ईरान ने अमेरिकियों से कहा- ट्रम्प भरोसे के लायक नहीं:मिडटर्म चुनाव से पहले सही फैसला लेने को कहा; परमाणु हथियार बनाने के दावे से भी इंकार
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अमेरिकी वोटरों के नाम 25 पेज की खुली चिट्ठी जारी की है। इसमें राष्ट्रपति ट्रम्प को भरोसे के लायक नहीं बताया गया है और अमेरिकी लोगों से सोच-समझकर फैसला लेने की अपील की गई है। IRGC की यह चिट्ठी अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव से करीब 5 हफ्ते पहले आई है। मिडटर्म चुनाव में अमेरिकी संसद के दोनों सदनों के लिए वोटिंग होती है। मिडटर्म चुनाव में हार से संसद में ट्रम्प की ताकत कम हो सकती है। उन्हें अपने फैसले पास कराने के लिए विपक्षी पार्टी का समर्थन लेना पड़ सकता है। IRGC की चिट्ठी में 3 बड़ी बातें अमेरिका युद्ध में अपना मकसद हासिल नहीं कर पाया IRGC का दावा है कि इस युद्ध में अमेरिका-इजराइल के सत्ता परिवर्तन, परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने जैसे लक्ष्य पूरे नहीं हुए। 'डेथ टू अमेरिका' अमेरिकी जनता के खिलाफ नहीं पत्र में कहा गया कि डेथ टू अमेरिका का नारा अमेरिकी शासक वर्ग और व्हाइट हाउस के खिलाफ है, आम अमेरिकियों के खिलाफ नहीं है। अमेरिका से सैन्य दखल कम करने की मांग IRGC ने अमेरिकी जनता से इजराइल को समर्थन और क्षेत्र में सैन्य हस्तक्षेप का विरोध करने की अपील की है। ट्रम्प ने UN में ईरान को खत्म करने की धमकी दी थी अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। होर्मुज को लेकर भी अमेरिका पर निशाना साधा IRGC ने होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिकी दावों पर भी सवाल उठाए। मोहेब्बी ने कहा कि अमेरिकी सेना ने कुछ तेल टैंकरों को ही इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है। उनके मुताबिक, इससे यह साबित नहीं होता कि होर्मुज पूरी तरह खुल गया है। बीते दिनों ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को ट्रम्प स्ट्रेट बताया था। उन्होंने इससे जड़ा एक मैप ट्रुथ सोशल पर शेयर किया था। संसद में ट्रम्प के लिए बहुमत बचाना जरूरी है अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। ये चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के बीच में होते हैं। इनमें अमेरिकी लोग संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों - हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट के लिए प्रतिनिधि चुनते हैं। इन चुनावों से यह तय होता है कि अगले दो साल में अमेरिकी संसद में किस पार्टी की ताकत कितनी रहेगी। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं। इस बार 35 सीटों पर चुनाव होने हैं। वहीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में 435 सीटों पर चुनाव होने हैं। अभी रिपब्लिकन पार्टी के पास सीनेट में 53 सीटें हैं। जबकि हाउस में 218 सीटें हैं। अगर ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी ये चुनाव हार जाती है तो संसद में ट्रम्प के लिए बिल पास कराना बहुत मुश्किल हो जाएगा। वह अपनी मर्जी से किसी बिल को सीधे कानून नहीं बना पाएंगे। यही वजह है कि ट्रम्प मिडटर्म चुनाव के नतीजे का इंतजार कर रहे हैं, ताकि कांग्रेस में उनकी पार्टी के बहुमत पर असर न पड़े। हैनोई हन्ना की तरह अमेरिकी जनता तक पहुंचने की कोशिश ईरान का अमेरिकी लोगों तक सीधे पहुंचने का तरीका नया नहीं है। वियतनाम युद्ध के दौरान त्रिन्ह थी न्गो नाम की वियतनामी रेडियो प्रसारक अंग्रेजी में अमेरिकी सैनिकों के लिए कार्यक्रम करती थीं। उन्हें हैनोई हन्ना कहा जाता था। वह अपने कार्यक्रमों में युद्ध में मारे गए अमेरिकी सैनिकों और अमेरिका में हो रहे युद्ध-विरोधी प्रदर्शनों का जिक्र करती थीं। अब ईरान भी कुछ इसी तरह सीधे अमेरिकी जनता तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची अमेरिका से जारी युद्ध के बीच ईरान की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल से ज्यादा हो गई। यानी एक तरफ ईरान अमेरिकी लोगों से ट्रम्प सरकार की युद्ध नीति का विरोध करने की अपील कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ युद्ध का असर उसकी अपनी अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- ईरान के खिलाफ जल्द जंग जीतेंगे: युद्ध खत्म होते ही तेल की कीमतें गिरेंगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। पूरी खबर यहां पढ़ें…
अमेरिका में 2 भारतीयों पर नकली दवा बेचने का आरोप:चीन से मंगाते थे वजन घटाने की दवा, 71 साल की सजा हो सकती है
अमेरिका में वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली दवा ओजेम्पिक की नकली दवा बेचने के आरोप में दो भारतीय नागरिकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक दोनों चीन से कम कीमत पर नकली ओजेम्पिक मंगाते थे और फिर इसे अमेरिका में डिस्ट्रीब्यूटर्स को बेचते थे। दोष साबित होने पर दोनों को अलग-अलग आरोपों में अधिकतम 71 साल तक की जेल की सजा हो सकती है। अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने ओजेम्पिक को 2017 में टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए मंजूरी दी थी। नकली दवा की पैकिंग बिल्कुल असली जैसी थी जांच में सामने आया कि नकली दवा की पैकिंग को इस तरह तैयार किया गया था कि वह बिल्कुल असली ओजेम्पिक जैसी दिखाई दे। इसके बॉक्स, दवा की जानकारी वाली पर्ची, इंजेक्शन पेन का लेबल और यहां तक कि सुई भी असली दवा जैसी थी। इसका मकसद यह था कि खरीदारों को दवा नकली होने का पता न चले और उन्हें लगे कि वे कंपनी की असली दवा खरीद रहे हैं। दोनों आरोपियों की पहचान स्वप्नदीप रॉय और विक्की रमनचा के रूप में हुई है। FDA ने 2023 में नकली ओजेम्पिक को लेकर चेतावनी दी थी अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने दिसंबर 2023 में नकली ओजेम्पिक की कुछ खेप पकड़ी थी। इसके बाद लोगों को नकली दवा से सावधान रहने की चेतावनी भी दी गई थी। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इसके बावजूद दोनों आरोपी नकली दवा की बिक्री में शामिल रहे। एक आरोपी के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस जारी हुआ था अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, स्वप्नदीप रॉय को इटली में गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस भी जारी हुआ था। रेड नोटिस का मतलब है कि इंटरपोल से जुड़े देशों को किसी व्यक्ति की तलाश और संभावित गिरफ्तारी के लिए सूचना दी जाती है। हालांकि, यह अपने आप में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का अंतरराष्ट्रीय वारंट नहीं होता। बाद में अमेरिका ने इटली से रॉय के प्रत्यर्पण की मांग की। मंगलवार को उसे फ्लोरिडा के टैम्पा शहर की अदालत में पेश किया गया। रॉय और रमनचा पर कुल 6 आरोप लगाए गए हैं। इनमें तस्करी की साजिश, तस्करी और नकली दवा बेचने से जुड़े आरोप शामिल हैं। अमेरिका नकली दवाओं पर कैसे नजर रखता है? अमेरिका में नकली दवाओं को रोकने के लिए दवा की पूरी सप्लाई चेन पर नजर रखी जाती है। दवा बनाने वाली कंपनी से लेकर थोक विक्रेता और मेडिकल स्टोर तक, अलग-अलग स्तर पर लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था होती है। कई दवाओं का रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भी रखा जाता है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि दवा कहां बनी, किसके पास गई और किसने उसे बेचा। मेडिकल स्टोर को भी दवा की खरीद और बिक्री का रिकॉर्ड रखना पड़ता है। अगर किसी दवा के नकली होने का शक होता है तो उसे अलग कर जांच की जाती है। नकली पाए जाने पर इसकी जानकारी एफडीए को दी जाती है और दवा को बाजार से हटाने की कार्रवाई की जाती है। इसके बावजूद नकली दवाएं कभी-कभी ऑनलाइन बिक्री, तस्करी या अवैध सप्लायरों के जरिए बाजार तक पहुंच जाती हैं। ऐसे मामलों में एफडीए और दूसरी अमेरिकी एजेंसियां जांच करती हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। इस मामले में भी अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि आरोपियों ने नकली ओजेम्पिक को असली दवा जैसा दिखाकर अमेरिकी बाजार में पहुंचाया। ----------------------------- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में गोल्डी बराड़ पर ₹10 करोड़ का इनाम: FBI की टॉप-10 मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने गैंगस्टर सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को टॉप 10 मोस्ट वॉन्टेड की सूची में शामिल किया है। पूरी खबर पढ़ें…
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others 








/newsnation/media/agency_attachments/logo-webp.webp)
