JEE Main 2026: जेईई मेन सेशन 1 की आंसर-की कब आएगी? जानें क्या है अपडेट
Union Budget 2026: क्या मिडिल फैमिली को मिलेगी टैक्स से आजादी और किसानों को पसीने का सही मोल?
एक तरफ 'विकसित भारत' का बड़ा लक्ष्य है और दूसरी तरफ आम आदमी की रोजमर्रा की जरूरतें. जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में अपना बजट भाषण शुरू करेंगी, तो देश के चार स्तंभों गरीब, युवा, महिला और किसान की निगाहें सिर्फ राहत की घोषणाओं पर टिकी होंगी. आयकर की नई व्यवस्था में सुधार से लेकर खेती को आधुनिक बनाने तक, यह बजट तय करेगा कि आने वाले साल में आपकी और देश की अर्थव्यवस्था की दिशा क्या होगी.
1 फरवरी यानी कल को संसद में पेश होने वाले बजट 2026 से मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा उम्मीदें हैं. बीते कुछ वर्षों से बढ़ती महंगाई, होम लोन और हेल्थ खर्चों ने सैलरी क्लास पर दबाव बढ़ाया है. ऐसे में इस बार चर्चा का केंद्र इनकम टैक्स सिस्टम में संभावित सुधार हैं. सरकार पहले ही संकेत दी है कि नया इनकम टैक्स ढांचा 1 अप्रैल 2026 से लागू हो सकता है.
हो सकते हैं टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव?
टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है, क्योंकि पिछले बजट में ₹12 लाख तक की आय को प्रभावी रूप से टैक्स फ्री बनाने का प्रयास किया गया था. हालांकि, स्टैंडर्ड डिडक्शन को लेकर उम्मीदें काफी मजबूत हैं. अभी यह ₹75,000 है और लंबे समय से इसे ₹1 लाख करने की मांग उठ रही है. अगर ऐसा होता है तो सैलरी पाने वाले लाखों करदाताओं को सीधी राहत मिलेगी.
इसके अलावा 30 प्रतिशत टैक्स स्लैब की सीमा बढ़ाने की मांग भी तेज है. वर्तमान में अपेक्षाकृत कम आय स्तर पर ही उच्च टैक्स दर लागू हो जाती है, जिससे मध्यम आय वर्ग प्रभावित होता है. यदि इस सीमा को ऊपर किया जाता है, तो टैक्स बोझ कुछ हद तक कम हो सकता है.
मिडिल फैमिली को क्या मिलेगी राहत?
मध्यम वर्ग के लिए सेक्शन 80C और 80D बेहद अहम हैं. 80C के तहत ₹1.5 लाख की निवेश छूट वर्षों से जस की तस है. महंगाई और सैलरी स्ट्रक्चर में बदलाव के बीच इसे बढ़ाने की मांग फिर से जोर पकड़ रही है. वहीं, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम के बढ़ते खर्च को देखते हुए 80D में खासकर वरिष्ठ नागरिकों के लिए ज्यादा छूट की उम्मीद की जा रही है.
कैपिटल गेन्स टैक्स को लेकर भी सरल नियमों की अपेक्षा है, ताकि शेयर बाजार और प्रॉपर्टी में निवेश करने वाले आम लोग आसानी से नियम समझ सकें और निवेश को प्रोत्साहन मिले. कुल मिलाकर मध्यम वर्ग के लिए यह बजट बड़े ऐलान से ज्यादा छोटे लेकिन असरदार सुधारों का हो सकता है.
किसानों का क्या होगा?
किसानों के लिए सरकार का रुख ‘अन्नदाता’ को विकास की धुरी मानने का है. कृषि बजट का आकार पिछले एक दशक में कई गुना बढ़ा है, लेकिन जमीनी चुनौतियां अब भी कायम हैं. इस बार बजट में न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP को लेकर दो अलग नजरिए सामने हैं.
कुछ किसान संगठनों की मांग है कि MSP को कानूनी गारंटी दी जाए, ताकि बाजार में कीमत गिरने पर भी किसान को लागत से नीचे न बेचना पड़े. वहीं, दूसरे समूहों का मानना है कि MSP के साथ-साथ किसानों को खुले बाजार तक सीधी और आसान पहुंच मिलनी चाहिए, जिससे वे बेहतर दाम हासिल कर सकें.
लागत घटाने और जोखिम कम करने की कोशिश
खाद सब्सिडी में कमी और खेती से जुड़े उपकरणों पर जीएसटी किसानों की बड़ी चिंता है. उम्मीद है कि बजट में इन मुद्दों की समीक्षा हो सकती है. इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावों के निपटारे को तेज और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया जा सकता है, ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई समय पर हो सके. छोटे और सीमांत किसानों के लिए खेती के अलावा आय के अन्य साधनों पर भी ध्यान दिया जा सकता है. मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन और पशुपालन जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष बजट प्रावधान किसानों की आय को स्थिर करने में मदद कर सकते हैं.
बजट 2026 का रोडमैप
बजट 2026 को आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है. सरकार दालों और तिलहनों के आयात पर निर्भरता घटाने, कृषि रिसर्च और शिक्षा में निवेश बढ़ाने और सिंचाई ढांचे को आधुनिक बनाने पर फोकस कर सकती है.
टैक्सपेयर्स के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी बड़ी राहत साबित हो सकती है, जबकि किसानों के लिए तकनीक, आसान क्रेडिट और जोखिम सुरक्षा प्राथमिकता में रह सकती है. वित्त मंत्री के सामने चुनौती यही होगी कि विकास की रफ्तार बनाए रखते हुए आम आदमी को महंगाई से राहत दी जाए.
ये भी पढ़ें- PM Kisan Yojana 22nd Installment: कब आएंगे पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त के पैसे? जानें वीडियो रिपोर्ट में
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 
News Nation



















