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आपदा प्रबंधन में यूपी बना मॉडल राज्य, 2025-26 में 710.12 करोड़ रुपए की राहत राशि जारी

लखनऊ, 31 जनवरी (आईएएनएस)। बाढ़, शीतलहर, अग्निकांड और अन्य आपदाओं से प्रभावित लोगों को त्वरित राहत और पुनर्वास उपलब्ध कराने के प्रति उत्तर प्रदेश सरकार अग्रसर है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान आपदा राहत मद के अंतर्गत 710.12 करोड़ रुपए की धनराशि जारी की गई है, जिससे प्राकृतिक और मानव जनित आपदाओं से प्रभावित लोगों को तत्काल सहायता प्रदान की गई।

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उत्तराखंड को केंद्र के बजट से राहत की उम्मीद:कुंभ के लिए मिल सकता है स्पेशल पैकेज; युवाओं को टैक्स में छूट की आस

रविवार यानी कल वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन दिल्ली में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी। इस बजट से उत्तराखंड को खास उम्मीदें इसलिए हैं, क्योंकि 2027 में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं और उससे पहले सरकार विकास की रफ्तार को और तेज करना चाहती है। राज्य में इस समय केंद्र सरकार के सहयोग से करीब 3.50 लाख करोड़ रुपए से अधिक की विकास परियोजनाएं चल रही हैं, जिनका सीधा असर सड़क, रेल और पेयजल जैसी सुविधाओं पर पड़ रहा है। राज्य सरकार को उम्मीद है कि चारधाम और सीमांत क्षेत्रों की कनेक्टिविटी मजबूत की जाएगी, बागेश्वर-कर्णप्रयाग और रामनगर-कर्णप्रयाग जैसी नई रेल लाइनों के सर्वे को आगे बढ़ाया जाएगा और चल रही बड़ी परियोजनाओं के लिए पर्याप्त केंद्रीय सहयोग मिलता रहेगा। इसके साथ ही कुंभ के लिए स्पेशल पैकेज की मांग भी की गई है, उम्मीद है इसपर भी कोई ऐलान होगा। इसी बीच आम लोगों की नजर भी बजट पर टिकी है। नौकरीपेशा टैक्स में राहत चाहते हैं, व्यापारी GST को और आसान बनाने की मांग कर रहे हैं और निवेशक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स को लेकर फैसले की उम्मीद लगाए बैठे हैं। बजट से आम उत्तराखंडी क्या चाहता है… बुनियादी सुविधाओं पर खर्च और टैक्स राहत की मांग बैंकर्स एम्पलाई यूनियन के महामंत्री जगमोहन मेंदिरत्ता ने कहा कि उत्तराखंड में बजट आने और सड़कों के बनने के बावजूद ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई जगहों पर आज भी पानी और सीवर की लाइनें दशकों पुरानी हैं और सीवर सड़कों पर बहता दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, पानी और सीवर जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए विशेष बजट प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सर्विस क्लास को दी जाने वाली टैक्स छूट महंगाई के हिसाब से बढ़नी चाहिए, क्योंकि महंगाई लगातार बढ़ रही है और राहत का असर टिकाऊ नहीं रह पाता। GST नियमों में राहत और व्यापारियों के लिए सहूलियत की मांग दून वैली व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष जसपाल छाबड़ा और दून उद्योग व्यापार मंडल के महासचिव सुनील मैसॉन ने व्यापारियों के लिए GST नियमों में राहत की मांग उठाई। उनका कहना है कि उत्तराखंड में कंपोजिशन स्कीम और GST रजिस्ट्रेशन की सीमा अन्य राज्यों से कम है, जिससे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। दोनों व्यापारिक प्रतिनिधियों ने मांग की कि कंपोजिशन स्कीम की सीमा अन्य राज्यों की तरह बढ़ाई जाए और GST रजिस्ट्रेशन की न्यूनतम सीमा भी बढ़ाई जाए ताकि छोटे व्यापारी अनावश्यक टैक्स और कागजी प्रक्रियाओं के बोझ से बच सकें। सुनील मैसॉन ने यह भी कहा कि GST में पंजीकृत व्यापारियों के लिए बीमा जैसी सुरक्षा व्यवस्था का भी बजट में प्रावधान होना चाहिए। LTCG टैक्स में बदलाव की दरकार हल्द्वानी के एडवोकेट हिमांशु कोठारी कहते हैं- शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोग लंबे समय से LTCG टैक्स में राहत की मांग कर रहे हैं। टैक्स स्ट्रक्चर में बदलाव से टैक्स के बाद मिलने वाला वास्तविक रिटर्न बेहतर होगा। कोठारी के मुताबिक अगर लंबी अवधि के निवेश को टैक्स के स्तर पर प्रोत्साहन मिलता है, तो इससे बाजार में स्थिरता आएगी और आम निवेशक भी लंबे समय के लिए निवेश करने को तैयार होंगे। मध्यम वर्ग को टैक्स में राहत की उम्मीद हल्द्वानी के पार्षद मनोज जोशी का कहना है कि उत्तराखंड का नौकरीपेशा और मध्यम वर्ग इस बजट से सबसे ज्यादा टैक्स राहत की उम्मीद कर रहा है। बढ़ती महंगाई के बीच सीमित आय पर दबाव बढ़ रहा है, इसलिए टैक्स-फ्री इनकम की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। निवेशकों व छोटे व्यापारियों को राहत की मांग हल्द्वानी के एडवोकेट हिमांशु कोठारी का कहना है कि शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोग लंबे समय से LTCG टैक्स में राहत की मांग कर रहे हैं। उनके मुताबिक अगर लंबी अवधि के निवेश को टैक्स में प्रोत्साहन मिलता है तो बाजार में स्थिरता आएगी और आम निवेशक भी लंबे समय के निवेश की ओर बढ़ेंगे। वहीं व्यापारी मोनू शर्मा का कहना है कि GST प्रक्रिया अभी भी जटिल है और इसे सरल बनाया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि छोटे कारोबारियों को GST के दायरे से बाहर रखा जाए ताकि स्थानीय व्यापार को मजबूती मिल सके। अब पढ़िए बजट से पहले नेताओं की बयानबाजी.. प्री-बजट में सरकार ने रखी क्या मांगें… पर्वतीय विकास, रिवर्स पलायन और क्लाइमेट रेजिलिएंस 10 जनवरी को दिल्ली में वित्त मंत्री की अध्यक्षता में हुई प्री-बजट परामर्श बैठक में उत्तराखंड सरकार ने साफ कहा था कि पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों के संतुलित विकास के बिना राज्य की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हो सकती। सरकार ने रिवर्स पलायन को बढ़ावा देने, आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने और राज्य को क्लाइमेट रेजिलिएंट बनाने के लिए विशेष केंद्रीय सहयोग की मांग रखी थी। इको-सिस्टम सेवाएं और आपदा से नुकसान की भरपाई उत्तराखंड को देश का “वॉटर टावर” बताते हुए सरकार ने कहा था कि राज्य देश को महत्वपूर्ण इको-सिस्टम सेवाएं प्रदान करता है। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के संरक्षण के लिए विशेष वित्तीय प्रोत्साहन जरूरी है। इसके साथ ही राज्य ने यह मांग भी रखी थी कि विशेष श्रेणी राज्य होने के कारण आपदा से हुई कुल क्षति के पुनर्निर्माण की पूरी राशि स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फंड (SDRF) से वहन की जाए। रेलवे नेटवर्क और कनेक्टिविटी का विस्तार राज्य सरकार ने प्री-बजट बैठक में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन की तार्किक पूर्णता पर जोर दिया था। इसके साथ ही बागेश्वर-कर्णप्रयाग और रामनगर-कर्णप्रयाग रेल लाइन के सर्वे की मांग रखी गई थी, ताकि टनकपुर-बागेश्वर-कर्णप्रयाग-रामनगर रेलवे सर्किट विकसित किया जा सके। सरकार का कहना था कि इससे बद्रीनाथ-केदारनाथ जैसे तीर्थ स्थलों तक पहुंच आसान होगी और सड़क मार्ग पर बढ़ते दबाव को भी कम किया जा सकेगा। सामाजिक, कृषि और जल परियोजनाओं से जुड़ी मांगें सरकार ने जंगली जानवरों से फसलों की सुरक्षा के लिए क्लस्टर आधारित तारबंदी, 60 से 79 वर्ष आयु वर्ग के बुजुर्गों की वृद्धावस्था पेंशन में केंद्रांश बढ़ाने, आंगनवाड़ी कर्मियों के मानदेय में वृद्धि और जल जीवन मिशन की अवधि बढ़ाने व अनुरक्षण के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग रखी थी। सामाजिक कल्याण और कुंभ आयोजन से जुड़ी मांगें उत्तराखंड सरकार ने प्री-बजट में सामाजिक सुरक्षा और बड़े धार्मिक आयोजन से जुड़ी कुछ मांगें रखीं। इसमें 60 से 79 वर्ष के बुजुर्गों की वृद्धावस्था पेंशन में केंद्र का हिस्सा मौजूदा ₹200 से बढ़ाकर ₹500 करने पर विचार करने का प्रस्ताव शामिल है। इसके साथ ही आंगनवाड़ी कर्मियों को मिलने वाले मासिक पैसे को बढ़ाने की मांग रखी गई। सरकार ने यह भी कहा कि आगामी कुंभ आयोजन के लिए सड़क, पानी, बिजली, शौचालय, सफाई और सुरक्षा जैसी जरूरी सुविधाओं को बनाने और उन्हें ठीक तरह से चलाए रखने के लिए केंद्र सरकार से अलग से बजट दिया जाए। अब पढ़िए उन 4 बड़े प्रोजेक्ट्स के बारे में जो केंद्र से चल रहे… -------------- ये खबर भी पढ़ें… केंद्रीय बजट 2026-27- उत्तराखंड की केंद्र से 13 मांगें:पहाड़ों में रेलवे नेटवर्क, वृद्धावस्था पेंशन में बढ़ोत्तरी; कुंभ के लिए स्पेशल ग्रांट केंद्रीय बजट 2026–27 के निर्माण से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ प्री-बजट परामर्श बैठक हुई। इसमें उत्तराखंड ने अपनी विषम भौगोलिक परिस्थितियों, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और राष्ट्रीय स्तर पर दी जा रही इको-सिस्टम सेवाओं को आधार बनाते हुए केंद्र सरकार के सामने विस्तृत मांगपत्र रखा। (पढ़ें पूरी खबर)

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