झारखंड की बेटियों ने रचा इतिहास, 44 साल बाद महिला हॉकी में भारत को दिलाया गोल्ड
Jharkhand Daughters Win Gold: एशियन गेम्स के मैदान से भारत के लिए एक ऐसी गौरवशाली खबर आई है जिसने हर हिंदुस्तानी का सीना चौड़ा कर दिया है. भारतीय महिला हॉकी टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए पूरे 44 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है. इस ऐतिहासिक कामयाबी की सबसे बड़ी और खूबसूरत बात यह रही कि इस जीत की धुरी झारखंड की जांबाज बेटियां बनीं. मैदान पर जब भारतीय बेटियां खेल रही थीं, तब उनकी स्टिक से सिर्फ गेंद ही नहीं घूम रही थी बल्कि चार दशकों का सूखा भी खत्म हो रहा था. हॉकी के अलावा तीरंदाजी में भी राज्य की बेटियों ने अपने अचूक निशाने से सोना जीतकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी सुख-सुविधा की मोहताज नहीं होती.
हॉकी के मैदान पर चार दशक का सूखा समाप्त
भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए यह मुकाबला करो या मरो जैसा था. देश करीब 44 सालों से एशियन गेम्स में महिला हॉकी के स्वर्ण पदक के लिए तरस रहा था. मैदान पर उतरी टीम ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया और प्रतिद्वंद्वी को कोई मौका नहीं दिया. इस टीम का नेतृत्व झारखंड की बेटी सलीमा टेटे ने बतौर कप्तान बेहद कुशलता से किया. सलीमा टेटे और अनुभवी खिलाड़ी निक्की प्रधान के साथ राज्य के अन्य खिलाड़ियों ने मैदान पर अपनी जान झोंक दी. उनके सटीक पास, जबर्दस्त तालमेल और मैदान पर बिजली जैसी फुर्ती के आगे विरोधी टीम पूरी तरह पस्त हो गई. जैसे ही मैच की अंतिम सीटी बजी, मैदान से लेकर पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ पड़ी.
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