पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर रेप का आरोप:एपस्टीन फाइल्स से खुलासा; इसमें 100 से ज्यादा बार ट्रम्प का भी नाम
अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ से 30 जनवरी को जारी एपस्टीन फाइल्स में पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश पर एक पुरुष के साथ रेप का आरोप लगा है। जॉर्ज बुश का नाम एपस्टीन की निजी डायरी या रिकॉर्ड में नहीं है। बल्कि उनका जिक्र न्यूयॉर्क पुलिस की चाइल्ड एक्सप्लॉइटेशन यूनिट को दी गई एक शिकायत में है। यह शिकायत उस शख्स ने दी थी, जो खुद को एपस्टीन का पीड़ित बताता है। दस्तावेजों में शामिल एक ईमेल में पीड़ित के बयान का जिक्र है। इसमें लिखा है कि 'बुश-1 ने भी उसके साथ बलात्कार किया।' ये कहीं नहीं बताया गया है कि 'जॉर्ज बुश 1' कौन हैं। अमेरिका में जॉर्ज बुश नाम के 2 राष्ट्रपति रह चुके हैं। 1998 में जॉर्ज बुश सीनियर राष्ट्रपति बने थे, वहीं उनके बेटे जॉर्ज डब्ल्यू बुश 2000 में राष्ट्रपति बने। वहीं, नई रिलीज फाइल्स में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का 100 से ज्यादा बार जिक्र है। हालांकि ट्रम्प का ज्यादातर जिक्र FBI की लिस्ट में है। FBI ने इसे पिछले साल तैयार किया था। इसमें वे बातें दर्ज हैं, जो कुछ लोगों ने FBI को फोन करके ट्रम्प के खिलाफ कही थीं। ये आरोप ज्यादातर बिना किसी ठोस सबूत के हैं और सिर्फ फोन पर मिली जानकारियों पर आधारित हैं, जिनकी पुष्टि नहीं हो पाई है। एपस्टीन और बिल क्लिंटन के खिलाफ भी आरोपों का जिक्र 27 अगस्त 2019 को FBI और न्यूयॉर्क पुलिस ने न्यूयॉर्क में एक शख्स का इंटरव्यू लिया। उसने आरोप लगाया कि वह पहली बार एपस्टीन से बचपन में मिला और साल 2000 में एक यॉट पर उसके साथ बलात्कार हुआ। उसने यह भी दावा किया कि उसी यॉट पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन मौजूद थे और उन्होंने भी उसका यौन शोषण किया। इसके अलावा उसने कहा कि वहां मौजूदा राष्ट्रपति ट्रम्प और उनकी पत्नी मेलानिया भी थीं, हालांकि उस समय दोनों की शादी नहीं हुई थी। कथित पीड़ित ने आगे बेहद गंभीर और असामान्य आरोप लगाए, जिनमें हिंसक और अनुष्ठानिक घटनाओं के दावे शामिल थे। उसने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश-1 ने भी उसके साथ बलात्कार किया। FBI अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में दर्ज किया कि कथित पीड़ित अपने किसी भी आरोप के समर्थन में न तो कोई सबूत दे सका और न ही ऐसा कोई गवाह बताया, जिससे संपर्क किया जा सके। अधिकारी के अनुसार वह व्यक्ति भावनात्मक रूप से अस्थिर दिखाई दिया। दस्तावेज में बताया गया है कि पीड़ित को माइकल मूर नाम का एक इंसान FBI की इमारत तक ले गया था। माइकल मूर को ‘ट्रू पंडित’ नाम की एक वेबसाइट से जुड़ा हुआ बताया गया है। इस वेबसाइट को फेक न्यूज फैलाने वाला माना जाता है। कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। एपस्टीन केस की पूरी कहानी क्या है एपस्टीन केस की शुरुआत 2005 में तब हुई जब फ्लोरिडा में एक 14 साल की लड़की की मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसमें कहा गया कि एपस्टीन के आलीशान घर में उसकी बेटी को ‘मसाज’ के बहाने बुलाया गया था, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उस पर सेक्स का दबाव डाला गया। जब उसने घर लौटकर यह बात अपने माता-पिता को बताई, तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत की। तब पहली बार जेफ्री एपस्टीन के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज हुई। पुलिस जांच के दौरान यह सामने आया कि यह अकेला मामला नहीं है। धीरे-धीरे करीब 50 नाबालिग लड़कियों की पहचान हुई, जिन्होंने एपस्टीन पर ऐसे ही आरोप लगाए। पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट ने इस मामले को गंभीरता से लिया और कई महीनों तक छानबीन की। इसके बाद एपस्टीन के खिलाफ क्रिमिनल जांच शुरू हुई। मामले की जांच से पता चला कि एपस्टीन के पास मैनहट्टन और पाम बीच में शानदार विला है। एपस्टीन यहां हाई-प्रोफाइल पार्टियां करता था, जिसमें कई बड़ी हस्तियां शामिल होती थीं। एपस्टीन अपने निजी जेट ‘लोलिता एक्सप्रेस’ से पार्टियों में कम उम्र की लड़कियां लेकर आता था। वह लड़कियों को पैसों-गहनों का लालच और धमकी देकर मजबूर करता था। इसमें एपस्टीन की गर्लफ्रेंड और पार्टनर गिस्लीन मैक्सवेल उसका साथ देती थी। हालांकि शुरुआती जांच के बाद भी एपस्टीन को लंबे समय तक जेल नहीं हुई। उसका रसूख इतना था कि 2008 में उसे सिर्फ 13 महीने की सजा सुनाई गई, जिसमें वह जेल से बाहर जाकर काम भी कर सकता था। मी टू मूवमेंट की लहर में डूबा एपस्टीन साल 2009 में जेल से आने के बाद एपस्टीन लो प्रोफाइल रहने लगा। ठीक 8 साल बाद अमेरिका में मी टू मूवमेंट शुरू हुआ। साल 2017 में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने हॉलीवुड प्रोड्यूसर हार्वे वाइंस्टीन के खिलाफ कई रिपोर्ट्स छापीं। इसमें बताया गया कि वाइंस्टीन ने दशकों तक अभिनेत्रियों, मॉडल्स और कर्मचारियों का यौन शोषण किया। इस घटना ने पूरी दुनिया में सनसनी पैदा कर दी। 80 से ज्यादा महिलाओं ने वाइंस्टीन के खिलाफ सोशल मीडिया पर मी टू (मेरे साथ भी शोषण हुआ) के आरोप लगाए। इसमें एंजेलीना जोली, सलमा हायेक, उमा थरमन और एश्ले जुड जैसे बड़े नाम थे। इसके बाद लाखों महिलाओं ने सोशल मीडिया पर '#MeToo' लिखकर अपने शोषण की कहानियां शेयर कीं। इसमें वर्जीनिया ग्रिफे नाम की युवती भी थी। उसने एप्सटीन के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए। उसने दावा किया कि उसके साथ 3 साल तक यौन शोषण हुआ था। इसके बाद करीब 80 महिलाओं ने उसके खिलाफ शिकायत की। एपस्टीन की गिरफ्तारी, जेल में ही मौत एपस्टीन के खिलाफ दबाव बढ़ रहा था। ऐसे में 6 जुलाई 2019 को न्यूयॉर्क में एपस्टीन को फिर से सेक्स ट्रैफिकिंग के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया गया। 23 जुलाई को उसे सेल में बेहोश पाया गया। उसके गले पर निशान थे। माना गया कि किसी ने उसकी जान लेने की कोशिश की थी। इसके बाद उसकी सुरक्षा बढ़ा दी गई, लेकिन जल्द ही हटा दी गई। 10 अगस्त 2019 को उसी हाई-सिक्योरिटी जेल में एपस्टीन मरा हुआ मिला। आधिकारिक रिपोर्ट में कहा गया कि उसने फांसी लगाकर आत्महत्या की, लेकिन कई मेडिकल और कानूनी एक्सपर्ट्स ने इस पर सवाल उठाए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहा गया कि एपस्टीन की गर्दन की कुछ हड्डियां टूटी हुई थीं। ये चोटें आमतौर पर गला घोंटने से जुड़ी होती हैं, आत्महत्या से नहीं। जिस दिन एपस्टीन की मौत हुई, उस दिन उसकी सेल के बाहर लगे सुरक्षा कैमरे काम नहीं कर रहे थे और फुटेज गायब हो गए थे। चूंकि एपस्टीन की क्लाइंट लिस्ट में बड़े-बड़े नाम शामिल थे। ऐसे में माना गया कि राज खुलने के डर से उसकी हत्या कराई गई है। एपस्टीन की मौत के बाद FBI और जस्टिस डिपार्टमेंट ने इसकी जांच शुरू की। -------------------- यह खबर भी पढ़ें… कांग्रेस बोली-ट्रम्प के फायदे के लिए मोदी इजराइल में नाचे:एपस्टीन फाइल्स शेयर करके पूछा- PM ने यौन अपराधी से क्या सलाह ली कांग्रेस ने शनिवार को दावा किया कि यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी नाम है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने X पोस्ट में लिखा- यह राष्ट्रीय शर्म का विषय है। पीएम मोदी हमारे 3 सवालों सामने आकर जवाब दें। पढ़ें पूरी खबर…
ईरान के कई शहरों में विस्फोट, 5 लोगों की मौत:14 घायल, इजराइल बोला- धमाके में हमारा कोई रोल नहीं
ईरान के कम से कम 7 शहरों में धमाकों की खबर है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजधानी तेहरान, परंद, तबरीज, कोम, अहवाज, नंताज और बंदर अब्बास में विस्फोट के दावे किए गए हैं। तुर्किये की न्यूज एजेंसी अनादोलु के मुताबिक कम से कम 5 लोगों की मौत हुई है और 14 घायल हैं। ईरान सरकार की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि इजराइल के दो अधिकारियों ने मीडिया से कहा है कि इन विस्फोटों में इजराइल शामिल नहीं है। वहीं, समाचार एजेंसी तसनीम ने सोशल मीडिया पर चल रही उन खबरों को गलत बताया है, जिनमें कहा जा रहा था कि रिवोल्यूशनरी गार्ड के नौसेना कमांडर को निशाना बनाया गया था। धमाके ईमारत का हिस्सा उड़ गया सरकारी अखबार तेहरान टाइम्स के मुताबिक, अहवाज में एक रिहायशी इमारत में गैस विस्फोट हुआ था, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। वहीं बंदर अब्बास में एक इमारत में विस्फोट हुआ, जिससे उसकी दो मंजिलें टूट गईं और कई दुकानें भी तबाह हो गईं। इस धमाके में कुल 14 लोग घायल हुए। सरकारी टीवी पर दिखाई गई तस्वीरों में देखा गया कि इमारत का सामने का हिस्सा पूरी तरह उड़ गया है, अंदर का हिस्सा साफ दिखाई दे रहा है और आसपास मलबा फैला हुआ है। बंदर अब्बास के रेस्क्यू डिपार्टमेंट के अधिकारी ने ईरानी समाचार एजेंसी IRNA को बताया कि इस घटना में घायल हुए लोगों को इमरजेंसी सर्विसेज की मदद से अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। ईरान में 35 दिन से सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी यह विस्फोट ऐसे समय में हुआ है जब ईरान में हालात तनावपूर्ण हैं। सरकार के 28 दिसंबर को देशव्यापी प्रदर्शन शुरू हुए थे, जो अब भी जारी हैं। एक ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि इन प्रदर्शनों में कम से कम 5,000 लोग मारे गए, जिनमें 500 सुरक्षाबल के सदस्य भी शामिल थे। दूसरी तरफ हाल ही में अमेरिका ने बढ़ते तनाव के बीच इस क्षेत्र में एक एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात किया है।
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