डोनाल्ड ट्रंप की खुली धमकियों के बीच ईरानी अधिकारी ने पुतिन से की मुलाकात
नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। ईरान को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर बड़े स्ट्राइक की धमकी दे रहे हैं और समुद्र में बड़े युद्धपोत को उतार रहे हैं, दूसरी ओर वह कह रहे हैं कि हम सभी तरीके से तैयार है। हमला करने से बेहतर बातचीत से मामला हल करेंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति की धमकियों के बीच ईरान के उच्च अधिकारी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की है।
बता दें कि ईरानी अधिकारी और पुतिन की इस मुलाकात को लेकर पहले कोई भी जानकारी नहीं दी गई थी। रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने शुक्रवार को बिना बताए उच्च स्तरीय मीटिंग में ईरान की सुप्रीम राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी का क्रेमलिन में स्वागत किया।
सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के वरिष्ठ सलाहकार लारीजानी को पिछले अगस्त में इस पोस्ट पर नियुक्त किया गया था। इससे पहले उन्होंने ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी एयर स्ट्राइक के बाद रूस का दौरा किया था। क्रेमलिन ने एक बयान में कहा, हेड ऑफ स्टेट ने क्रेमलिन में ईरान की सुप्रीम राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी का स्वागत किया, जो रूस के दौरे पर हैं।
हालांकि, दोनों नेताओं के बीच क्या बातचीत हुई और मुलाकात का मुद्दा क्या था? इसे लेकर कोई भी जानकारी क्रेमलिन की ओर से साझा नहीं की गई है। रूस में ईरान के राजदूत काजम जलाली ने बाद में कहा कि मीटिंग में दोनों देशों के संबंधों पर फोकस था और इसमें जरूरी क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सलाह-मशविरा शामिल था।
बता दें कि इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने ईरानी अधिकारी पर प्रतिबंध लगा दिया। लारीजानी का यह दौरा वाशिंगटन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध के बाद हुआ। अमेरिका ने उन पर दिसंबर के आखिर से ईरान में खामेनेई के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाने में शामिल होने का आरोप लगाया।
अमेरिका ने हिंद महासागर में घातक यूएसएस अब्राहम लिंकन को उतारा है, जो धीरे-धीरे ईरान के करीब जा रहा है। इस बीच पेंटागन चीफ पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो भी फैसला करेंगे, उसे निभाने के लिए सेना तैयार रहेगी।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बने पाकिस्तानी आतंकी संगठन: रिपोर्ट
वॉशिंगटन, 31 जनवरी (आईएएनएस)। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिमी समाज, मीडिया और सरकारें अब भी “जिहादी आतंकवाद” को लेकर दूरदर्शिता की कमी दिखा रही हैं और पाकिस्तान समेत अन्य क्षेत्रों में इसकी गहराई, विचारधारा, प्रेरणाओं और बदलती रणनीतियों को समझने या प्रभावी ढंग से उससे निपटने में विफल रही हैं। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए पाकिस्तान अपने क्षेत्र में सक्रिय आतंकवादी संगठनों को समर्थन दे रहा है, जो क्षेत्रीय विस्तारवाद, जातीय सफाए और व्यापक क्षेत्रीय इस्लामीकरण में संलिप्त हैं।
अमेरिकी मीडिया आउटलेट ‘पीजे मीडिया’ के लिए लिखते हुए तुर्की की पत्रकार उज़ाय बुलुत ने कहा, “कई पश्चिमी लोग जिहादी आतंकवाद को केवल विदेश नीति से जुड़ी शिकायतों या अलग-थलग घटनाओं के नजरिए से देखते हैं, न कि एक वैचारिक और धार्मिक रूप से प्रेरित परिघटना के रूप में। इसके कारण आतंकवाद-रोधी रणनीतियां कमजोर पड़ जाती हैं और कहीं न कहीं पाकिस्तान जैसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को अप्रत्यक्ष समर्थन भी मिल सकता है। यह संकीर्ण दृष्टि तब तक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाती रहेगी, जब तक जिहादी आतंकवाद और उसके समर्थकों के प्रति पश्चिमी विदेश नीति में मूलभूत बदलाव नहीं होता।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान की सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठान द्वारा समर्थित आतंकवादी संगठन दक्षिण एशिया में गंभीर सुरक्षा खतरा बने हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान मरकज़ी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) एक पंजीकृत राजनीतिक दल है, जिसकी स्थापना 2023 में हुई और जिसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) से जुड़े नवीनतम राजनीतिक मोर्चे के रूप में देखा जाता है। लश्कर-ए-तैयबा को संयुक्त राष्ट्र की आईएसआईएस और अल-कायदा प्रतिबंध सूची (प्रस्ताव 1267) के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है।
बुलुत के अनुसार, लाहौर मुख्यालय वाला पीएमएमएल एक इस्लामवादी एजेंडा को बढ़ावा देता है। पार्टी ने 2024 के आम चुनावों में देशभर में 200 से अधिक उम्मीदवार उतारे, जिनमें लाहौर और कराची जैसे प्रमुख क्षेत्रों के उम्मीदवार भी शामिल थे, हालांकि पार्टी को कोई सीट नहीं मिली।
रिपोर्ट में कहा गया कि पीएमएमएल के प्रमुख नेताओं में ताल्हा सईद शामिल हैं, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित आतंकवादी हाफिज मोहम्मद सईद (लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक) के पुत्र हैं, साथ ही लश्कर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोग भी नेतृत्व में शामिल हैं।
इसके अलावा, एक अन्य आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) की पाकिस्तान में लोकप्रियता बढ़ी है।
2019–2020 के दौरान उभरा टीआरएफ, लश्कर-ए-तैयबा का एक प्रॉक्सी संगठन बताया गया है, जिसे जानबूझकर “स्थानीय और धर्मनिरपेक्ष प्रतिरोध” के रूप में पेश किया गया, ताकि उसके इस्लामवादी स्वरूप को छिपाया जा सके और वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) के दबाव के बीच वैश्विक आतंकवाद निगरानी से बचा जा सके।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation





















