल कारोबार में विवाह समारोह की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत है। यह रुझान केवल करनाल तक सीमित नहीं है। रोजिएट होटल्स एंड रिजॉर्ट्स के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कुश कपूर ने कहा कि दिल्ली स्थित उसके रिजॉर्ट में आगामी सर्दियों के विवाह सीजन के लिए काफी मजबूत मांग है और प्रमुख महीनों में उपलब्धता तेजी से कम हो रही है। कपूर ने कहा कि दिल्ली स्थित रोजिएट में नवंबर का पूरा महीना लगभग बुक हो चुका है, जबकि फरवरी की भी अधिकांश तारीखें पहले ही आरक्षित हो चुकी हैं।
उन्होंने कहा कि सर्दियों के मौसम में रिजॉर्ट के लिए शादी समारोहों की मांग बहुत अधिक है। होटल क्षेत्र के लिए शादी-विवाह का सीजन महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे कमरे, बैंक्वेट, खान-पान और आयोजन से जुड़ी विभिन्न सेवाओं की मांग एक साथ बढ़ती है। कई परिवार अब शादी के कार्यक्रम को एक से अधिक दिन तक आयोजित कर रहे हैं, जिससे होटल उद्योग को अतिरिक्त कारोबार मिल रहा है।
विवाह समारोह की यह बढ़ती मांग ऐसे समय में सामने आई है जब सर्दियों का मुख्य विवाह सीजन नजदीक है। हिंदू कैलेंडर में शुभ विवाह मुहूर्त होने के कारण इस दौरान विवाह स्थल, होटल कमरों, बैंक्वेट और अन्य सेवाओं की मांग पारंपरिक रूप से बढ़ जाती है।
Steel Ministry ने SAIL और NMDC को विदेशों में Mining Assets तलाशने को कहा
इस्पात मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लि. (सेल) और एनएमडीसी को विदेशों में खनिज संपत्तियों की तलाश करने को कहा है। इसका उद्देश्य दीर्घकालिक कच्चे माल की जरूरतों को सुरक्षित करना और उत्पादन लागत को नियंत्रित करना है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। यह पूछे जाने पर कि क्या विशेष रूप से सेल और एनएमडीसी को विदेशों में खनन परिसंपत्तियां तलाशने के लिए कहा गया है, अधिकारी ने इसकी पुष्टि की।
उन्होंने कहा कि इस कदम से भविष्य की कच्चे माल की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और लागत भी कम की जा सकेगी। हालांकि, उन्होंने इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की। इस्पात उत्पादन के लिए लौह अयस्क और कोकिंग कोयला दो प्रमुख कच्चे माल हैं। इसके अलावा चूना पत्थर और पल्वराइज्ड कोल इंजेक्शन (कोयले का चूरा) भी महत्वपूर्ण कच्चा माल है। भारत में लौह अयस्क पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, लेकिन भारतीय इस्पात कंपनियां, जिनमें सेल भी शामिल है, अपनी कोकिंग कोयले की जरूरत का करीब 85-90 प्रतिशत आयात करती हैं। यह कोयला मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया और मोजाम्बिक जैसे देशों से आता है।
इसी तरह चूना पत्थर का भी कुछ हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात किया जाता है। निजी क्षेत्र की इस्पात कंपनी जेएसडब्ल्यू स्टील भी विदेशों में कोकिंग कोयले की परिसंपत्तियां हासिल कर चुकी है। कंपनी की योजना अपनी कच्चे माल की करीब 50 प्रतिशत जरूरत अपने स्रोतों से पूरी करने की है।
वहीं, मुख्य रूप से लौह अयस्क के उत्पादन में सक्रिय एनएमडीसी अन्य खनिजों की खोज और उत्पादन के क्षेत्र में भी विस्तार करना चाहती है। इसका उद्देश्य इस्पात समेत विभिन्न उद्योगों की बढ़ती खनिज जरूरतों को पूरा करना है। एनएमडीसी के चेयरमैन अमिताव मुखर्जी ने हाल में कहा था कि उनका लक्ष्य वर्ष 2030 तक कंपनी के कुल राजस्व में लौह अयस्क के अलावा अन्य खनिजों की हिस्सेदारी को कम से कम 20 प्रतिशत तक पहुंचाना है।
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