अमेरिकी न्याय विभाग ने एपस्टीन फाइल्स से जुड़े लाखों रिकॉर्ड्स जारी किए
वॉशिंगटन, 31 जनवरी (आईएएनएस)। अमेरिकी न्याय विभाग ने जेफरी एपस्टीन और घिसलेन मैक्सवेल की जांच और मुकदमों से जुड़े लाखों रिकॉर्ड जारी करना शुरू कर दिया है। विभाग का कहना है कि उसने एक नए पारदर्शिता कानून के तहत आदेशित ऐतिहासिक समीक्षा पूरी कर ली है, जिस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हस्ताक्षर किए थे।
डिप्टी अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने पत्रकारों को बताया कि विभाग ने तीन मिलियन से ज्यादा पन्नों की सामग्री जारी की है। इसमें 2,000 से अधिक वीडियो और करीब 1 लाख 80 हजार तस्वीरें शामिल हैं। यह सारी जानकारी 19 नवंबर 2025 को लागू हुए ‘एपस्टीन फाइल्स पारदर्शिता अधिनियम’ के तहत दी गई है।
ब्लैंच ने न्याय विभाग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, कुल मिलाकर, इसका मतलब है कि विभाग ने इस एक्ट के अनुपालन में लगभग 3.5 मिलियन पन्ने जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि इस पूरे काम में 500 से ज्यादा वकील और विशेषज्ञ लगे थे। इनमें एफबीआई और कई अमेरिकी अटॉर्नी के कार्यालय शामिल हैं। लगभग 75 दिनों तक दिन में दो बार, और कई बार उससे भी ज्यादा, बैठकें की गईं।
शुरुआत में 60 लाख से ज्यादा पन्नों को संभावित रूप से जारी किए जाने योग्य माना गया था, लेकिन कानूनी और गोपनीयता नियमों की जांच के बाद कम दस्तावेज सार्वजनिक किए गए। विभाग का कहना है कि पहले ज्यादा सामग्री इकट्ठा की गई, लेकिन बाद में जरूरी कटौतियां करनी पड़ीं।
ब्लैंच ने कहा कि जारी की गई सामग्री में एपस्टीन और मैक्सवेल की जांच के दौरान इकट्ठा किए गए दस्तावेज, ईमेल, इंटरव्यू के सारांश, तस्वीरें और वीडियो शामिल हैं। उन्होंने कहा कि कई वीडियो और तस्वीरों में कमर्शियल पोर्नोग्राफी या एपस्टीन के डिवाइस से जब्त की गई सामग्री शामिल है, जिसे उसने खुद नहीं बनाया था।
कानून के तहत कुछ तरह की जानकारी को रोका गया है। इसमें पीड़ितों की निजी या चिकित्सीय जानकारी, बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री, चल रही जांच को नुकसान पहुंचाने वाले दस्तावेज और अत्यधिक हिंसा या मौत से जुड़ी तस्वीरें शामिल हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेश नीति के नाम पर कोई दस्तावेज नहीं रोका गया।
पीड़ितों की पहचान बचाने के लिए सभी महिलाओं के चेहरे और पहचान छिपाई गई है, सिवाय घिस्लेन मैक्सवेल के। पुरुषों की पहचान तब तक नहीं छिपाई गई, जब तक महिलाओं की पहचान छुपाने के लिए ऐसा करना जरूरी न हो। सांसद चाहें तो बिना काट-छांट वाली फाइलें विभाग की अनुमति से देख सकते हैं।
सवालों का जवाब देते हुए, ब्लैंच ने कहा कि उन्हें मैक्सवेल द्वारा दावा किए गए किसी भी गुप्त गैर-मुकदमे के समझौते के बारे में पता नहीं था। उन्होंने कहा, अगर ऐसे कोई समझौते मौजूद हैं, तो मुझे उनके बारे में पता नहीं है।
उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया कि विभाग राष्ट्रपति ट्रंप या दूसरों को बचा रहा था। ब्लैंच ने कहा, हमने राष्ट्रपति को प्रोटेक्ट नहीं किया। हमने किसी को प्रोटेक्ट नहीं किया। विभाग ने कानून का पूरी तरह से पालन किया।
विभाग हाउस और सीनेट न्यायपालिका समितियों को एक जरूरी रिपोर्ट सबमिट करेगा जिसमें जारी किए गए और रोके गए रिकॉर्ड्स का ब्यौरा होगा। इसके बाद कानून के तहत विभाग की जिम्मेदारी पूरी मानी जाएगी।
गौरतलब है कि शक्तिशाली लोगों से जुड़े वित्त कारोबारी जेफरी एपस्टीन की 2019 में न्यूयॉर्क की जेल में मौत हो गई थी। वह संघीय सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों का सामना कर रहा था। उसकी सहयोगी घिस्लेन मैक्सवेल को बाद में दोषी ठहराया गया और वह इस समय लंबी जेल की सजा काट रही है।
--आईएएनएस
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क्या जल्दबाजी में लिया गया फैसला? सुनेत्रा पवार आज डिप्टी सीएम बनेंगी, लेकिन शरद पवार बोले- मुझे कोई जानकारी नहीं
Sunetra Pawar Oath Taking Ceremony: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद अब उनकी पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार इस पद को संभालने वाली हैं. वे आज शाम महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगी. इस बीच एनसीपी (एसपी) चीफ शरद पवार का भी बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि उनके डिप्टी सीएम बनने के बारे में मुझे जानकारी नहीं है. इसे लेकर उनकी पार्टी ने फैसला किया होगा. ऐसे में सवाल ये उठ रहे हैं कि क्या अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला जल्दबाजी में लिया गया है?
क्या जल्दबाजी में लिया गया सुनेत्रा को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला?
दरअसल, राष्ट्रीवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख और अजित पवार के चाचा शरद पवार ने सुनेत्रा पवार के शपथ लेने की जानकारी नहीं होने की बात कही. इसके साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि एनसीपी के दोनों गुटों के एक साथ आने की भी बात चल रही थी, और ये बातचीत सकारात्मक दौर में थी. हालांकि एनसीपी के दोनों गुटों के विलय से पहले अजित पवार का बारामती में हुए विमान क्रैश में निधन हो गया. शरद पवार ने ये भी कहा कि एनसीपी के विलय के बारे में मैं सीधे तौर पर शामिल नहीं था.
चार महीने से चल रही थी बातचीत- शरद पवार
उन्होंने कहा कि जयंत पाटिल और अजित पवार के बीच चार महीने से बातचीत हो रही थी. अजित पवार का मानना था कि विलय 12 फरवरी को होना चाहिए. उन्होंने कहा कि उनके भतीजे की विमान दुर्घटना में मृत्यु के बाद विलय की बातचीत फिलहाल रोक दी गई है. अब क्या होगा पता नहीं. ऐसे में माना जा रहा है कि एनसीपी के मर्जर की बात सामने आने की वजह से ही सुनेत्रा पवार को जल्द से जल्द डिप्टी सीएम बनाने का फैसला लिया गया है.
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अजित पवार के निधन के बाद थम गई विलय की चर्चा
क्योंकि अगर इसमें देरी होती तो एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की चर्चा आगे बढ़ सकती थी और जल्द इसका एलान भी हो सकता था. लेकिन फिलहाल सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनाए जाने के बाद मर्जर को लेकर चर्चाओं का दौर थम गया है. हालांकि शरद पवार ने कहा कि एनसीपी के दोनों गुटों के विलय को लेकर अंतिम निर्णय जयंत पाटिल ही करेंगे. यानी अगर मर्जर को लेकर दोबारा से बातचीत हुई तो शरद पवार की पार्टी की ओर से जयंत पाटिल फैसला लेंगे.
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