Gold-Silver Price Crash: Budget 2026 से पहले सोना-चांदी हुआ सस्ता, क्या अभी और भी गिरेंगी कीमत? यहां जानिए
Gold-Silver Price Crash: हाल के दिनों में सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था, लेकिन अब अचानक बड़ी गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट कई कारणों से आई है, जिनमें सबसे बड़ी वजह मुनाफावसूली है. जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं, तो कई निवेशकों ने अपना फायदा निकाल लिया, जिससे बिकवाली बढ़ी और दाम नीचे आ गए.
सोना-चांदी की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह
चांदी की कीमतों में गिरावट सोने से ज्यादा रही है. जानकारों का कहना है कि चांदी की हालिया तेजी असली मांग से ज्यादा सट्टेबाजी के कारण थी. इलेक्ट्रिक व्हीकल और सोलर सेक्टर की मांग का हवाला देकर कीमतें बढ़ाई गईं, लेकिन असली खपत उतनी नहीं बढ़ी. इसी वजह से अब चांदी में निवेश जोखिम भरा माना जा रहा है.
दूसरी ओर, सोना अब भी सुरक्षित निवेश माना जा रहा है, लेकिन उसमें भी सावधानी जरूरी है. वैश्विक स्तर पर अमेरिका की नीतियां, चीन के साथ व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव का असर कीमती धातुओं पर पड़ा है. तनाव कम होने से सोने की सुरक्षित निवेश वाली मांग भी थोड़ी घटी है. अब निवेशकों की नजर आने वाले आर्थिक फैसलों और बजट पर टिकी है, जो आगे की दिशा तय कर सकते हैं.
यह भी पढ़ें- Gold-Silver Price Today: बजट से पहले चांदी की कीमतों में 1.25 लाख रुपये की गिरावट, इतना सस्ता हुआ सोना
Union Budget 2026: टैक्स में छूट, सुरक्षित रेल सफर और सस्ता घर, क्या कल मिडिल क्लास की उम्मीदों पर मुहर लगाएंगी वित्त मंत्री?
Union Budget 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी यानी कल केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी. यह बजट ऐसे समय में आ रहा है जब भारतीय अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत से अधिक की विकास दर के साथ दुनिया में अपनी झंडा लहरा रहा है. ऐसे में देश के मध्यम वर्ग से लेकर छोटे उद्यमियों और किसानों तक, हर वर्ग की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार उनके बटुए को कितनी राहत देगी. आर्थिक सर्वेक्षण के उत्साहजनक आंकड़ों के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि यह बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि आम आदमी की जरूरतों को पूरा करने वाला रोडमैप होगा.
मिडिल क्लास और इनकम टैक्स?
सैलरीड क्लास के लिए इस बजट में सबसे बड़ा सवाल इनकम टैक्स को लेकर है. पिछले साल हुए बदलावों के बाद अब टैक्सपेयर्स बड़े बदलाव के बजाय स्थिरता और लक्षित राहत चाहते हैं. नौकरीपेशा वर्ग की सबसे बड़ी मांग 'स्टैंडर्ड डिडक्शन' को 75,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये करने की है, ताकि महंगाई के बोझ को कम किया जा सके. इसके अलावा 12 लाख से 20 लाख रुपये की आय वाले स्लैब में बदलाव की उम्मीद की जा रही है, जिससे लोगों के हाथों में खर्च करने के लिए अधिक पैसा बच सके. लोग चाहते हैं कि टैक्स के नियम इतने सरल हों कि उन्हें अपना रिटर्न भरने के लिए विशेषज्ञों के चक्कर न काटने पड़ें.
रेलवे का नया चेहरा
भारतीय रेलवे के लिए यह बजट सुरक्षा और आधुनिकीकरण के लिहाज से ऐतिहासिक हो सकता है. हालिया रेल घटनाओं को देखते हुए सरकार का पूरा जोर 'कवच 4.0' सिस्टम पर है, जिसके लिए फंड में भारी बढ़ोतरी संभव है. यात्रियों के लिए सबसे बड़ी भावनात्मक मांग वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली रेल किराए में छूट की बहाली है, जो महामारी के समय से बंद है. साथ ही, लंबी दूरी की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए 24 कोच वाली 'वंदे भारत स्लीपर' ट्रेनों के उत्पादन और आम आदमी के लिए 17,000 नए नॉन-एसी कोच बनाने की योजना को इस बजट में हरी झंडी मिल सकती है.
आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
बदलते वैश्विक हालातों और तकनीकी युद्ध के दौर में भारत अपनी रक्षा तैयारियों को और पुख्ता करने जा रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि रक्षा बजट को जीडीपी के 3 प्रतिशत तक ले जाने की जरूरत है, ताकि सेना न केवल पारंपरिक हथियारों बल्कि साइबर और स्पेस वारफेयर के लिए भी तैयार रहे. इस बार का फोकस केवल हथियार खरीदने पर नहीं, बल्कि उन्हें भारत में बनाने और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर होगा. इससे न केवल सेना मजबूत होगी, बल्कि देश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
रियल एस्टेट और एनर्जी
घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए 'अफोर्डेबल हाउसिंग' यानी किफायती घरों को लेकर बड़ी घोषणाएं हो सकती हैं. मध्यम वर्ग को घर खरीदने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली छूट का दायरा बढ़ाया जा सकता है. वहीं दूसरी ओर, भारत की 'नेट-जीरो' की प्रतिबद्धता को देखते हुए सोलर और विंड एनर्जी के साथ-साथ बैटरी स्टोरेज तकनीक पर सरकार निवेश बढ़ा सकती है. इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स की कम दरों को जारी रखते हुए सरकार प्रदूषण मुक्त भविष्य की ओर कदम बढ़ाना चाहती है.
छोटे उद्योगों को संजीवनी
बजट 2026 में नौकरियों के सृजन और एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देना सरकार की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है. छोटे उद्योगों और स्टार्टअप्स को बड़े महानगरों से निकालकर छोटे शहरों तक पहुंचाने के लिए विशेष इंसेंटिव दिए जा सकते हैं. चुनाव वाले राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और केरल के लिए नई सड़कों और शहरी परियोजनाओं का ऐलान हो सकता है. यह बजट कृषि क्षेत्र में सुधार, डिजिटल क्रांति और बुनियादी ढांचे के विकास के जरिए एक विकसित भारत की नींव रखने की कोशिश करेगा.
ये भी पढ़ें: Union Budget 2026: क्या मिडिल फैमिली को मिलेगी टैक्स से आजादी और किसानों को पसीने का सही मोल?
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation





















