दिल्ली-NCR में बारिश, UP-बिहार में घना कोहरा, पहाड़ों पर बर्फबारी... शहर-शहर मौसम का कहर; आ गया भैया IMD का अलर्ट
Aaj Ka Mausam Live: दिल्ली-NCR में बारिश, यूपी-बिहार में घना कोहरा और पहाड़ों पर बर्फबारी ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया है. मौसम विभाग यानी IMD ने कई राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है. पश्चिमी विक्षोभ के असर से आने वाले दिनों में ठंड, बारिश और तेज हवाओं का दौर जारी रहेगा. आइए इस खबर में पढ़िए देश भर के मौसम का हाल.
कुनाल बोले- मस्ट विन मैच था, इसलिए लंबा खेला:रणजी में 7 घंटे तक क्रीज पर डटे रहे उत्तराखंड के कप्तान, दोहरा शतक जड़ा
रणजी ट्रॉफी के निर्णायक मुकाबले में उत्तराखंड के कप्तान कुनाल चंदेला ने 207 रन की मैराथन पारी खेली। देहरादून के अभिमन्यु क्रिकेट अकादमी मैदान पर असम के खिलाफ खेली गई यह पारी न सिर्फ टीम को संकट से बाहर निकालने वाली रही, बल्कि यह उनके फर्स्ट क्लास करियर का पहला दोहरा शतक भी बना। उन्होंने कहा- मस्ट विन मैच था, इसलिए एक-एक सत्र खेलता गया। उत्तराखंड प्रीमियर लीग (यूपीएल) सीजन-2 में टॉप स्कोरर रहने के बाद रणजी ट्रॉफी में लाल गेंद से भी उसी निरंतरता को दोहराना आसान नहीं होता, लेकिन कप्तानी का दबाव और घरेलू मैदान की अपेक्षाओं के बीच उनकी पारी बताती है कि यह सिर्फ फॉर्म नहीं, बल्कि टेक्निक और टेम्परामेंट का नतीजा है। दैनिक भास्कर ने कुनाल चंदेला से उनकी इस पारी, कप्तानी के दबाव और दिल्ली से उत्तराखंड तक के सफर पर विस्तार से बातचीत की। अब कुनाल का पूरा इंटरव्यू पढ़िए… सवाल: असम के खिलाफ आपने 207 रनों की मैराथन पारी खेली। जब आप बल्लेबाजी के लिए उतरे, तो माइंडसेट क्या था? जवाब: यह हमारे लिए एक 'मस्ट विन' (करो या मरो) गेम था। क्वालिफिकेशन के चांसेस बने रहने के लिए हमें 6 पॉइंट चाहिए थे। मेरा माइंडसेट बस यही था कि लंबा खेलना है। टीम को स्टेबिलिटी देनी है और एक बड़ा टोटल खड़ा करना है। मुझे पता था कि मैं जितना लंबा क्रीज पर खड़ा रहूंगा, स्कोर उतना बड़ा बनेगा। सवाल: यह आपके करियर का पहला दोहरा शतक है। क्या आपने इस मैच के लिए अपनी रणनीति या तकनीक में कोई विशेष बदलाव किया था? जवाब: नहीं, तकनीक में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया। सच कहूं तो जब जिम्मेदारी बढ़ती है, तो बल्लेबाजी अपने आप बेहतर हो जाती है। शॉट सिलेक्शन में थोड़ा और ठहराव लाना पड़ा। मैंने बस विकेट पर टिकने और पारी को लंबा खींचने का सोचा था। सवाल: देहरादून के मौसम और पिच का मिजाज कैसा था? क्या होम ग्राउंड होने का कोई अतिरिक्त दबाव या फायदा मिला? जवाब: विकेट बहुत अच्छा था। यह दोनों के लिए सपोर्टिव था- चाहे वो स्पिनर्स हों, फास्ट बॉलर्स हों या बल्लेबाज। शुरुआत में तेज गेंदबाजों को मदद मिली, लेकिन सेट होने के बाद यह बल्लेबाजी के लिए बेहतरीन हो गया। मेरा फोकस बस यही था कि नई गेंद का समय निकालना है, उसके बाद खेल बल्लेबाज के पक्ष में आता है। सवाल: आप यूपीएल सीजन-2 के टॉप स्कोरर रहे और अब रेड बॉल क्रिकेट में भी वही फॉर्म जारी है। फॉर्मेट बदलने पर तालमेल कैसे बिठाया? जवाब: जब सीजन की शुरुआत अच्छी होती है, तो आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होता है। चाहे रेड बॉल हो या व्हाइट बॉल, अगर रन बन रहे हैं तो वो कॉन्फिडेंस अगले मैच में कैरी होता है। तकनीक में ज्यादा बदलाव नहीं होता, सारा खेल 'टेम्परामेंट' (मानसिकता) का है। टी-20 में आक्रामकता चाहिए होती है और रणजी में धैर्य। मैंने बस अपने धैर्य पर काम किया। सवाल: एक बल्लेबाज के तौर पर दोहरा शतक लगाना और कप्तान के तौर पर टीम को लीड करना- इन दोनों भूमिकाओं में संतुलन कैसे बनाते हैं? जवाब: यह एक चुनौती भी है और अवसर भी। मैं हमेशा मानता हूं कि कप्तान को 'फ्रंट से लीड' करना चाहिए। मैंने खुद से कहा कि अगर मैं आगे बढ़कर जिम्मेदारी लूंगा और रन बनाऊंगा, तो बाकी खिलाड़ी भी प्रेरित होंगे। कप्तान का काम सिर्फ निर्देश देना नहीं, बल्कि साथ लेकर चलना होता है। जब कप्तान रन बनाता है, तो टीम का माहौल अपने आप सकारात्मक हो जाता है। सवाल: पिछले कुछ सालों में उत्तराखंड की टीम तेजी से उभरी है। आप राज्य में क्रिकेट का भविष्य कैसे देखते हैं? जवाब: भविष्य बहुत उज्ज्वल है। हमारे पास अंडर-19 और अंडर-23 से बहुत टैलेंटेड युवा आ रहे हैं। वे अच्छी तकनीक और सही 'फ्रेम ऑफ माइंड' के साथ सीनियर टीम में आ रहे हैं। जिस तरह से हम खेल रहे हैं, मुझे यकीन है कि उत्तराखंड जल्द ही घरेलू क्रिकेट का पावरहाउस बनेगा। सवाल: आपने करियर की शुरुआत दिल्ली से की और अब उत्तराखंड का नेतृत्व कर रहे हैं। एक पेशेवर क्रिकेटर के तौर पर इस बदलाव को कैसे देखते हैं? जवाब: देखिए, क्रिकेट तो दोनों जगह एक ही है। फर्क सिर्फ जिम्मेदारी का है। दिल्ली में कई अनुभवी खिलाड़ी थे, तो वहां एक आउट हो जाता था तो दूसरा संभाल लेता था। यहां उत्तराखंड में हम एक नई टीम बना रहे हैं, इसलिए यहां मेरे ऊपर जिम्मेदारी ज्यादा है। मुझे यहां अपने अनुभव का इस्तेमाल करके युवाओं को गाइड करना होता है। टैलेंट में कोई कमी नहीं है, बस अनुभव का अंतर है। सवाल: आईपीएल या इंडिया-ए के लिए क्या लक्ष्य हैं? क्या हम जल्द ही आपको बड़े मंच पर देखेंगे? जवाब: मेरा काम सिर्फ मेहनत करना और रन बनाना है। मैं सिलेक्शन के बारे में ज्यादा नहीं सोचता। हम पूरे साल ट्रेनिंग करते हैं ताकि मैच के दिन अपना बेस्ट दे सकें। अगर मैं लगातार परफॉर्म करता रहा और अपनी टीम को जिताता रहा, तो बाकी चीजें अपने आप हो जाएंगी। सवाल: उत्तराखंड के युवा क्रिकेटर्स के लिए आपका क्या संदेश है? जवाब: सिर्फ एक ही मंत्र है- ईमानदारी और फिटनेस। आप खेल के प्रति जितने ईमानदार रहेंगे, खेल आपको उतना ही वापस देगा। फिटनेस पर काम करें, गेम को समय दें और शॉर्टकट न खोजें। अगर आप प्रक्रिया सही रखेंगे, तो परिणाम जरूर मिलेंगे। अब 5 प्वाइंट्स में जानिए कुनाल की लीडरशिप क्यों है खास… 1. बदलता घरेलू क्रिकेट, उत्तराखंड की नई पहचान भारतीय घरेलू क्रिकेट अब सिर्फ मुंबई, दिल्ली या कर्नाटक तक सीमित नहीं रहा। उत्तराखंड जैसे नए राज्य अब पुरानी ताकतों को चुनौती दे रहे हैं। इस बदलाव के केंद्र में हैं रणजी ट्रॉफी कप्तान कुनाल चंदेला, जिन्होंने दिल्ली के क्रिकेट सर्किट से निकलकर उत्तराखंड की कमान संभाली और टीम को नई पहचान दी। 2. टर्निंग पॉइंट: रणजी सत्र 2025-26 और कप्तानी की मुहर 31 वर्षीय कुणाल चंदेला के लिए मौजूदा रणजी सत्र करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। टीम प्रबंधन ने उन्हें पूर्णकालिक कप्तानी सौंपी और उन्होंने असम के खिलाफ 207 रन की पारी खेलकर भरोसे को सही ठहराया। यह पारी सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि एक लीडरशिप नॉक थी। 3. कप्तानी की सोच: जीत के लिए जोखिम का फैसला 460/7 के स्कोर पर पारी घोषित करना कुणाल की आक्रामक और मैच-विनिंग सोच को दर्शाता है। वे जानते थे कि मैच जीतने के लिए गेंदबाजों को पर्याप्त समय देना जरूरी है। यह फैसला बताता है कि वे सिर्फ रन बनाने वाले कप्तान नहीं, बल्कि रणनीतिक लीडर भी हैं। 4. दिल्ली से देहरादून: चुनौती से समाधान तक का सफर दिल्ली की कड़ी प्रतिस्पर्धा में पले-बढ़े कुणाल ने 2017-18 में दिल्ली को रणजी फाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। चोट और चयन की राजनीति के चलते मौके कम हुए, तो 2021 में उन्होंने उत्तराखंड का रुख किया। यहां सीम और स्विंग वाली पिचों पर उनकी तकनीक और निखर गई, वहीं अनुभवी मेंटर्स ने उनके मानसिक खेल को मजबूत किया। 5. तकनीक और फिटनेस: संकटमोचक बनने की असली वजह क्रिकेट समीक्षकों के मुताबिक, कुणाल ने अपनी स्कोरिंग जोन का विस्तार किया है। पहले वे ऑफ स्टंप के बाहर संघर्ष करते थे, अब गेंद छोड़ने की समझ और नियंत्रित पुल-हुक शॉट उनकी ताकत बन चुके हैं। सात घंटे तक बल्लेबाजी और फिर मैदान पर कप्तानी सुधरी फिटनेस इस बात का सबूत है कि वे क्यों उत्तराखंड क्रिकेट के ‘संकटमोचक’ कहलाते हैं। कप्तानी का 'चंदेला मॉडल' कुनाल 'बोलने' वाले कप्तान से ज्यादा 'करके दिखाने' वाले कप्तान हैं। त्रिपुरा के खिलाफ दूसरी पारी में 83* रन बनाकर मैच बचाना हो या राजस्थान के खिलाफ हाई-स्कोरिंग मैच में टीम का मनोबल बनाए रखना, उन्होंने हर मोर्चे पर उदाहरण पेश किया है। उन्होंने आकाश मधवाल जैसे गेंदबाजों को आक्रमण की छूट दी और अवनीश सुधा जैसे युवाओं को खुलकर खेलने का मौका दिया। आगे की राह: आईपीएल की दस्तक टी-20 स्ट्राइक रेट 134.84 बताता है कि कुनाल एंकर के साथ-साथ गियर बदलने की क्षमता रखते हैं। घरेलू क्रिकेट में ऐसे भारतीय बल्लेबाजों की हमेशा मांग रहती है। असम के खिलाफ दोहरा शतक इस बात का संकेत है कि क्लास और धैर्य अब भी क्रिकेट की सबसे बड़ी पूंजी हैं। जिस निरंतरता से कुनाल चंदेला रन बना रहे हैं, उससे साफ है- उत्तराखंड क्रिकेट फिलहाल सुरक्षित हाथों में है। --------------------- ये खबर भी पढ़ें : मेडल तो जीते, लेकिन उत्तराखंड में नौकरी का वादा अधूरा: नेशनल गेम्स के हीरो अब भी नियुक्ति से दूर, 11 महीने से ‘फाइलों’ में कैद 243 मेडलिस्ट्स का भविष्य उत्तराखंड के 38वें राष्ट्रीय खेलों में सिल्वर मेडल जीतने वाली फुटबॉल टीम के खिलाड़ी आज भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। मंच से तालियों के बीच किए गए वादों को करीब एक साल बीत चुका है, लेकिन खिलाड़ियों के हिस्से अब तक सिर्फ आश्वासन आए हैं। (पढ़ें पूरी खबर)
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