2025 में 7.6 लाख से अधिक पाकिस्तानियों ने काम की तलाश में छोड़ा देश: रिपोर्ट
नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। वर्ष 2025 में 7.6 लाख से अधिक पाकिस्तानियों ने रोजगार की तलाश में देश छोड़ दिया। यह आंकड़ा देश में बढ़ते आर्थिक दबाव और नौकरी के अवसरों की कमी को उजागर करता है। यह जानकारी पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय की मंथली इकोनॉमिक अपडेट एंड आउटलुक (जनवरी 2026) रिपोर्ट में सामने आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, निर्यात, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और समग्र आर्थिक वृद्धि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में प्रदर्शन कमजोर रहा। इसके विपरीत, विदेश से आने वाला धन (रेमिटेंस) ही अर्थव्यवस्था का एकमात्र मजबूत सहारा बनकर उभरा है।
बिज़नेस रिकॉर्डर की रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में रेमिटेंस बढ़कर 19.7 अरब डॉलर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 10.6 प्रतिशत अधिक है। यह राशि एफडीआई से 23 गुना अधिक रही और इसी अवधि में निर्यात आय से 4.2 अरब डॉलर ज्यादा थी।
रेमिटेंस में यह तेज़ बढ़ोतरी सीधे तौर पर बेहतर नौकरी, स्थिर आय और बेहतर जीवन स्थितियों की तलाश में देश छोड़ने वाले पाकिस्तानियों की बढ़ती संख्या से जुड़ी है। सरकार इस प्रवृत्ति को सकारात्मक रूप में देख रही है, क्योंकि रेमिटेंस से सालाना लगभग 40 अरब डॉलर की आमदनी हो रही है, जो गैर-ऋण विदेशी आय का सबसे बड़ा स्रोत बन गया है।
हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बड़े पैमाने पर हो रहा यह पलायन घरेलू आर्थिक हालात से श्रमिकों की गहरी असंतुष्टि को दर्शाता है।
बिज़नेस रिकॉर्डर के हवाले से बताया गया कि पाकिस्तान में बेरोज़गारी दर 7.1 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो पिछले 21 वर्षों का उच्चतम स्तर है। बेरोज़गारी सभी आयु वर्गों, लिंगों और क्षेत्रों में बढ़ी है। बीते दो वर्षों में ही 15 लाख से अधिक पाकिस्तानियों ने ठहरी हुई मजदूरी, सीमित रोजगार अवसरों और बढ़ती महंगाई के कारण देश छोड़ दिया।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह प्रवृत्ति अब केवल खाड़ी देशों में जाने वाले अकुशल श्रमिकों तक सीमित नहीं रही। सूचना प्रौद्योगिकी, चिकित्सा, इंजीनियरिंग और लेखा जैसे क्षेत्रों के बड़ी संख्या में कुशल पेशेवर भी देश छोड़ रहे हैं। इससे गंभीर ब्रेन ड्रेन की आशंका बढ़ गई है, जो पाकिस्तान की दीर्घकालिक आर्थिक क्षमता को कमजोर कर सकती है।
आईटी क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश पलायन केवल ऊंचे वेतन के कारण नहीं हो रहा है। सीमित करियर विकास, कमजोर शोध एवं नवाचार व्यवस्था, नियामक पाबंदियां और अविश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना पेशेवरों को विदेश जाने के लिए मजबूर कर रही हैं। कई लोग इंटरनेट नियंत्रण और नियामकीय अड़चनों को भी डिजिटल अर्थव्यवस्था के विकास में बड़ी बाधा मानते हैं।
इसी तरह के रुझान अब अन्य ज्ञान-आधारित क्षेत्रों में भी दिखने लगे हैं। हालांकि विदेश में काम करने से व्यक्तियों को अनुभव और कौशल मिलता है, लेकिन प्रशिक्षित पेशेवरों का लगातार देश छोड़ना इस बात का संकेत है कि शिक्षा की लागत पाकिस्तान उठाता है, जबकि लाभ अन्य देश उठाते हैं।
--आईएएनएस
डीएससी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
ट्रंप की धमकियों पर बरसा ईरान, कहा- एक गलती और यूएस-इजरायल समेत सबकी सुरक्षा खतरे में होगी
तेहरान, 31 जनवरी (आईएएनएस)। ईरान के आर्मी चीफ आमिर हतामी ने शनिवार को चेतावनी दी कि अगर अमेरिका कोई गलती करता है तो वह निश्चित रूप से अपनी और इजरायल और पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र की सुरक्षा को खतरे में डाल देगा। यह जानकारी सरकारी न्यूज एजेंसी आईआरएनए ने दी।
तेहरान में एक राष्ट्रीय कार्यक्रम में आमिर हतामी ने अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरानी सेना की तैयारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा, आज, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की सेना पूरी तरह से रक्षा और सैन्य तैयारी में है और इलाके में दुश्मन की हरकतों पर करीब से नजर रख रही है। हमारी उंगली ट्रिगर पर है।
उन्होंने आगे कहा कि अगर दुश्मन कोई गलती करता है तो वह बेशक अपनी और इजरायल और इलाके की सुरक्षा को खतरे में डालेगा। इसके साथ ही उन्होंने पड़ोसी देशों की इस घोषणा का भी स्वागत किया कि वे ईरान के खिलाफ अपने इलाके या एयरस्पेस का इस्तेमाल नहीं होने देंगे। ये देश जानते हैं कि ईरान के खिलाफ कोई भी असुरक्षा पूरे इलाके को असुरक्षित बना देगी।
हतामी ने इस बात पर जोर दिया कि अगर दूसरा पक्ष समस्या का हल निकालने के लिए तैयार है तो उसे ईरानी देश के साथ इज्जत से पेश आना चाहिए। ईरानी नेता की ओर से यह चेतावनी तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बढ़ते तनाव के बीच आई है।
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन के नेतृत्व में एक बड़ा युद्धपोत ईरान की ओर बढ़ रहा है। इसके साथ ही ट्रंप ने चेतावनी दी कि तेहरान के लिए अमेरिका के साथ डील करने का समय खत्म होता जा रहा है।
वहीं, ट्रंप की हर धमकी पर ईरान भी मुंहतोड़ जवाब दे रहा है। ईरान के विदेश मंत्री सईद अब्बास अराघची ने शुक्रवार को इस्तांबुल में कहा कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करने को तैयार है, लेकिन उसे कोई खतरा नहीं है।
दूसरी तरफ, मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलती ने शनिवार को अमेरिका और ईरान से बातचीत फिर से शुरू करने और न्यूक्लियर मुद्दे पर शांतिपूर्ण, आम सहमति से समझौता करने की अपील की।
मिस्र के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि अब्देलती ने ईरान, कतर, तुर्किए और ओमान के अपने समकक्षों के साथ-साथ ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ के साथ अलग-अलग फोन कॉल पर बात की।
--आईएएनएस
केके/डीकेपी
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