तस्करी के सेट पर चोटिल हुईं अमृता खानविलकर:शूटिंग के दौरान लगी गंभीर चोट, इमरान हाशमी ने संभाला, एक्ट्रेस ने सुनाया पूरा किस्सा
टीवी, फिल्म और ओटीटी की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुकीं अभिनेत्री अमृता खानविलकर के लिए साल 2026 की शुरुआत बेहद खास रही है। इस साल उनकी दो वेब सीरीज रिलीज हुईं, जिनमें से एक में उन्होंने इमरान हाशमी के साथ स्क्रीन शेयर की है। दमदार किरदारों, एक्शन सीक्वेंस और अलग-अलग जॉनर में काम कर अमृता ने एक बार फिर अपनी वर्सेटिलिटी साबित की है। थिएटर से लेकर ओटीटी तक, हर मंच पर उनका आत्मविश्वास साफ नजर आता है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभिनेत्री ने इमरान हाशमी के साथ काम करने के अनुभव, अपने हालिया प्रोजेक्ट्स और आगे की योजनाओं पर खुलकर बात की। 2026 की शुरुआत आपके लिए काफी रॉकिंग रही है। दो वेब सीरीज रिलीज हुई हैं, इसे आप कैसे देखती हैं? सच में यह शुरुआत काफी रॉकिंग रही है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार मैंने कोई न्यू ईयर रेजोल्यूशन भी नहीं लिया था, और फिर भी सब कुछ अपने आप सही तरीके से होता चला गया। मैं अपनी मराठी थिएटर की रिहर्सल कर रही थी, तभी दिसंबर में मुझे कॉल आया कि तस्करी नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने जा रही है और प्रमोशन के लिए मेरी डेट्स चाहिए। संयोग से 7 और 8 जनवरी की जो दो डेट्स मांगी गई थीं, मैं उन दिनों फ्री थी। सब कुछ बड़े आराम से हो गया और मुझे दर्शकों से बहुत प्यार मिला। तस्करी हो या स्पेस जेन: चंद्रयान, दोनों में आपके किरदार एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं। इसे निभाना कितना चैलेंजिंग था? तस्करी में मुझे मिताली कामथ के रोल के लिए नहीं, बल्कि किसी और किरदार के ऑडिशन के लिए बुलाया गया था। पता नहीं नीरज और राघव सर के मन में क्या आया कि उन्होंने कहा, “इसका भी ऑडिशन दे दो।” नीरज सर ने मुझसे पूछा कि क्या मुझे एक्शन आता है। मैंने ईमानदारी से कहा कि एक्शन तो नहीं, लेकिन मैं डांसर हूं, इसलिए कोरियोग्राफी समझती हूं। इसके बाद डेढ़ घंटे तक स्टंट की रिहर्सल करवाई गई और फिर ऑडिशन लिया गया। ऑडिशन देखते ही उन्होंने कहा कि यही रोल मैं करूंगी। एक एक्शन सीन के दौरान गलती से मैंने अपने स्टंटमैन को मुक्का मार दिया, जो उसकी हड्डी पर जा लगा और मेरा हाथ भी सूज गया। इसके बावजूद तुरंत ग्लव्स पहनकर मुझे किक बॉक्सिंग वाले मोंटाज के लिए फोटोशूट करना था। दर्द भूलकर मैं काम पर लग गई। अब यही किस्से मैं आगे चलकर अपने ग्रैंडचिल्ड्रन को सुनाऊंगी। वहीं स्पेस जेन: चंद्रयान में मुझे एक बार फिर टीवीएफ के साथ काम करने का मौका मिला। इस सीरीज के जरिए मैंने वैज्ञानिकों की जिंदगी को बहुत करीब से महसूस किया कि कैसे उनके प्रोफेशन में 0.0001 प्रतिशत की भी कितनी अहमियत होती है। ऐसे रोल करने के बाद क्या आपके अंदर का डर खत्म हो गया है? क्या आगे आप ज्यादा एक्सपेरिमेंटल रोल करेंगी? जी हां, डर तो उसी वक्त खत्म हो गया था जब मैंने नीरज पांडे जैसे डायरेक्टर के साथ एक एक्शन सीरीज कर ली। इसके बाद मेरी इच्छा थी कि मैं टीवीएफ के साथ भी एक ठोस काम करूं, और वह मौका मुझे मिला। आगे भी मैं इसी ईमानदारी के साथ अलग-अलग तरह के काम करना चाहती हूं। तस्करी के सेट पर इमरान हाशमी को देखकर क्या आप कभी स्टारस्ट्रक हुईं? कोई खास पल जो आपके लिए यादगार रहा हो? मेरी और नंदीश की जो जबरदस्त केमिस्ट्री दिखती है, वह सिर्फ इमरान सर की वजह से ही संभव हो पाई। जब एक एक्शन सीन के दौरान मुझे चोट लगी, उस वक्त मेरे पीछे इमरान सर ही थे। उन्होंने तुरंत सीन रुकवाया, आइस बकेट मंगवाया और खुद मेरा हाथ पकड़कर उसमें डाला। दर्द के कारण मैं रो पड़ी थी, लेकिन उन्होंने मुझे संभाला। वाकई यह कहना गलत नहीं होगा कि “अख्खा बॉलीवुड एक तरफ और इमरान हाशमी एक तरफ।” सेट पर कई मेकअप आर्टिस्ट और क्रू मेंबर्स मेरे पास आकर कहते थे कि मैम, बस एक फोटो खिंचवा दीजिए या हमें उन्हें बस देखना है। उनके साथ काम करने में एक अलग ही तरह का कंफर्ट था। उनका ऑरा ही अलग है। वे ऐसे अभिनेता हैं जिन्हें न फेलियर से फर्क पड़ता है, न सक्सेस से। आपके हिसाब से ओटीटी प्लेटफॉर्म नए एक्टर्स को किस तरह मौके दे रहा है? मुझे लगता है कि ओटीटी सबसे ज्यादा राइटर्स का मीडियम है। यहां किरदारों को बहुत अलग तरीके से लिखा जा सकता है। चाहे किरदार डार्क हो या ग्रे जोन में, दर्शक उसे स्वीकार कर लेते हैं। स्टोरीटेलिंग के लिहाज से ओटीटी एक बेहद दमदार प्लेटफॉर्म है। जब जयदीप अहलावत, तिलोत्तमा शोमे, कोंकणा सेन शर्मा जैसे कलाकार हों, तो फिर क्या कहना। यहां हीरो-हीरोइन नहीं, सिर्फ कंटेंट काम करता है। फिल्मों के अलावा आप थिएटर में भी काफी एक्टिव हैं और इस बार अपना शो खुद प्रोड्यूस कर रही हैं। इसके बारे में बताइए? यह मराठी रंगभूमि में मेरा डेब्यू है, जिसमें मैं एक्टिंग के साथ-साथ प्रोड्यूसर भी हूं। थिएटर मुझे बहुत पसंद है, क्योंकि जो संतुष्टि थिएटर देता है, वह कोई और मंच नहीं दे सकता। जब 700–800 लोग आपको लाइव देखने आते हैं और शो खत्म होते ही आपको उनका प्यार मिलता है, वह अनुभव अनमोल होता है। अब तक हम मुंबई, पुणे, सातारा, सांगली और कोल्हापुर मिलाकर 10 शो कर चुके हैं। नाटक का नाम लग्न पंचमी है। अपने अब तक के सफर को आप कैसे देखती हैं? इस सफर में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं। मैं भगवान का शुक्रिया अदा करती हूं कि उन्होंने मुझे यह दिन दिखाया। हर कोई मेहनत करता है, लेकिन कई बार काम नोटिस नहीं हो पाता। मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे दर्शकों का इतना प्यार मिला, और इसके लिए मैं हमेशा आभारी रहूंगी।
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