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US Government Shutdown | अमेरिकी सरकार में आंशिक कामकाज ठप! फंडिंग गतिरोध के बीच शटडाउन शुरू

संयुक्त राज्य अमेरिका की सरकार शनिवार सुबह से आंशिक शटडाउन (Partial Shutdown) की स्थिति में चली गई है। 30 जनवरी की आधी रात की समय सीमा तक कांग्रेस (अमेरिकी संसद) द्वारा 2026 के बजट को मंजूरी न मिल पाने के कारण यह वित्तीय संकट पैदा हुआ है। इस फंडिंग संकट की वजह से देशभर में कई गैर-जरूरी सरकारी सेवाएं और एजेंसियां ठप हो गई हैं।
 

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नेताओं ने संकेत दिया है कि यह रुकावट छोटी हो सकती है। उम्मीद है कि प्रतिनिधि सभा अगले हफ्ते की शुरुआत में सीनेट समर्थित फंडिंग डील को मंजूरी देने के लिए कार्रवाई करेगी, जो प्रमुख संघीय एजेंसियों के लिए खर्च को बढ़ाती है और इसमें डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) के लिए प्रावधान शामिल हैं।

विवाद के कारण बातचीत रुकी

फंडिंग में यह रुकावट मिनियापोलिस में संघीय इमिग्रेशन एजेंटों द्वारा दो प्रदर्शनकारियों की हत्या को लेकर डेमोक्रेट्स की चिंता के कारण बातचीत टूटने के बाद हुई। इस घटना के बाद DHS के कामकाज में बदलाव की मांग उठी, जिससे नए आवंटन पर बातचीत रुक गई।
 

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यह सिर्फ 11 हफ्तों में दूसरा सरकारी शटडाउन है। पिछला गतिरोध 43 दिनों तक चला था, जो अमेरिकी इतिहास में सबसे लंबा था। कांग्रेसी नेता प्रतिनिधि सभा के फिर से शुरू होने पर सीनेट समर्थित उपाय को पारित करने के लिए पर्याप्त समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

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Shehbaz Sharif बोले- विदेशी दौरों पर भीख माँगते हुए शर्म आती है, कटोरा हाथ में लेकर और नजरें दूसरों की जेब पर लगाकर कब तक घूमें?

बड़ी बड़ी डींगे हांकने वाले और खोखले भाषणों से मुल्क को बहलाने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आखिरकार वह सच कबूल कर लिया है जिसे दुनिया पहले से जानती थी। इस्लामाबाद में उद्योगपतियों के सामने शहबाज शरीफ ने स्वीकार किया कि वह विदेश दौरों पर जाकर पैसे की भीख मांगते हैं और इस दौरान उनका सिर शर्म से झुक जाता है। यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय आई है जब एक हालिया अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में यह दावा किया गया था कि दुनिया भर में सबसे अधिक भिखारी पाकिस्तानी मूल के पाए जाते हैं।

इस्लामाबाद में आयोजित उद्योगपतियों और निर्यातकों के सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने जो कहा, उसने पूरे देश की सच्चाई को नंगा करके रख दिया है। वर्षों से खोखले नारों में जी रहे पाकिस्तान ने खुले मंच से यह स्वीकार किया है कि उसकी सत्ता और अर्थव्यवस्था कर्ज की भीख पर टिकी है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्वीकार किया है कि विदेशी कर्ज मांगना न केवल मजबूरी है बल्कि राष्ट्रीय आत्मसम्मान को रौंदने वाला अपमान भी है।

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शहबाज शरीफ ने साफ शब्दों में कहा कि जब वह और सेना प्रमुख असीम मुनीर दुनिया भर में धन मांगने जाते हैं तो उनका सिर शर्म से झुक जाता है। शहबाज शरीफ का कथन इस बात का प्रमाण है कि पाकिस्तान दानदाताओं की शर्तों पर चलने वाला एक निरीह तंत्र बन चुका है। प्रधानमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि कर्ज के बदले उन मांगों को मानना पड़ता है जिनका कोई औचित्य नहीं होता। हम आपको बता दें कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था आज पूरी तरह बाहरी सहारे पर खड़ी है। चीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर से मिलने वाली आर्थिक बैसाखियों के बिना इस्लामाबाद की सत्ता एक दिन भी खड़ी नहीं रह सकती। चीन ने पाकिस्तान को अरबों की राशि दी है और चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के नाम पर भारी निवेश पहले ही पाकिस्तान को कर्ज के जाल में जकड़ चुका है। सऊदी अरब और अमीरात तेल भुगतान में राहत और जमा राशि के सहारे पाकिस्तान को सांस लेने का मौका दे रहे हैं, जबकि कतर ऊर्जा आपूर्ति के जरिए उसे डूबने से बचा रहा है।

इन तथ्यों के बीच सबसे भयावह सच यह है कि पाकिस्तान पर सार्वजनिक कर्ज अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच चुका है। कुछ ही वर्षों में यह राशि लगभग दोगुनी हो चुकी है। देश बार-बार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के दरवाजे पर कटोरा लेकर पहुंचता है और हर बार कठोर शर्तें स्वीकार करता है। सब्सिडी कटौती, कर वृद्धि और सामाजिक खर्च में कटौती का बोझ सीधे आम जनता पर डाला जाता है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गरीबी और बेरोजगारी पर चिंता जताई, लेकिन यह चिंता खोखली प्रतीत होती है। देश की लगभग आधी आबादी गरीबी रेखा के नीचे धकेली जा चुकी है। युवा बेरोजगार हैं, पढ़े लिखे लोग दर दर भटक रहे हैं और अनौपचारिक क्षेत्र में शोषण चरम पर है। निर्यात आज भी कपड़ा और कच्चे माल तक सीमित है, जबकि नवाचार और अनुसंधान के नाम पर पाकिस्तान का डब्बा गोल है।

इस पूरे परिदृश्य में सबसे खतरनाक संकेत यह है कि कर्ज वार्ताओं में सेना प्रमुख की सक्रिय भूमिका। यह संदेश साफ है कि पाकिस्तान में नागरिक शासन महज दिखावा है और वास्तविक सत्ता सैन्य नेतृत्व के हाथ में है। कर्जदाताओं को भरोसा दिलाया जाता है कि भुगतान की गारंटी बंदूक के दम पर दी जाएगी।

देखा जाये तो पाकिस्तान आज जिस स्थिति में है, वह किसी प्राकृतिक आपदा का परिणाम नहीं बल्कि वर्षों की गलत नीतियों, सैन्य वर्चस्व और सत्ता के लालच की देन है। शहबाज शरीफ की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति दरअसल एक फिसलती हुई व्यवस्था की चीख है। जब कोई प्रधानमंत्री यह कहे कि वह दुनिया में घूम घूम कर पैसा मांग रहा है, तो समझ लेना चाहिए कि राष्ट्र की रीढ़ टूट चुकी है। सामरिक दृष्टि से यह स्थिति अत्यंत गंभीर है। जो देश अपनी अर्थव्यवस्था नहीं संभाल सकता, वह अपनी सीमाएं, अपनी संप्रभुता और अपने फैसले भी सुरक्षित नहीं रख सकता। पाकिस्तान की विदेश नीति अब स्वतंत्र नहीं रही। चीन, खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की शर्तें ही उसका दिशा सूचक बन चुकी हैं। यह वही पाकिस्तान है जो कभी अपने भूगोल को किराये पर देकर धन कमाने का दावा करता था। आज वही भूगोल बोझ बन चुका है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जहां जनता महंगाई और ऊर्जा संकट से जूझ रही है, वहीं सत्ता प्रतिष्ठान वैश्विक मंचों पर छवि सुधार और प्रभाव बनाने में धन उड़ाता है। कथित शांति मंचों और विदेशी लॉबी पर खर्च किया गया पैसा इस बात का प्रमाण है कि प्राथमिकताएं पूरी तरह विकृत हैं। शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर इस पतन के दो चेहरे हैं। एक लोकतंत्र का मुखौटा, दूसरा सैन्य प्रभुत्व का प्रतीक। दोनों ने मिलकर पाकिस्तान को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है जहां आत्मनिर्भरता का सपना मजाक बन चुका है। जब तक सत्ता संरचना नहीं बदलेगी, कर सुधार नहीं होंगे और सैन्य हस्तक्षेप समाप्त नहीं होगा, तब तक हर नया कर्ज पिछले कर्ज की कब्र पर डाली गई एक और मिट्टी होगा।

बहरहाल, आज पाकिस्तान एक भिखारी राष्ट्र की तरह खड़ा है। कटोरा हाथ में है, नजरें दूसरों की जेब पर टिकी हैं और आत्मसम्मान इतिहास की किताबों में कैद हो चुका है। यह स्थिति केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामरिक और नैतिक दिवालियापन की घोषणा है।

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  Sports

'कोई पार्टनरशिप नहीं बनी', MI की हार पर बोलीं Harmanpreet, अब UP Warriorz के भरोसे टीम का भविष्य

गुजरात जायंट्स (जीजी) से अपनी टीम की हार के बाद, मुंबई इंडियंस (एमआई) की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा कि बल्लेबाजों के समर्थन की कमी और खराब फील्डिंग के कारण उनकी टीम एलिमिनेटर में सीधे स्थान पाने से चूक गई। एमआई के खिताब बचाने की उम्मीदें और भी कमज़ोर पड़ गईं जब गुजरात जायंट्स ने मुंबई इंडियंस के खिलाफ लगातार आठ मैचों की जीत का सिलसिला तोड़ते हुए एलिमिनेटर में जगह बना ली। अब दो बार की चैंपियन मुंबई इंडियंस को एलिमिनेटर में पहुंचने के लिए यूपी वॉरियर्स की जीत पर निर्भर रहना होगा। 168 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए, हरमनप्रीत ने 48 गेंदों में 82* रन बनाकर लगभग अकेले ही संघर्ष किया, लेकिन उन्हें बल्लेबाजों से बहुमूल्य समर्थन नहीं मिला।
 

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मैच के बाद प्रस्तुति देते हुए हरमनप्रीत ने अपनी टीम की बल्लेबाजी के बारे में कहा कि पहले छह ओवरों में हम अपनी बल्लेबाजी की योजना को ठीक से लागू नहीं कर पाए। दुर्भाग्य से, हमने जल्दी ही एक विकेट खो दिया और पर्याप्त रन नहीं बना सके। हम दो मजबूत साझेदारियां बनाने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अफसोस, आज कोई भी प्रभावशाली साझेदारी नहीं बन पाई। मैं खुद से कहती रही कि मुझे बल्लेबाजी जारी रखनी है। दूसरे छोर पर, मैं निश्चित रूप से सहयोग की तलाश में थी, लेकिन दुर्भाग्य से आज कोई भी वह सहयोग नहीं दे पाया। दबाव वाले मैचों में ऐसा होता रहता है। कभी-कभी टीम अपनी योजनाओं को ठीक से लागू नहीं कर पाती। कुल मिलाकर, यह एक अच्छा मैच था।

एमआई की कप्तान ने यह भी स्वीकार किया कि खराब फील्डिंग के कारण उनकी टीम ने कुछ मौके गंवा दिए, लेकिन उन्होंने अपनी बल्लेबाजी लाइनअप के बारे में आशावाद जताया, जो एक अच्छी साझेदारी से मैच का रुख बदल सकती थी। उन्होंने आगे कहा कि मुझे लगता है हमने करीब 16-17 अतिरिक्त रन लुटा दिए, और यही हमें भारी पड़ा। फिर भी, हमारी बल्लेबाजी बहुत अच्छी है। अगर मेरे साथ एक भी साझेदारी हो जाती, तो शायद नतीजा बदल जाता। हमने अपनी पूरी कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्य से हम मैच नहीं जीत सके।
 

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हरमनप्रीत ने कहा कि आखिरी दो ओवरों में, वह अपनी टीम को चाहिए छक्कों की संख्या का हिसाब लगा रही थीं और MI के पक्ष में मैच का रुख मोड़ने के लिए ज्यादा से ज्यादा गेंदों पर छक्के लगाना चाहती थीं। उन्होंने कहा कि लेकिन उन्होंने (GT) अपनी योजना को बहुत अच्छे से अंजाम दिया। हमें पता था कि वे क्या गेंदबाजी करने वाले हैं, और मैं उनकी रणनीति समझ गई थी, लेकिन उनकी गेंदबाजी को पूरा श्रेय जाता है - उन्होंने बहुत अच्छी गेंदबाजी की। हां, मैं उन चीजों पर ध्यान देना पसंद करती हूं जिन पर मेरा नियंत्रण है (DC बनाम UPW के मुकाबले पर, जिससे हमारा भविष्य तय होगा)। अगर चीजें हमारे पक्ष में जाती हैं, तो हम बहुत खुश होंगे। अच्छी बात यह है कि टूर्नामेंट अभी जारी है। देखते हैं कल क्या होता है। आज हम कुछ खास पर ध्यान देना चाहते थे, लेकिन दुर्भाग्य से हम अपनी योजना के अनुसार नहीं कर पाए। 
Sat, 31 Jan 2026 12:44:40 +0530

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