Crisis In Iran: संकट में ईरान! महंगाई बेकाबू, मुद्रा कमजोर और होर्मुज पर घटता दबदबा
अमेरिका और ईरान के बीच करीब सात महीने से चल रहा भू-राजनीतिक और सैन्य टकराव अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां ईरान की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक स्थिति पर भारी दबाव देखा जा रहा है। अमेरिकी पाबंदियों, मुद्रा में ऐतिहासिक गिरावट और खाड़ी देशों से तेल के वैकल्पिक रास्तों के उभरने के कारण तेहरान की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं।
ईरानी अर्थव्यवस्था पर सीधी चोट और गिरता रियाल
युद्ध और प्रतिबंधों का असर ईरान की अर्थव्यवस्था पर बहुत तेजी से दिख रहा है। पिछले दो महीनों में ईरानी रियाल डॉलर के मुकाबले करीब 25% तक कमजोर हो चुका है। इसके कारण आयात होने वाली वस्तुएं बेहद महंगी हो गई हैं और आम नागरिकों पर महंगाई का भारी दबाव बढ़ गया है। सितंबर में युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने कई टैंकर्स पर नया कच्चा तेल लोड नहीं किया है, जिससे उसका तेल निर्यात भी प्रभावित हुआ है।
घरेलू मोर्चे पर बढ़ी मुश्किलें और महंगाई
ईरान के लिए यह आर्थिक संकट इसलिए भी बेहद संवेदनशील है क्योंकि युद्ध शुरू होने से पहले ही देश में महंगाई और कमजोर मुद्रा को लेकर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। बजट के दबाव को कम करने और जनता के असंतोष से बचने के लिए तेहरान के नगर प्रशासन ने जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें तय कर दी हैं। स्थिति यह है कि युद्ध का असर अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ-साथ ईरान के भीतर आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी साफ नजर आने लगा है।
होर्मुज पर ईरान की पकड़ कमजोर होने के संकेत
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिस पर ईरान लंबे समय से अपने रणनीतिक दबाव का इस्तेमाल करता रहा है। हालांकि, वर्तमान परिस्थितियों में इस पर ईरान की पकड़ कमजोर होने के संकेत मिल रहे हैं। ब्लूमबर्ग और जेपी मॉर्गन के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य पूर्व से कच्चे तेल की शिपमेंट युद्ध से पहले के स्तर के करीब 98% तक पहुंच चुकी है। इससे यह साफ होता है कि वैश्विक तेल बाजार ने वैकल्पिक रास्तों और सुरक्षा व्यवस्था के जरिए खुद को काफी हद तक संभाल लिया है।
अमेरिका की सख्त पाबंदियां और सैन्य तैयारी
सैनिक दबाव के साथ-साथ अमेरिका आर्थिक मोर्चे पर भी ईरान को लगातार घेर रहा है। वाशिंगटन ने ईरान की बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियों, रेल कंपनियों और एविएशन सेक्टर पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं, जिसके चलते यूएई, इराक, तुर्किये और ओमान जाने वाली उड़ानें तक प्रभावित हुई हैं। इसके साथ ही, अमेरिका ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाते हुए विमानवाहक पोतों और हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती की है, जिससे आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
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