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रेलूराम हत्याकांड के दोषी बेटी-दामाद दोबारा जेल जा सकते हैं:सुप्रीम कोर्ट ने रिहाई पर रोक लगाई, हाईकोर्ट को दोबारा विचार करने के आदेश
हिसार में पूर्व विधायक रेलूराम हत्याकांड मामले में दोषी बेटी सोनिया और दामाद संजीव की बेल पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। साथ ही पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट को समयपूर्व हुई रिहाई पर दोबारा विचार करने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने 9 दिसंबर को उम्रकैद की सजा काट रहे संजीव और सोनिया को 2 महीने की अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद रेलूराम के भतीजों ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले तो को चुनौती दी थी। हांलाकि जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि कंटमप्रेरी अथॉरिटी द्वारा रिव्यू प्रोसेस जारी रहेगी, मगर अंतिम निर्णय को पब्लिक नहीं किया जाएगा। न ही इसे लागू किया जाएगा। बता दें कि 23 अगस्त 2001 में हिसार के लितानी गांव में फॉर्म हाउस में सोनिया ने पति संजीव के साथ मिलकर प्रॉपर्टी के लालच में पिता रेलूराम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), बच्चे प्रियंका (14), सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोता लोकेश (4) और दो पोतियों शिवानी (2) तथा 45 दिन की प्रीति की हत्या कर दी थी। 2 पॉइंट में पढ़िए अब सोनिया-संजीव का क्या होगा… अब सिलसिलेवार पढ़िए क्या है पूरा मामला… 2001 में बेटी-दामाद ने की थी 8 हत्याएं: 23 अगस्त 2001 को हिसार के लितानी गांव के फार्म हाउस में पूर्व विधायक की छोटी बेटी सोनिया ने जमीन के लालच में 8 हत्याएं कर दी थी। इसमें पिता रेलू राम पूनिया (50), उनकी पत्नी कृष्णा देवी (41), बच्चे प्रियंका (14), सुनील (23), बहू शकुंतला (20), पोता लोकेश (4) और दो पोतियों शिवानी (2) तथा 45 दिन की प्रीति की हत्या हुई थी। 2014 में सजा को उम्रकैद में बदला: इसके बाद रेलूराम के भतीजों की शिकायत पर पुलिस ने पानीपत से एक महीने बाद ही संजीव को गिरफ्तार कर लिया था। मामले में 2004 में हिसार डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने संजीव और सोनिया को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे 2007 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा। इसके बाद 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने दया याचिका में देरी का हवाला देते हुए सजा को उम्रकैद में बदल दिया था। 6 अगस्त, 2024 को दी सजा को चुनौती: सोनिया और संजीव ने 6 अगस्त 2024 के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें कहा गया था कि संजीव को अपनी पूरी जिंदगी जेल में बितानी होगी। उन्होंने कहा कि राज्य स्तरीय कमेटी ने उनकी जेल में रहने के दौरान के व्यवहार, पढ़ाई, सुधार के लिए किए गए कामों और पुनर्वास योजनाओं पर ध्यान ही नहीं दिया। हाईकोर्ट ने दिसंबर में दोनों को जमानत दी: इसके बाद सोनिया और संजीव ने होईकोर्ट में जमानत एप्लिकेश फाइल की। होईकोर्ट के आदेश पर 9 दिसंबर 2025 को दोनों कोर्ट को जमानत मिली थी। हांलाकि इसके बाद रेलूराम के दोनों भतीजों ने उकलाना थाने पहुंचकर अपनी जान को खतरा बताया था। इसके बाद डॉयल 112 की एक गाड़ी कई दिनों तक उनकी कोठी पर तैनात रही। अब पढ़िए 8 लोगों के मर्डर की पूरी कहानी…
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