Explainer: सुपर इंटेलिजेंस क्या है? AI से कितनी अलग है यह तकनीक? जानें क्यों हो रही है इसकी चर्चा
Super Intelligence VS Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पिछले कुछ वर्षों में तेजी से हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है. पढ़ाई, नौकरी, कारोबार, मेडिकल रिसर्च, साइबर सुरक्षा और मनोरंजन जैसे कई क्षेत्रों में AI का इस्तेमाल बढ़ रहा है. अब AI के साथ एक और शब्द तेजी से चर्चा में है और वह है Superintelligence. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने AI के लिए ‘Superintelligence’ शब्द इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है. उनका तर्क है कि ‘Artificial’ यानी कृत्रिम शब्द इस तकनीक की वास्तविक क्षमता को पूरी तरह नहीं दिखाता.
हालांकि, Superintelligence कोई नया शब्द नहीं है और न ही इसे डोनाल्ड ट्रंप ने बनाया है. यह अवधारणा करीब सात दशक पुरानी है. वैज्ञानिक और AI विशेषज्ञ लंबे समय से ऐसी मशीनों की संभावना पर चर्चा करते रहे हैं, जिनकी बौद्धिक क्षमता इंसानों से आगे निकल जाए.
Superintelligence क्या है?
सबसे आसान भाषा में समझें तो Superintelligence ऐसा AI सिस्टम है, जिसकी बौद्धिक क्षमता इंसानों से बहुत ज्यादा हो.
आज का AI कई कामों में इंसानों से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. उदाहरण के लिए कोई AI सिस्टम बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कुछ ही सेकंड में कर सकता है या किसी खास बीमारी की पहचान में डॉक्टरों की मदद कर सकता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह हर क्षेत्र में इंसानों से बेहतर है.
Superintelligence की अवधारणा इससे कहीं आगे की है. इसमें ऐसे सिस्टम की कल्पना की जाती है जो लगभग सभी बौद्धिक क्षेत्रों में इंसानों से काफी बेहतर प्रदर्शन करे.
ऐसा सिस्टम-
- गणित की जटिल समस्याओं को हल कर सकेगा.
- नई वैज्ञानिक खोजों में इंसानों से आगे निकल सकता है.
- प्रोग्रामिंग और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है.
- नई दवाओं और उपचारों की खोज तेज कर सकता है.
- भाषा को समझने और इस्तेमाल करने में बेहद सक्षम हो सकता है.
- जटिल रिसर्च और विश्लेषण कर सकता है.
- अलग-अलग क्षेत्रों की जानकारी को जोड़कर नए समाधान खोज सकता है.
यानी Superintelligence का मतलब केवल ‘बहुत स्मार्ट AI’ नहीं है. इसका मतलब ऐसी संभावित मशीन बुद्धिमत्ता है जो व्यापक स्तर पर इंसानी बौद्धिक क्षमता से बहुत आगे निकल जाए. इसकी चर्चा आज भले ही ज्यादा हो रही हो, लेकिन इसकी जड़ें 1950 के दशक तक जाती हैं.
जॉन वॉन न्यूमैन ने रखी थी चर्चा की नींव
हंगेरियन-अमेरिकी गणितज्ञ, भौतिक विज्ञानी, कंप्यूटर वैज्ञानिक और इंजीनियर जॉन वॉन न्यूमैन ने 1950 के दशक की शुरुआत में मशीनों के इंसानी बौद्धिक क्षमता से आगे निकलने की संभावना पर चर्चा की थी.
उस समय आधुनिक AI आज की तरह मौजूद नहीं था. फिर भी वैज्ञानिक यह सोचने लगे थे कि अगर मशीनें लगातार ज्यादा सक्षम होती गईं तो क्या एक समय ऐसा आ सकता है जब उनकी क्षमता इंसानों से आगे निकल जाए.
1965 में आईजे गुड ने विचार को आगे बढ़ाया
इसके बाद ब्रिटिश गणितज्ञ और सांख्यिकीविद आईजे गुड ने इस अवधारणा को और आगे बढ़ाया. उन्होंने एक ‘Ultraintelligent Machine’ की कल्पना की थी. उनका विचार था कि ऐसी मशीन खुद से भी ज्यादा बुद्धिमान मशीन तैयार करने में सक्षम हो सकती है.
यानी मशीन सिर्फ इंसानों की मदद करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अपनी क्षमता को और बढ़ाने वाली अगली मशीन बनाने में भी भूमिका निभा सकती है. यह विचार आज AI सुरक्षा से जुड़ी चर्चाओं में भी महत्वपूर्ण माना जाता है.
आधुनिक Superintelligence की अवधारणा किसने दी?
Superintelligence की आधुनिक अवधारणा को दार्शनिक और AI शोधकर्ता निक बोस्ट्रॉम ने व्यापक स्तर पर चर्चा में लाया. उन्होंने 2014 में Superintelligence: Paths, Dangers, Strategies नाम से किताब लिखी. इसमें उन्होंने ऐसी बुद्धिमत्ता पर विस्तार से चर्चा की, जो लगभग सभी बौद्धिक क्षेत्रों में इंसानों की क्षमता से बहुत आगे निकल जाए.
बोस्ट्रॉम की अवधारणा के मुताबिक Superintelligence किसी एक क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने वाली मशीन नहीं है. यह व्यापक बौद्धिक क्षमता वाली मशीन होगी. यही बात इसे मौजूदा AI से अलग बनाती है.
क्या Superintelligence और AI एक ही हैं?
AI और Superintelligence को एक ही चीज समझना सही नहीं होगा. AI एक बहुत बड़ा क्षेत्र है. इसके अंदर अलग-अलग तरह के सिस्टम आते हैं. कोई AI केवल चेहरा पहचानने के लिए बनाया गया हो सकता है, कोई भाषा समझने के लिए और कोई मेडिकल डेटा का विश्लेषण करने के लिए. दूसरी तरफ Superintelligence एक संभावित ऐसी अवस्था है, जिसमें AI की बौद्धिक क्षमता इंसानों से बहुत आगे निकल जाए.
इसे एक उदाहरण से समझिए, मान लीजिए कोई AI सिस्टम नई दवा की खोज इंसानों से 10 गुना तेजी से कर लेता है. यह बहुत शक्तिशाली AI है. लेकिन अगर वह गणित, प्रोग्रामिंग, भाषा या दूसरी वैज्ञानिक समस्याओं में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाता, तो उसे Superintelligence कहना जरूरी नहीं है. लेकिन अगर कोई सिस्टम दवा की खोज, गणित, प्रोग्रामिंग, भाषा, रिसर्च और कई अन्य बौद्धिक क्षेत्रों में एक साथ इंसानों से काफी बेहतर प्रदर्शन करे, तो वह Superintelligence की अवधारणा के करीब होगा.
AI से Superintelligence तक कितने चरण?
Superintelligence को समझने के लिए इसे मोटे तौर पर चार स्तरों में देखा जा सकता है. हालांकि ये कोई आधिकारिक या सर्वमान्य तकनीकी पैमाना नहीं हैं.
पहला चरण- Narrow AI
ऐसा AI जो किसी खास काम में विशेषज्ञ हो. उदाहरण के लिए फोटो पहचानना, भाषा का अनुवाद करना या शतरंज खेलना.
दूसरा चरण- General AI की ओर बढ़ना
ऐसा सिस्टम जो कई अलग-अलग तरह के काम करने में सक्षम हो और सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित न हो.
तीसरा चरण- Human-level General Intelligence
ऐसी मशीन जिसकी बौद्धिक क्षमता इंसानों के बराबर हो और जो इंसानों की तरह कई अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर सके.
चौथा चरण- Superintelligence
ऐसा सिस्टम जिसकी बौद्धिक क्षमता लगभग सभी क्षेत्रों में इंसानों से काफी ज्यादा हो. यह चार चरण केवल समझाने के लिए हैं. इन्हें AI की आधिकारिक तकनीकी सीढ़ी नहीं माना जाता.
Trump ने Superintelligence शब्द की बात क्यों की?
डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा यानी UNGA में अपने भाषण के दौरान AI के लिए Superintelligence शब्द इस्तेमाल करने का सुझाव दिया. उनका तर्क था कि ‘Artificial Intelligence’ में Artificial यानी ‘कृत्रिम’ शब्द है, जिसमें कुछ हद तक नकलीपन का भाव आता है. इसके मुकाबले Superintelligence शब्द AI की संभावित ताकत और तेजी से बढ़ती क्षमता को ज्यादा स्पष्ट कर सकता है.
ट्रंप के सुझाव के मुताबिक यह शब्द मौजूदा AI की कानूनी परिभाषा को बदलने, उसका दायरा बढ़ाने या उसे आगे ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि ट्रंप प्रशासन ने Superintelligence की कोई सर्वमान्य नई तकनीकी परिभाषा अभी तय नहीं की है. इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि भविष्य में अमेरिका की नीतियों और कानूनों में इस शब्द का इस्तेमाल किस अर्थ में किया जाएगा.
क्या दुनिया के दूसरे देश भी AI की जगह Superintelligence कहेंगे?
यह अभी साफ नहीं है क्योंकि, Superintelligence शब्द पहले से वैज्ञानिक और तकनीकी चर्चाओं में इस्तेमाल होता रहा है. लेकिन इसे AI के आधिकारिक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाएगा या नहीं, यह भविष्य में ही स्पष्ट होगा.
विशेषज्ञों के बीच भी इस बात को लेकर पूरी सहमति नहीं है कि आज की AI तकनीक को किस स्तर पर Superintelligence कहा जाना चाहिए. यही कारण है कि फिलहाल AI और Superintelligence दोनों शब्दों का इस्तेमाल अलग-अलग संदर्भों में किया जा रहा है.
क्या आज का AI Superintelligence है?
फिलहाल इसे इस तरह कहना सही नहीं होगा. आज के AI मॉडल बेहद शक्तिशाली हो चुके हैं. वे लेख लिख सकते हैं, कोड तैयार कर सकते हैं, तस्वीरें बना सकते हैं, डेटा का विश्लेषण कर सकते हैं और वैज्ञानिक शोध में सहायता कर सकते हैं.
लेकिन किसी सिस्टम का किसी खास काम में इंसानों से बेहतर होना अपने आप में Superintelligence का प्रमाण नहीं है.
Superintelligence की अवधारणा का आधार कहीं व्यापक है. इसमें ऐसी बौद्धिक क्षमता की कल्पना की जाती है जो एक साथ कई क्षेत्रों में इंसानों से काफी आगे हो.
Superintelligence को लेकर चिंता क्यों है?
Superintelligence की चर्चा सिर्फ इसकी क्षमता के कारण नहीं होती, बल्कि इसके संभावित जोखिमों को लेकर भी होती है.
अगर भविष्य में कोई AI सिस्टम इंसानों से बहुत ज्यादा सक्षम हो जाता है तो कई सवाल उठेंगे.
- क्या इंसान उसके फैसलों को नियंत्रित कर पाएंगे?
- क्या AI अपने लक्ष्य खुद तय कर सकेगा?
- अगर AI अपनी क्षमता खुद बढ़ाने लगे तो क्या होगा?
- क्या इंसान उसके काम करने के तरीके को पूरी तरह समझ पाएंगे?
- अगर ऐसी तकनीक का गलत इस्तेमाल हुआ तो इसका असर कितना बड़ा हो सकता है?
यही वजह है कि AI सुरक्षा से जुड़े वैज्ञानिक Superintelligence पर चर्चा के साथ-साथ नियंत्रण, सुरक्षा, निगरानी और जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी जोर देते हैं.
आखिर AI और Superintelligence में अंतर क्या है?
सीधी भाषा में कहें तो AI एक बड़ी श्रेणी है, जबकि Superintelligence AI की एक संभावित बेहद उन्नत अवस्था है.
AI किसी खास काम में इंसानों से बेहतर हो सकता है. लेकिन Superintelligence की अवधारणा ऐसे सिस्टम की है जो लगभग हर बौद्धिक क्षेत्र में इंसानों से बहुत आगे निकल जाए. इसलिए Superintelligence को AI का पर्याय मानना सही नहीं होगा.
इसका निचोड़ यही है कि Superintelligence कोई नया शब्द नहीं है. इसकी चर्चा 1950 के दशक से चली आ रही है और 1965 में आईजे गुड तथा बाद में निक बोस्ट्रॉम जैसे विचारकों ने इसे आगे बढ़ाया. अब ट्रंप द्वारा इस शब्द को AI के संदर्भ में इस्तेमाल करने की बात ने इसे फिर चर्चा में ला दिया है.
हालांकि, Superintelligence की स्पष्ट तकनीकी और कानूनी परिभाषा अभी तय नहीं है. असली सवाल यह है कि AI की क्षमता भविष्य में किस स्तर तक पहुंचती है और इतनी शक्तिशाली तकनीक को सुरक्षित तरीके से कैसे विकसित और नियंत्रित किया जाता है.
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इस कंपनी ने बढ़ाए पेट्रोल की कीमतों में 5 तो डीजल के दाम में किया 3 रुपये प्रति लीटर का इजाफा
Petrol Diesel Price: निजी ईंधन कंपनी नायरा एनर्जी ने देशभर में फैले अपने नेटवर्क पर पेट्रोल में 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी शनिवार से लागू की है. इसकी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी होना है. यह जानकारी इंडस्ट्री के सूत्रों की ओर से दी गई.
कंपनी ने क्यों बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के दाम?
नई कीमतों के जरिए नायरा एनर्जी की कोशिश बढ़ी हुई लागत और बिक्री मूल्य में अंतर को कम करना है. मौजूदा दौर में कच्चे तेल की कीमतों के ऊपर जाने के कारण पेट्रोल और डीजल की लागत तेजी से बढ़ी है. देश में 7,000 से ज्यादा पेट्रोल पंप चलाने वाली नायरा एनर्जी की ओर से इस साल दूसरी बार ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की है.
मार्च में भी बढ़ाए थे कंपनी ने तेल के दाम
इससे पहले मार्च में, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण आपूर्ति में रुकावट आने पर कंपनी ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं, लेकिन जुलाई में कच्चे तेल की कीमतें कम होने पर यह बढ़ोतरी वापस ले ली थी. कीमतों में यह ताजा बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब सरकारी तेल वितरक कंपनियां, जो भारत के 1,04,000 से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90 प्रतिशत से ज्यादा का संचालन करते हैं, ने ग्लोबल क्रूड मार्केट में उतार-चढ़ाव के बावजूद रिटेल कीमतों को काफी हद तक स्थिर रखा है.
1 अक्टूबर को एलपीजी सिलेंडर के भी बढ़े थे दाम
इस हफ्ते की शुरुआत में, सरकार ने कहा था कि निजी ईंधन विक्रेताओं को पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर रोक नहीं लगानी चाहिए. इसके अलावा, सरकारी कंपनियों ने एक अक्टूबर से 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में 62.50 रुपए का इजाफा किया था. हालांकि, घरेलू एलपीजी की कीमतों को 942 रुपए पर स्थिर रखा था. साथ ही, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमतों में भी 16 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी. घरेलू एयरलाइंस के लिए एटीएफ की कीमतें 121 रुपए प्रति लीटर से बढ़कर 137 रुपए प्रति लीटर हो गई है.
स्रोत- आईएएनएस
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