अखिलेश यादव का गठबंधन सहयोगियों को संदेश, बोले- सीटों से ज्यादा जरूरी है जीत
UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में राज्य की राजनीति में गहमा-गहमी भी शुरू हो गई है. इस बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गठबंधन की राजनीति को लेकर सहयोगी दलों के बीच एकजुटता पर जोर दिया है. उन्होंने कहा कि चुनावी गठबंधन में सबसे बड़ा लक्ष्य सीटों का बंटवारा नहीं, बल्कि मिलकर जीत हासिल करना होना चाहिए.
अखिलेश यादव ने यह बात सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट कर कही. सपा मुखिया ने अपने संदेश में संकेत दिया कि सीटों को लेकर होने वाली बातचीत गठबंधन के मूल उद्देश्य पर हावी नहीं होनी चाहिए. उनके मुताबिक, सभी सहयोगी दलों को आपसी मतभेदों और सीटों की संख्या से ऊपर उठकर साझा रणनीति के साथ चुनाव मैदान में उतरना चाहिए.
'निगाह मंजिल पर हो तो सफर आसान'
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट की शुरुआत एक संदेश के साथ की. उन्होंने लिखा, "जब लक्ष्य स्पष्ट हो तो हाथ में हाथ होता है, निगाह मंजिल पर हो तो सफर आसान होता है!"
इसके बाद उन्होंने कहा कि गठबंधन के सामने असली सवाल यह नहीं होना चाहिए कि कौन कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेगा या कौन सी सीट किस दल के खाते में जाएगी. प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि गठबंधन के सभी घटक दल मिलकर जीत सुनिश्चित करें.
मक़सद जब साफ़ हो तो हाथ-में-हाथ होता है
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) October 4, 2026
निगाह मंज़िल पर हो तो सफ़र आसान होता है!
बात बड़ी ये नहीं है कि गठबंधन में कितनी सीटें या कौन सी सीट किसके पास जा रही है बात बड़ी ये है कि हम सबको ये सुनिश्चित करना है कि जीत गठबंधन की हो।
फिर दोहराते हैं : बात सीट की नहीं जीत की है।… pic.twitter.com/TfAxemKSon
'बात सीट की नहीं, जीत की है'
सपा अध्यक्ष ने अपने संदेश में इस बात को दोहराया कि चुनावी राजनीति में गठबंधन की सफलता को सीटों के बंटवारे से नहीं आंकना चाहिए. उन्होंने लिखा कि बात सीट की नहीं जीत की है. अखिलेश यादव ने आगे कहा कि गठबंधन की जीत केवल किसी एक पार्टी की सफलता नहीं होगी. इसे सभी सहयोगी दलों और उनके साझा प्रयास की उपलब्धि के तौर पर देखा जाना चाहिए.
सांप्रदायिकता, लोकतंत्र और संविधान का मुद्दा
इसके साथ ही अखिलेश यादव ने अपने संदेश को चुनावी सीटों की चर्चा से आगे बढ़ाते हुए सांप्रदायिकता, लोकतंत्र, संविधान और आरक्षण जैसे मुद्दों से जोड़ा. उन्होंने कहा कि गठबंधन का साझा संघर्ष ऐसा माहौल बनाने के लिए होना चाहिए, जहां सांप्रदायिकता दोबारा मजबूत न हो सके. उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था और संविधान की रक्षा के साथ-साथ आरक्षण को किसी भी तरह के खतरे से बचाने की बात भी कही. यही नहीं सपा मुखिया ने देश में सामाजिक सौहार्द कायम करने की जरूरत पर भी जोर दिया.
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'देश की तरक्की और खुशहाली फिर मुस्कुराए'
सपा प्रमुख ने अपने संदेश में देश में आपसी सद्भाव बढ़ाने और विकास की दिशा में आगे बढ़ने की बात भी कही. उन्होंने उम्मीद जताई कि सामूहिक प्रयासों के जरिए देश में फिर से सौहार्द का माहौल मजबूत होगा और तरक्की एवं खुशहाली का रास्ता खुलेगा. अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट के आखिर में "जय संविधान-जय हिंदुस्तान!" का नारा लिखा. उनके इस संदेश को गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे से जुड़े संभावित मतभेदों के बीच सहयोगी दलों को एकजुट रहने की अपील के तौर पर देखा जा रहा है.
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BJP ने महाराष्ट्र MLC चुनाव के लिए खोले पत्ते, पुणे और नागपुर की 3 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान
महाराष्ट्र विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नामों का ऐलान कर दिया है. भाजपा केंद्रीय कार्यालय 6ए, दीनदयाल उपाध्याय मार्ग, नई दिल्ली से दिनांक 4 अक्टूबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति में इस बात की जानकारी दी गई.
पुणे णे स्नातक सीट से डॉ. स्मिता योगेश जाधव को बनाया उम्मीदवार
पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने महाराष्ट्र में होने वाले स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के विधान परिषद चुनाव 2026 के लिए तीन नामों पर अपनी स्वीकृति प्रदान की है. यह प्रेस विज्ञप्ति सांसद (राज्यसभा) एवं राष्ट्रीय मुख्यालय प्रभारी तरुण चुघ द्वारा जारी की गई है. पार्टी द्वारा जारी सूची के अनुसार महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव 2026 के लिए पुणे स्नातक सीट से डॉ. स्मिता योगेश जाधव को उम्मीदवार बनाया गया है. इसके अलावा नागपुर स्नातक सीट से सुधाकर विट्ठलराव कोहले को टिकट दिया गया है. वहीं, पुणे शिक्षक सीट से कौस्तुभ मुरलीधर गावडे चुनाव लड़ेंगे.
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भाजपा ने लगाया इन चेहरों पर दांव
भाजपा ने इस बार स्नातक और शिक्षक मतदाताओं के बीच पकड़ रखने वाले चेहरों पर दांव लगाया है. पुणे स्नातक सीट से डॉ. स्मिता जाधव शिक्षित वर्ग और महिला मतदाताओं के बीच अच्छी पकड़ रखती हैं. वहीं, नागपुर से सुधाकर कोहले एक अनुभवी और संगठन से जुड़े पुराने नेता माने जाते हैं. पुणे शिक्षक सीट पर कौस्तुभ गावडे को उतारकर पार्टी ने शिक्षक समुदाय को साधने की कोशिश की है. बता दें कि महाराष्ट्र विधान परिषद की इन सीटों पर स्नातक और शिक्षक मतदाता ही मतदान करते हैं, इसलिए इन चुनावों में उम्मीदवार की शैक्षणिक पृष्ठभूमि और शिक्षक संगठनों में पकड़ काफी मायने रखती है. भाजपा ने उसी रणनीति के तहत इन नामों का चयन किया है. महाराष्ट्र में महायुति सरकार के गठन के बाद यह पहला बड़ा विधान परिषद चुनाव है, इसलिए भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती. जल्द ही पार्टी इन सीटों पर प्रचार अभियान भी तेज करेगी.
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