ISIS जैसे जिहादी समूहों में महिलाओं को मिली रणनीतिक और संगठनात्मक कमान, शोध में खुलासा
(सारा हरमूश, जॉर्ज वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी) वाशिंगटन, तीन अक्टूबर (द कन्वरसेशन) सीरिया में उम्म कका अल-सोमाली के नाम से सक्रिय सोमालिया में जन्मी डच नागरिक खदरा ईसा एक वांछित महिला है। अमेरिकी विदेश विभाग ने 14 सितंबर, 2026 को उसके ठिकाने की जानकारी देने वाले को 50 लाख अमेरिकी डॉलर तक का इनाम देने की घोषणा फिर से सार्वजनिक की। इससे पहले अप्रैल 2025 में भी उसके बारे में जानकारी देने के लिए इनाम की घोषणा की गई थी।
ईसा को खतीबा नुसायबा या आईएसआईएस-एनके की प्रमुख शरिया प्रशिक्षक बताया गया है। यह महिलाओं की एक लड़ाकू बटालियन है, जिसका गठन 2016 में सीरिया के रक्का में महिला लड़ाकों की भर्ती, संगठन और प्रशिक्षण के लिए किया गया था। अमेरिका का आरोप है कि उसने हथियारों, विस्फोटकों और आत्मघाती अभियानों का प्रशिक्षण लिया था।
विदेश विभाग के नोटिस में दावा किया गया है कि ईसा ने ‘‘आईएसआईएस की उस चरमपंथी विचारधारा की शिक्षा दी, जो आत्मघाती अभियानों और नागरिकों की हत्या को उचित ठहराती थी’’, सदस्यों की भर्ती की, ऐसे आदेश दिए जिनके परिणामस्वरूप हमले और हत्याएं हुईं तथा “एक ऐसे समूह का नेतृत्व किया, जिसने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के जरिए शरिया कानून लागू किया।’’ आतंकवाद के मुद्दे पर शोधकर्ता के तौर पर, यह अध्ययन किया कि आतंकवादी समूह किस तरह संगठित होते हैं और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालते हैं। मैंने अमेरिकी और यूरोपीय अदालतों के रिकॉर्ड, प्रतिबंधों और इनाम से संबंधित नोटिसों के साथ-साथ जिहादी समूहों के अरबी के प्रकाशनों का अध्ययन किया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि सशस्त्र आंदोलनों के भीतर महिलाओं की भूमिकाएं किस तरह बदलती रही हैं। मैंने एक नया बदलाव देखा है, जिसके तहत जिहादी समूहों में महिलाओं के संगठनात्मक अधिकारों को तेजी से औपचारिक रूप दिया गया है।
वास्तव में, महिलाएं अब ऐसी स्पष्ट रूप से निर्धारित भूमिकाएं निभा रही हैं, जिनमें वे अन्य सदस्यों को प्रशिक्षण देती हैं, उनकी भर्ती करती हैं, उनका नेतृत्व करती हैं या संगठन के लिए आवश्यक कार्यों का प्रबंधन करती हैं। जिहादी गतिविधियों में महिलाओं को शायद ही कभी अन्य सदस्यों या संगठन के कार्यों पर औपचारिक अधिकार रखने वाले लोगों के रूप में पेश किया जाता था। इसके बजाय, ऐसे समूह महिलाओं को सुरक्षा के लिए कम खतरा मानने की धारणा का फायदा उठाते हुए, आक्रामक अभियानों में उनकी सक्रिय भूमिका को मुख्य रूप से बम ले जाने वाले व्यक्ति के रूप में देखते थे।
‘सीरियन सोशल नेशनलिस्ट पार्टी’ ने 1985 में लेबनान में आत्मघाती हमले के लिए सना मेहैदली का इस्तेमाल किया था; 1991 में ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ की धनु नामक महिला सदस्य के आत्मघाती हमले में भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी मारे गये थे; और कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी ने 1990 के दशक में महिला आत्मघाती हमलावरों को तैनात करना शुरू किया था। फलस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास ने शुरू में महिलाओं को आत्मघाती हमलों में इस्तेमाल करने का विरोध किया था, लेकिन 2004 में उसने अपना रुख बदल दिया। इसके आध्यात्मिक नेता, अहमद यासीन ने इस बदलाव को सामरिक दृष्टि से समझाते हुए कहा: “हो सकता है कि कोई पुरुष लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम न हो, और इसी वजह से उन्हें एक महिला का इस्तेमाल करना पड़ा।’’ कुछ ही वर्षों के भीतर, इराक, जॉर्डन और पाकिस्तान में जिहादी समूह भी महिला आत्मघाती हमलावरों का इस्तेमाल करने लगे थे।
लेकिन नाइजीरिया के बोको हराम ने इस प्रथा को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ा दिया। ‘कॉम्बैटिंग टेररिज्म सेंटर’ के शोध में अप्रैल 2011 से जून 2017 के बीच 238 आत्मघाती हमलों में 434 हमलावरों की पहचान की गई—जिनमें कम से कम 56 प्रतिशत महिलाएं थीं। इन मामलों में महिलाओं की भूमिका मुख्यतः अभियान के क्रियान्वयन तक सीमित रही।
महिलाएं बम लेकर जाती थीं या लक्ष्य तक पहुंचती थीं, लेकिन उन पदों पर उनकी उपस्थिति बहुत कम दिखाई देती थी जहां लोगों का चयन किया जाता था, विचारधारा या रणनीति तैयार की जाती थी, कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाता था या संगठन का स्वयं प्रबंधन किया जाता था। इस बीच, इस्लामिक स्टेट समूह कुछ महिलाओं को अधिक ठोस और वास्तविक अधिकार देने की शुरुआत कर रहा था। फरवरी 2014 में, उसने सीरिया में ‘अल-खंसा ब्रिगेड’ के गठन की घोषणा की जिसमें सभी सदस्य महिलाएं थीं।
महिलाएं लंबे समय से हिंसा की घटनाओं को अंजाम देती रही हैं। लेकिन अब, उन महिलाओं की भूमिका भी तेजी से बढ़ रही है जो नए सदस्यों को प्रशिक्षण देती हैं, नियमों को लागू कराती हैं, वैचारिक दिशा प्रदान करती हैं और इस पूरी व्यवस्था को बनाए रखने वाले तंत्र को संचालित करती हैं।
Iran संकट: Gulf में ऊर्जा ठिकानों की रक्षा में जुटी US सेना, Patriot का स्टॉक 1000 से कम
अमेरिका और ईरान के बीच बड़े पैमाने पर सैन्य टकराव की आशंका को देखते हुए, अमेरिकी सेना ने सऊदी अरब और कतर में दो अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरी तैनात की हैं। इनका मकसद पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से जुड़े अहम ठिकानों की सुरक्षा को मजबूत करना है। 'एक्सियोस' (Axios) की एक रिपोर्ट के अनुसार - जिसमें दो अमेरिकी अधिकारियों और क्षेत्र की जानकारी रखने वाले एक व्यक्ति का हवाला दिया गया है - यह तैनाती सऊदी और कतरी अधिकारियों की चिंताओं के बाद की गई है। उन्हें डर है कि अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े हमले फिर से शुरू करता है, तो तेहरान उनके ऊर्जा ठिकानों को निशाना बना सकता है। 'एक्सियोस' ने बताया कि एक पैट्रियट यूनिट को सऊदी अरब में एक बड़े तेल ठिकाने की सुरक्षा के लिए भेजा गया, जबकि दूसरी यूनिट को कतर में गैस की एक मुख्य सुविधा की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया। यह कदम खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा नेटवर्क के सामने मौजूद खतरों को उजागर करता है, खासकर तब जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध फिर से तेज हो जाए।
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अगस्त में जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी ऊर्जा ठिकानों पर हमले की योजना बनाई थी, तब सऊदी अरब और कतर के प्रमुखों ने कथित तौर पर उनसे इस रणनीति के खिलाफ अपील की थी। उन्हें डर था कि ईरान जवाबी कार्रवाई में उनके पेट्रोलियम और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बना सकता है, जैसा कि 'एक्सियोस' ने बताया है। इस क्षेत्र में पेट्रोलियम या गैस साइटों पर किसी भी बड़े हमले से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के अस्थिर होने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दबाव बढ़ने का खतरा है, खासकर तब जब तनाव के कारण समुद्री रास्तों से होने वाले व्यापार में बाधा आए। पैट्रियट की अतिरिक्त तैनाती ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी एयर डिफेंस स्टॉकपाइल (हथियारों के भंडार) पर मांग बढ़ रही है। ईरान के साथ तनाव शुरू होने के बाद से ही पैट्रियट बैटरी, और खासकर उनकी इंटरसेप्टर मिसाइलों की मांग में भारी बढ़ोतरी हुई है।
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'सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़' के एक आकलन से पता चला है कि ईरान के साथ संघर्ष के दौरान भारी इस्तेमाल के कारण US के पैट्रियट इंटरसेप्टर का स्टॉक 1,000 यूनिट से भी कम हो गया है। इस बीच, पेंटागन मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है और उस इलाके में अतिरिक्त नौसैनिक जहाज, लड़ाकू जेट और सैनिक भेज रहा है। हजारों US मरीन को ले जा रहा 'मेकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडी ग्रुप' भी इसी तरह उस इलाके में पहुँच गया है, जिससे मध्य पूर्व में वाशिंगटन की बढ़ती सैन्य मौजूदगी और मजबूत हुई है। पैट्रियट एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम एक ज़मीन-आधारित सिस्टम है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी और सहयोगी सेनाएँ सैनिकों और ज़रूरी ठिकानों को हवा से होने वाले खतरों से बचाने के लिए करती हैं। US सेना का कहना है कि पैट्रियट विमानों, क्रूज़ मिसाइलों और टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइलों का मुकाबला कर सकता है; इसकी ऑपरेशनल बैटरी एक रडार नेटवर्क, एक एंगेजमेंट कंट्रोल स्टेशन और मिसाइल लॉन्चर पर आधारित होती है। एडवांस्ड PAC-3 मिसाइल सेगमेंट एन्हांसमेंट (MSE) इंटरसेप्टर 'हिट-टू-किल' तकनीक का इस्तेमाल करता है, जो सीधे टकराकर आने वाले टारगेट को नष्ट कर देता है। इसमें डुअल-पल्स सॉलिड प्रोपेलेंट रॉकेट मोटर का इस्तेमाल होता है, जो पिछले PAC-3 वर्शन की तुलना में ज़्यादा रेंज, ज़्यादा ऊँचाई तक पहुँचने की क्षमता और बेहतर फुर्ती देता है।
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