Priyanka Kakkar ने छोड़ी AAP, हरी-भरी Delhi के लिए Congress में हुईं शामिल
आम आदमी पार्टी (AAP) को एक झटका लगा है। शनिवार को पार्टी की मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ कांग्रेस में शामिल हो गईं। उन्होंने कहा कि अब "वोटों को बंटने देने की कोई ज़रूरत नहीं है। कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर एक वीडियो पोस्ट के ज़रिए प्रियंका के पार्टी में शामिल होने की घोषणा की। वीडियो में कक्कड़ ने कहा कि वह पार्टी में इसलिए शामिल हो रही हैं क्योंकि वह उस दिल्ली को वापस पाना चाहती हैं जिसमें वह बड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि मैं आज बहुत गर्व के साथ कांग्रेस पार्टी में शामिल हो रही हूँ क्योंकि मैं उस दिल्ली को वापस पाना चाहती हूँ जिसमें मैं बड़ी हुई हूँ। मुझे वैसी ही हरी-भरी, साफ़-सुथरी, प्रगतिशील और सुरक्षित दिल्ली चाहिए जो मेरे बड़े होने के दिनों का एक अहम हिस्सा थी। भारतीय राजनीति में एक दशक से ज़्यादा के अनुभव के बाद, मेरा सच में मानना है कि सिर्फ़ कांग्रेस ही ऐसा कर सकती है। अगर कोई एक नेता है जो सच्चा और ईमानदार है, तो वह राहुल गांधी हैं। वह मुश्किलों का सामना करने वाले और मज़बूत इरादों वाले नेता हैं। यह ज़रूरी है कि हम सब एक साथ आएँ।
न्यूज़ एजेंसी ANI से बात करते हुए कक्कड़ ने कहा कि वह "बीजेपी की पिछड़ी सोच वाली राजनीति को हराने" के लिए पार्टी में शामिल हो रही हैं। उन्होंने कहा कि मैं बहुत गर्व के साथ कांग्रेस में शामिल हो रही हूँ। अब हमें वोटों को बंटने नहीं देना है। हमें ज्ञानेश कुमार के ख़िलाफ़ लड़ना है और बीजेपी की पिछड़ी सोच वाली राजनीति को भी हराना है।
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प्रियंका कक्कड़ कौन हैं?
प्रियंका कक्कड़ ने हाल ही में AAP की मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर काम किया; उन्हें अप्रैल 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। वह 2013 में पार्टी में शामिल हुईं और समय के साथ उन्होंने संगठन से जुड़े कई काम संभाले। इनमें तेलंगाना ऑब्ज़र्वर, दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र के लिए लीगल हेड और राज्यसभा सांसद संजय सिंह की सलाहकार के तौर पर काम करना शामिल है।
UPSC शताब्दी समारोह में बोले PM Modi, ब्रिटिश दौर में भी सिविल सेवा परीक्षा में संस्कृत का पर्चा था
(परामर्श: एक अक्टूबर को जारी दि115 खबर में यह स्पष्ट करते हुए सुधार किया जा रहा है कि सुभाष चंद्र बोस ने संस्कृत विषय की परीक्षा दी थी, न कि उन्होंने सिविल सेवा की पूरी परीक्षा संस्कृत में दी थी)
नयी दिल्ली, तीन अक्टूबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की स्वतंत्रता से पहले की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े एक ऐतिहासिक तथ्य का उल्लेख करते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान भी सिविल सेवा परीक्षा में संस्कृत का एक प्रश्नपत्र होता था। राष्ट्रीय राजधानी के ‘भारत मंडपम’ में बृहस्पतिवार को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई अभिलेखीय प्रदर्शनी के एक विवरण का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1920 में अपनी परीक्षा के दौरान संस्कृत विषय की परीक्षा दी थी। मोदी ने कहा, ‘‘गैलरी को देखते हुए मैंने ध्यान दिया कि इसमें यह जानकारी भी दी गई है कि सुभाष चंद्र बोस ने 1920 में इसी प्रक्रिया से गुजरते हुए परीक्षा दी थी।” उन्होंने कहा, ‘‘मेरा ध्यान इस बात ने खींचा कि उस समय भारत ब्रिटिश शासन होने के बावजूद परीक्षा में संस्कृत एक प्रश्नपत्र हुआ करता था, जिसे सुभाष बाबू ने भी दिया था।’’ प्रधानमंत्री ने बोस और अन्य ऐतिहासिक विभूतियों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले एक शताब्दी में कई लोगों ने परीक्षा प्रक्रिया को “विश्वास की विरासत” में बदल दिया और इस संस्था को नयी ऊंचाइयों तक पहुंचाया। मोदी ने युवा अभ्यर्थियों और कार्यक्रम में मौजूद लोगों से भारत की सिविल सेवा व्यवस्था की गहरी ऐतिहासिक यात्रा को समझने के लिए गैलरी देखने का आग्रह किया। यूपीएससी के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री ने एक विशेष स्मारक सिक्का, डाक टिकट और भारत में लोक सेवा आयोगों को आकार देने वाले महत्वपूर्ण निर्णयों को दर्ज करने वाली एक पुस्तक भी जारी की।
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