अमित शाह-सीएम मोहन यादव ने की ‘श्वेत क्रांति 2.0’ की शुरुआत, MP को डेयरी सेक्टर की बड़ी सौगातें, न्याय संहिता व नशामुक्ति पर जोर
देश के गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को राजधानी भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में मध्यप्रदेश के डेयरी सेक्टर को कई बड़ी सौगातें दीं। अमित शाह ने सम्मेलन के दौरान रिमोट का बटन दबाकर डिजिटल माध्यम से उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट का वर्चुअल शिलान्यास किया। इसके साथ ही भोपाल ही 12.42 करोड़ की लागत से बने अत्याधुनिक डेयरी प्रोडक्ट प्लांट और अत्याधुनिक लैब का उद्घाटन किया। उन्होंने शिवपुरी में 6.5 करोड़ की लागत के मिनी डेयरी प्लांट के सुदृढ़ीकरण कार्य का भी शुभारंभ किया।
इस अवसर पर अमित शाह ने भोपाल और इंदौर मिल्क यूनियन के सदस्यों को बोनस वितरित किया। साथ ही गौशालाओं के लिए सहायता के रूप में 101 करोड़ रुपये और मिल्क कोऑपरेटिव सोसाइटियों के सदस्यों को लाभांश के रूप में 15.10 करोड़ रुपये की राशि भी सिंगल क्लिक करके वितरित की।
बता दें कि इससे पहले सीएम मोहन यादव ने अमित शाह का कार्यक्रम स्थल पर स्वागत किया। वहीं, शाह ने राज्य स्तरीय नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री गोपालक सम्मेलन में शामिल हुये एवं कार्यक्रम को संबोधित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अमित शाह ने राज्य के भविष्य को लेकर बड़ा संदेश दिया। गृह मंत्री ने ऐलान किया है कि सरकार ने वर्ष 2029-30 तक मध्यप्रदेश को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। इस दिशा में प्रशासन और सरकार गंभीर योजना के साथ काम कर रही है।
31 दिसंबर 2029 से पहले नशामुक्त होगा मध्यप्रदेश: अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि सरकार युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हमारी सरकार राज्य को नशा मुक्त बनाना चाहती है। इसके लिये मुख्यमंत्री एवं गृह विभाग के साथ एक बैठक भी आयोजित की गई है। जिसमें विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया जायेगा एवं रणनीति तैयार की जायेगी। उन्होंने कहा कि बैठक में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि 31 दिसंबर 2029 से पहले मध्यप्रदेश को नारकोटिक्स और नशे की समस्या से पूरी तरह आजाद कर दिया जाए।
उज्जैन में 255 करोड़ से बनेगा मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट
अमित शाह ने कहा कि राज्य में दूध के प्रसंस्करण के लिए आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा ह। इसी क्रम में उज्जैन में 255 करोड़ रुपये की लागत से प्रतिदिन 3 लाख लीटर दूध की क्षमता वाला प्लांट तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्लांट से प्रदेश में दूध के प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा। शाह ने कहा कि खुले बाजार में दूध बेचने पर कई बार बिचौलियों के कारण गोपालकों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। सहकारी व्यवस्था से जुड़ने पर गोपालकों को दूध का बेहतर दाम मिल सकता है। उन्होंने कहा कि इसके लिए दूध के संग्रहण के साथ-साथ उसके प्रसंस्करण की व्यवस्था भी जरूरी है। दूध से आइसक्रीम, मक्खन, घी, चीज और मावा जैसे विभिन्न उत्पाद तैयार कर वैल्यू एडिशन किया जा सकता है।
नई न्याय संहिता से हर भारतीय के सम्मान की रक्षा होगी, बोले अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार ने अंग्रेजी दौर के कई कानूनों को समाप्त कर अपनी न्याय संहिता लागू की है। हमारी न्याय व्यवस्था की पहचान कभी तारीख-पे-तारीख से होती थी। लेकिन, अब भारतीय न्याय संहिता में एफआईआर के बाद तीन वर्ष में दोषी को सजा दिलवाने का प्रावधान है। अंग्रेजों ने अपनी सरकार को बचाने के लिए कानून बनाए थे। नई न्याय संहिता का मूलमंत्र न्याय है, दंड सिर्फ अपराध रोकने के लिए है। इससे हर भारतीय के सम्मान की रक्षा होगी।
केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे कहा कि शीघ्र ही भारतीय न्याय संहिता दुनिया में सबसे आधुनिक न्याय तंत्र बन जाएगी। इसमें ऑनलाइन एफआईआर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, एफएसएल के प्रावधान और कई आधुनिक वैज्ञानिक प्रावधान इसमें जोड़े गए हैं। महिला सुरक्षा, आतंकवाद, लिंचिंग तक से प्रोटेक्शन की व्यवस्था है।
2047 तक भारत को हर क्षेत्र में नंबर-1 बनाने का संकल्प: अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को हर क्षेत्र में नंबर-1 बनाने का संकल्प लिया है। हमारा निर्यात आज बढ़कर 5000 करोड़ तक पहुंच गया है। यूएई, अमेरिका, बांग्लादेश, सऊदी अरब और भूटान समेत कई देशों में भारत निर्यात करता है। हमने अब श्वेत क्रांति 2.0 का शुभारंभ किया है। केंद्र सरकार ने गांवों में 75 हजार डेयरी सहकारी समितियां बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही 46 हजार डेयरियों को मजबूत किया जाएगा। नई डेयरी समितियों के लक्ष्य में सबसे बड़ा योगदान मध्यप्रदेश का होगा।
राज्य में 80 लाख से अधिक गौपालकों का विशाल परिवार: सीएम मोहन यादव
वहीं, अमित शाह से संबोधन से पहले सीएम मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित कर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश आगे बढ़ रहा है। आज केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में अद्भुत राज्य स्तरीय गौपालक सम्मेलन आयोजित किया गया है। राज्य में 80 लाख से अधिक गौपालकों का विशाल समृद्ध परिवार है। राज्य सरकार ने गरीब युवा, महिला और नारी शक्ति के कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। किसान कल्याण वर्ष के माध्यम से 17 विभागों को एक साथ जोड़ा गया है।
सीएम ने बताया कि राज्य के किसानों की आय गौपालन, दूध उत्पादन, पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन और मत्स्य पालन से बढ़ाने के प्रयास किया जा रहे हैं। किसानों की सबसे अधिक आय दूध उत्पादन से होती है। राज्य में प्रतिदिन 2 करोड़ लीटर से अधिक दूध उत्पादन होता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश दूध उत्पादन में अब देश का तीसरा सबसे बड़ा राज्य है। उन्होंंने कहा कि मैं भी एक किसान परिवार से आता हूं। इसलिए पशुपालक और गौपालकों की परेशानियों को अच्छी तरह समझता हूं।
अमित शाह-सीएम मोहन यादव की मौजूदगी में अहम एमओयू
गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री अमित शाह और सीएम मोहन यादव की मौजूदगी में मोरवन प्रोजेक्ट के तहत भोपाल में नगर वन विकसित करने के लिए केआरआईबीएचओ और मध्यप्रदेश राज्य जैवविविधता बोर्ड के बीच एमओयू हुआ। इस पहल का उद्देश्य भोपाल में हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन को बढ़ावा देना है। नगर वन के विकास से स्थानीय जैव विविधता के संरक्षण के साथ शहर में हरित आवरण भी बढ़ेगा। अमित शाह ने गौपालकों के हित में किए जा रहे कार्यों के लिए सीएम मोहन यादव और उनकी टीम की सराहना करते हुए बधाई दी। कार्यक्रम में राज्य में प्रतिदिन 50 लाख लीटर दूध उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
Delhi High Court ने सरकार को DMC में महिला आरक्षण पर शीघ्र विचार करने को कहा
नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने रेखा गुप्ता नीत सरकार से दिल्ली चिकित्सा परिषद (डीएमसी) में महिलाओं को कम से कम 50 प्रतिशत आरक्षण देने के संबंध में जल्द निर्णय लेने को कहा है। मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने चिकित्सक अंजू गंभीर की जनहित याचिका पर 30 सितंबर को यह आदेश दिया। याचिका में परिषद में महिला चिकित्सकों को ‘‘समान और सार्थक प्रतिनिधित्व’’ देने का अनुरोध किया गया है।
अदालत ने कहा कि डीएमसी का गठन दिल्ली चिकित्सा परिषद अधिनियम, 1997 के तहत किया गया है, जिसमें चुनाव या मनोनयन, किसी भी माध्यम से महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान नहीं है, इसलिए अदालत अधिकारियों को ऐसा कोटा देने का निर्देश नहीं दे सकती। अदालत ने कहा, ‘‘हालांकि, याचिकाकर्ता ने पहले ही एक अभ्यावेदन देकर अपनी मांग रखी है, जिस पर राज्य सरकार के विभिन्न अधिकारी विचार कर रहे हैं।’’ पीठ ने आदेश दिया, ‘‘हम वर्तमान याचिका का निपटारा राज्य सरकार और उसके संबंधित अधिकारियों को याचिकाकर्ता के अनुरोध पर विचार करने और उस पर उचित निर्णय जल्द लेने का निर्देश देते हुए करते हैं।’’ याचिकाकर्ता ने डीएमसी के अलावा दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन में भी महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग की थी। अधिवक्ता रूपेश दत्ता और स्नेहलता चतुर्वेदी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि चिकित्सा क्षेत्र में महिलाओं की संख्या काफी होने के बावजूद डीएमसी में पर्याप्त विविधता और प्रतिनिधित्व नहीं है।
याचिका में कहा गया कि इसके कारण विभिन्न मुद्दों पर महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की आवाज शामिल नहीं हो पाती।
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