Health Tips: Low Carb Diet से बढ़ सकता है बैड कोलेस्ट्रॉल, Stroke और Heart Attack का जोखिम
शरीर को हेल्दी और फिट रखने के लिए हेल्थ एक्सपर्ट लोगों को अपनी डाइट में सुधार करने के लिए बोलते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक हमारी डाइट में उन चीजों की मात्रा ज्यादा होनी चाहिए, जिनसे हमारे शरीर को अधिकतर पोषक तत्व प्राप्त हो सकें। खाने में फाइबर, विटामिन्स और प्रोटीन वाली चीजों को शामिल करना चाहिए। इससे न सिर्फ वजन में सुधार होता है, बल्कि शुगर लेवल भी कंट्रोल में रहता है।
वेट बढ़ना कभी बीमारियों की वजह होता है। वहीं जब बात वजन कंट्रोल करने की हो, तो लोगों के बीच लो-कार्ब डाइट काफी लोकप्रिय है। माना जाता है कि आलू, ब्रेड रोटी-चावल और दूसरी कार्ब वाली चीजों को कम खाने से सेहत को लाभ मिलता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि वजन कंट्रोल करने के लिए ली जाने वाली डाइट सभी लोगों के लिए फायदेमंद नहीं होती है।
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इसको लेकर हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि लो कार्ब्स वाली डाइट लेने से कुछ लोगों में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल तेजी से बढ़ सकता है। वहीं हेल्थ एक्सपर्ट बैड कोलेस्ट्रॉल को पहले ही धमनियों की दीवारों में फैट जमा करके नसों को संकरा करने और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ाने वाला बता चुके हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि क्या लो कार्ब डाइट नहीं लेना चाहिए और इस बारे में हेल्थ एक्सपर्ट का क्या मानना है।
जानिए लो कार्ब डाइट के खतरे
लो कार्बोहाइड्रेट एक ऐसी डाइट है, जिसमें आलू, रोटी और ब्रेड जैसी चीजें कम खाई जाती हैं, जोकि आजकल काफी ज्यादा लोकप्रिय हो रही हैं। इस डाइट को ब्लड शुगर कंट्रोल करने, वेट लॉस और डायबिटीज आदि से बचने के लिए लिया जाता है।
लेकिन एक नई रिसर्च ने इस डाइट को लेकर लोगों में चिंता बढ़ा दी है। एक अध्ययन में पाया गया कि कुछ लोगों द्वारा लो कार्ब वाली डाइट लेने से उनका कोलेस्ट्रॉल का लेवल काफी बढ़ सकता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और दिल संबंधी बीमारियों का खतरा अधिक हो सकता है।
हाई कोलेस्ट्रॉल धमनियों को संकरा करता है और स्ट्रोक व हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ाता है। जोकि हर साल लाखों लोगों की मौत की वजह बनता है। इससे यह पता चलता है कि कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें शरीर को ऊर्जा देने के लिए जरूरी हैं।
वहीं पहले के कुछ अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि ऐसी डाइट शरीर में एलडीएल को बढ़ाती है। यह शरीर से अतिरिक्त फैटी पदार्थ और धमनियों में जमा चर्बी को कम कर सकती है। लेकिन नई रिसर्च में इस बात का संकेत मिला है कि जिन लोगों को पहले से हार्ट संबंधी बीमारी हैं, उनके लिए यह डाइट गंभीर समस्याओं की वजह बन सकती है।
अध्ययन में क्या निकला
शोधकर्ताओं ने जांच में यह समझने का प्रयास किया कि क्या किसी व्यक्ति के जेनेटिक्स ऐसा संकेत दे सकते हैं कि उसके लिए लो कार्ब डाइट फायदेमंद रहेगी। इसलिए 600 से ज्यादा वयस्कों के ट्रायल के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
जिन लोगों ने हेल्दी लो कार्ब या हेल्दी लो फैट डाइट फॉलो की थी, उनमें वेट लॉस के मामले में दोनों डाइट से एक्सपर्ट को कुछ खास लाभ नहीं दिखा।
वहीं कुछ प्रतिभागियों के सैचुरेटेड फैट वाली डाइट, जेनेटिक डेटा और छह महीने में बैड कोलेस्ट्रॉल में होने वाले बदलावों को समझने का प्रयास किया।
इसमें यह पाया गया कि जिन लोगों में आनुवांशिक रूप से एलडीएल बढ़ता था, उनमें लो-कार्ब डाइट लेने के दौरान बैड कोलेस्ट्रॉल में ज्यादा बढ़त पाई गई।
हालांकि इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि कुछ लोग कार्बोहाइड्रेट कम करते समय चीज और रेड मीट जैसे ज्यादा फैट वाली चीजें खाने लगते हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
एक्सपर्ट की मानें, तो किसी व्यक्ति को रोजाना कुल कैलोरी में सैचुरेटेड फैट की मात्रा 10% से अधिक नहीं होनी चाहिए।
वहीं पुरुषों के लिए रोज अधिकतम सिर्फ 30 ग्राम सैचुरेटेड फैट और महिलाओं के लिए सिर्फ 20 ग्राम इसकी मात्रा रखने की सलाह देते हैं।
हेल्थ एक्सपर्ट के मुताबिक हार्ट हेल्थ को ठीक रखने के लिए डाइट में सैचुरेटेड फैट कम करें और इसकी जगह ओमेगा 2 और अनसैचुरेटेड फैट को बढ़ाएं। वहीं किसी दूसरे की डाइट के फायदों को देखकर खुद से कोई डाइट नहीं शुरू करनी चाहिए। हेल्थ एक्सपर्ट से सेहत की जांच कराएं और फिर उसी के आधार पर डाइट लें।
Shardiya Navratri 2026 Date: 11 अक्टूबर से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि, जानें नौ दिनों में मां के स्वरूप, शुभ रंग और भोग
हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर दिन देवी के अलग स्वरूप की आराधना की जाती है और उनके स्वरूप के अनुसार रंग और भोग का भी महत्व बताया गया है।
पंचांग के अनुसार, शारदीय नवरात्रि 2026 की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी। इस दौरान पहले दिन मां शैलपुत्री से लेकर नौवें दिन मां सिद्धिदात्री तक देवी के नौ स्वरूपों की पूजा की जाएगी।
श्रद्धालु अपनी आस्था और परंपरा के अनुसार देवी को अलग-अलग भोग अर्पित करते हैं और शुभ रंग के वस्त्र पहनकर पूजा-अर्चना करते हैं। आइए जानते हैं नौ दिनों में किस दिन किस देवी की पूजा होगी, कौन सा रंग शुभ माना जाता है और किस भोग की परंपरा है।
पहला दिन: मां शैलपुत्री
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। उन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां शैलपुत्री की आराधना से भक्तों को शक्ति और स्थिरता का आशीर्वाद मिलता है।
शुभ रंग: पीला
भोग: गाय का घी
मान्यता है कि मां शैलपुत्री को घी का भोग अर्पित करने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।
दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा होती है। देवी का यह स्वरूप तप, संयम और साधना का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, उनकी आराधना से धैर्य और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
शुभ रंग: हरा
भोग: शक्कर या सफेद मिठाई
मान्यता के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाने से सौभाग्य में वृद्धि होती है।
तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा
तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित होने के कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। उनका स्वरूप साहस और शक्ति से जुड़ा माना जाता है।
शुभ रंग: ग्रे
भोग: दूध या खीर
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां चंद्रघंटा की आराधना से जीवन के दुख और परेशानियां दूर होती हैं।
चौथा दिन: मां कूष्मांडा
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी दिव्य मुस्कान से सृष्टि की रचना की थी। देवी का यह स्वरूप ऊर्जा और सृजन शक्ति से जुड़ा माना जाता है।
शुभ रंग: नारंगी
भोग: मालपुआ
मान्यता के अनुसार, मां कूष्मांडा की पूजा से बुद्धि और विवेक का विकास होता है।
पांचवां दिन: मां स्कंदमाता
पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। देवी की गोद में भगवान कार्तिकेय विराजमान रहते हैं, जिन्हें स्कंद नाम से भी जाना जाता है। इसी कारण देवी को स्कंदमाता कहा जाता है।
शुभ रंग: सफेद
भोग: केला
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां स्कंदमाता की आराधना से संतान सुख और परिवार में खुशहाली का आशीर्वाद मिलता है।
छठा दिन: मां कात्यायनी
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी को शक्ति और साहस का स्वरूप माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए मां कात्यायनी की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है।
शुभ रंग: लाल
भोग: शहद
मान्यता के अनुसार, मां कात्यायनी की आराधना से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है।
सातवां दिन: मां कालरात्रि
सातवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाती है। देवी का स्वरूप उग्र माना जाता है, लेकिन भक्तों के लिए उन्हें कल्याणकारी स्वरूप वाली देवी माना जाता है।
शुभ रंग: शाही नीला
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां कालरात्रि की आराधना से भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है।
आठवां दिन: मां महागौरी
नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। इस दिन अष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। देवी महागौरी को शांति, पवित्रता और सौम्यता का स्वरूप माना गया है।
शुभ रंग: गुलाबी
भोग: नारियल
मान्यता के अनुसार, मां महागौरी की कृपा से घर-परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
नौवां दिन: मां सिद्धिदात्री
नवरात्रि के नौवें और अंतिम दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। देवी सिद्धिदात्री को सिद्धियों की देवी माना जाता है। नवरात्रि के अंतिम दिन भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं और कई स्थानों पर कन्या पूजन की परंपरा भी निभाई जाती है।
शुभ रंग: बैंगनी
भोग: हलवा-पूरी
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां सिद्धिदात्री की आराधना से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
नवरात्रि में रंग और भोग का क्या महत्व है?
नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा के साथ अलग-अलग रंग और भोग की परंपराएं जुड़ी हुई हैं। हालांकि, रंग और भोग से जुड़ी परंपराएं क्षेत्र, परिवार और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। श्रद्धालु अपनी आस्था और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
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