UPSC शताब्दी समारोह में बोले PM Modi, ब्रिटिश दौर में भी सिविल सेवा परीक्षा में संस्कृत का पर्चा था
(परामर्श: एक अक्टूबर को जारी दि115 खबर में यह स्पष्ट करते हुए सुधार किया जा रहा है कि सुभाष चंद्र बोस ने संस्कृत विषय की परीक्षा दी थी, न कि उन्होंने सिविल सेवा की पूरी परीक्षा संस्कृत में दी थी)
नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की स्वतंत्रता से पहले की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े एक ऐतिहासिक तथ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान भी सिविल सेवा परीक्षा में संस्कृत का एक प्रश्नपत्र होता था। राष्ट्रीय राजधानी के ‘भारत मंडपम’ में बृहस्पतिवार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई अभिलेखीय प्रदर्शनी के एक विवरण का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1920 में अपनी परीक्षा के दौरान संस्कृत विषय की परीक्षा दी थी। मोदी ने कहा, ‘‘गैलरी को देखते हुए मैंने ध्यान दिया कि इसमें यह जानकारी भी दी गई है कि सुभाष चंद्र बोस ने 1920 में इसी प्रक्रिया से गुजरते हुए परीक्षा दी थी।” उन्होंने कहा, ‘‘मेरा ध्यान इस बात ने खींचा कि उस समय भारत ब्रिटिश शासन होने के बावजूद परीक्षा में संस्कृत एक प्रश्नपत्र हुआ करता था, जिसे सुभाष बाबू ने भी दिया था।’’ प्रधानमंत्री ने बोस और अन्य ऐतिहासिक विभूतियों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले एक शताब्दी में कई लोगों ने परीक्षा प्रक्रिया को “विश्वास की विरासत” में बदल दिया और इस संस्था को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मोदी ने युवा अभ्यर्थियों और कार्यक्रम में मौजूद लोगों से भारत की सिविल सेवा व्यवस्था की गहरी ऐतिहासिक यात्रा को समझने के लिए गैलरी देखने का आग्रह किया। यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री ने एक विशेष स्मारक सिक्का, डाक टिकट और भारत में लोक सेवा आयोगों को आकार देने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों को दर्ज करने वाली एक पुस्तक भी जारी की।
सारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों में IAF ने की Air Dropping, पहुंचाए 28 टन से ज्यादा राशन
सारण जिले में बाढ़ के कारण प्रभावित एवं दुर्गम क्षेत्रों में राहत सामग्री की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा गृह मंत्रालय व रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार से समन्वय स्थापित कर एयर ड्रॉपिंग की विशेष व्यवस्था की गई है। इस पहल का उद्देश्य बाढ़ प्रभावित उन क्षेत्रों में भी आवश्यक खाद्य सामग्री पहुंचाना है, जहां जलजमाव एवं बाढ़ के कारण सड़क मार्ग से राहत सामग्री पहुंचाना कठिन हो गया है।
सारण जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में भारतीय वायु सेना के हेलिकॉप्टरों के द्वारा अब तक 15 उड़ानों में 5,600 से अधिक ड्राई राशन पैकेट के माध्यम से 28 टन से अधिक खाद्य सामग्री एयर ड्रॉप किए जा चुके हैं। एयर ड्रॉपिंग के माध्यम से प्रभावित परिवारों तक आवश्यक खाद्य सामग्री पहुंचाई जा रही है, जिससे बाढ़ के कारण सामान्य आवागमन बाधित होने की स्थिति में भी लोगों को समय पर राहत उपलब्ध हो सके।
आपदा प्रबंधन विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रभावित आबादी की आवश्यकता के अनुसार राहत सामग्री उपलब्ध कराने के लिए सड़क मार्ग के साथ-साथ आवश्यकतानुसार वैकल्पिक माध्यमों का भी उपयोग किया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि बाढ़ प्रभावित प्रत्येक परिवार तक यथाशीघ्र आवश्यक राहत एवं खाद्य सामग्री पहुंचाई जाए।
इस विशेष राहत अभियान में भारतीय वायु सेना की विभिन्न इकाइयों के पायलटों एवं कर्मियों द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। एयर ड्रॉपिंग अभियान का संचालन ग्रुप कैप्टन अनुज गुप्ता एवं विंग कमांडर विशाल खत्री (गोरखपुर), स्क्वाड्रन लीडर रोहित दादरवाल एवं फ्लाइट लेफ्टिनेंट कुणाल कलमकर (बागडोगरा) तथा फ्लाइट लेफ्टिनेंट राठौड़ भरत सिंह (बागडोगरा) के नेतृत्व में किया जा रहा है।
माननीय मुख्यमंत्री ने इस चुनौतीपूर्ण समय में बिहार के बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार तथा भारतीय वायु सेना के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित किया जा रहा है।
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