Patna NEET Student Death Case: नीट छात्रा केस में CBI की एंट्री, जानें अब तक क्या-क्या हुआ?
Patna NEET Student Death Case: पटना के एक हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब और गंभीर हो गया है. बढ़ते जनदबाव और परिवार की नाराजगी के बीच बिहार सरकार ने इस केस की सीबीआई जांच कराने की सिफारिश की है. डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहते हैं कि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, ताकि सच्चाई सामने आए और दोषियों को सजा मिल सके. चलिए यहां जानते हैं इस केस में अब तक क्या-क्या हुआ है.
परिवार के आरोप, पुलिस जांच पर सवाल
बता दें कि छात्रा जहानाबाद की रहने वाली थी और पटना के चित्रगुप्त नगर स्थित एक हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी. जनवरी की शुरुआत में वह अपने कमरे में बेहोश मिली थी. उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां कई दिनों तक कोमा में रहने के बाद 11 जनवरी को उसकी मौत हो गई. छात्रा के परिवार ने शुरू से ही यौन उत्पीड़न और सच्चाई दबाने का आरोप लगाया. उनका कहना है कि पुलिस मामले को आत्महत्या बताने की दिशा में बढ़ रही थी. परिजनों ने डीजीपी से मुलाकात के बाद भी असंतोष जताया और कहा कि उन्हें न्याय की जगह समझौते की सलाह दी गई.
बिहार के माननीय मुख्यमंत्री श्री @NitishKumar जी ने भारत सरकार से पटना में हुए NEET छात्रा की हत्या के मामले (कांड संख्या- 14/26) को CBI से जांच का आग्रह किया है। घटना का पारदर्शी और न्यायपूर्ण तरीके से उद्भेदन निश्चित किया जाए।
— Samrat Choudhary (@samrat4bjp) January 31, 2026
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. विपक्षी दलों ने सरकार और पुलिस की जांच पर सवाल उठाए. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी. 2 फरवरी से शुरू हो रहे विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को उठाने की तैयारी थी.
जांच में हुए कई खुलासे
जांच के दौरान कई गंभीर बातें सामने आई हैं. बताया जा रहा है कि हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज का एक हिस्सा उपलब्ध नहीं है, जिससे संदेह और बढ़ गया है. पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक रिपोर्ट में ऐसे संकेत मिले हैं, जिनसे यौन हमले की आशंका जताई जा रही है. कमरे से दवाइयों की खाली स्ट्रिप भी मिली है, जिससे यह शक पैदा हुआ कि छात्रा को कोई दवा दी गई हो सकती है.
अब तक कई लोगों के डीएनए सैंपल लिए जा चुके हैं और कॉल डिटेल्स खंगाली जा रही हैं. एसआईटी, सीआईडी और फॉरेंसिक टीम जांच में लगी थीं, लेकिन जांच की रफ्तार और दिशा को लेकर सवाल उठते रहे. ऐसे में सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर बड़ा कदम उठाया है. अब सबकी नजर केंद्र सरकार पर है. अगर सीबीआई जांच शुरू होती है, तो उम्मीद की जा रही है कि इस संवेदनशील मामले की सच्चाई सामने आएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सकेगा.
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बजट 2026 से पहले डिफेंस पीएसयू स्टॉक्स पर नजर, बजट आवंटन में 8-10 प्रतिशत बढ़ोतरी की उम्मीद
मुंबई, 31 जनवरी (आईएएनएस)। 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़े सरकारी कंपनियों (डिफेंस पीएसयू) के शेयर निवेशकों के फोकस में रहने की उम्मीद है। बाजार से जुड़े लोगों को रक्षा बजट में 8 से 10 प्रतिशत तक की सामान्य बढ़ोतरी और कामकाज की रफ्तार तेज होने की उम्मीद है।
विश्लेषकों का कहना है कि निवेशक रक्षा बजट में बहुत बड़ी बढ़ोतरी से ज्यादा, ऑर्डर जल्दी फाइनल होने और रक्षा खरीद की समय-सीमा साफ होने के संकेत चाहते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यही बातें निवेशकों के लिए ज्यादा मायने रखती हैं।
बाजार को उम्मीद है कि सरकार पूंजीगत खर्च (कैपेक्स) और स्वदेशीकरण पर ध्यान देगी। निवेशक यह भी चाहते हैं कि रक्षा कंपनियों को मिलने वाले कॉन्ट्रैक्ट्स तेजी से दिए जाएं और कंपनियों को समय पर भुगतान हो।
सरकारी रक्षा कंपनियों में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को विमान और इंजन निर्माण से जुड़े प्रोजेक्ट्स का फायदा मिल सकता है। वहीं भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) को रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार और संचार से जुड़ी घोषणाओं से लाभ मिलने की उम्मीद है।
भारत डायनामिक्स लिमिटेड मिसाइल कार्यक्रमों के कारण चर्चा में बनी हुई है। इसके अलावा मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स जैसी कंपनियों को नौसेना के आधुनिकीकरण से जुड़े प्रोजेक्ट्स से फायदा मिल सकता है।
विश्लेषकों का कहना है कि शेयरों का प्रदर्शन कंपनी विशेष पर निर्भर करेगा। इसमें काम को समय पर पूरा करना, मजबूत नकदी प्रवाह और भविष्य की कमाई की स्पष्ट तस्वीर अहम भूमिका निभाएगी।
हालांकि कुछ बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि डिफेंस सेक्टर को लेकर काफी सकारात्मक उम्मीदें पहले ही बाजार में शामिल हो चुकी हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, बजट 2026 में वित्तीय अनुशासन बनाए रखा जाएगा और रणनीतिक व ज्यादा पूंजी खर्च वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में रक्षा क्षेत्र को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।
एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 40 प्रतिशत निवेश प्रबंधकों ने रक्षा क्षेत्र को बजट का सबसे बड़ा लाभ पाने वाला क्षेत्र माना है। इसकी वजह स्वदेशीकरण, आधुनिकीकरण, निर्यात की संभावना और सरकार का लगातार खर्च करना है।
लगभग 29 प्रतिशत निवेशकों ने इंफ्रास्ट्रक्चर को दूसरा सबसे बड़ा लाभार्थी बताया है। इससे सार्वजनिक पूंजीगत खर्च और लॉन्ग टर्म की आर्थिक वृद्धि पर भरोसा झलकता है।
इक्विटी फंड मैनेजरों ने भारत के मध्यम अवधि के शेयर बाजार को लेकर भरोसा जताया है। हालांकि, उन्होंने शॉर्ट टर्म में बाजार में उतार-चढ़ाव की संभावना भी जताई है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को करीब 18 प्रतिशत समर्थन मिला है, जिसे पीएलआई योजना से जुड़े सरकारी समर्थन की उम्मीद है। वहीं उपभोग और कृषि क्षेत्रों का जिक्र करीब 7 प्रतिशत निवेशकों ने किया है।
कुल मिलाकर, बजट 2026 से रक्षा क्षेत्र में निवेश और गतिविधियां बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
--आईएएनएस
डीबीपी/
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