Delhi News: दिल्ली में कूड़ा प्रबंधन पर MCD की खास बैठक, नए नियमों पर हुई चर्चा
दिल्ली नगर निगम (MCD) ने कूड़ा प्रबंधन और साफ-सफाई को लेकर एक खास बैठक की। इसमें कूड़े को अलग-अलग करने और नए नियमों पर चर्चा हुई। साथ ही, यमुना की सफाई के लिए भी बड़े अभियान का ऐलान किया गया है।
Car Checklist: पुरानी कार खरीदने से पहले जांचें एक्सीडेंट हिस्ट्री, ऐसे मिलेगी पूरी डिटेल
Car Checklist: पुरानी कार खरीदते समय सिर्फ उसकी कीमत, माइलेज और सर्विस रिकॉर्ड देखना काफी नहीं है। कई बार दुर्घटनाग्रस्त कार की मरम्मत कराकर उसे अच्छी कंडीशन में बेच दिया जाता है। ऐसे में कार की असली स्थिति जानने के लिए उसकी इंश्योरेंस क्लेम हिस्ट्री जांचना जरूरी है। इसके लिए आप तीन तरीकों की मदद ले सकते हैं।
पॉलिसी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट क्या है?
पॉलिसी क्लीयरेंस सर्टिफिकेट बीमा कंपनी की ओर से जारी किया जाने वाला दस्तावेज है। इसमें पॉलिसी और नो क्लेम बोनस (NCB) से जुड़ी जानकारी मिल सकती है। पुरानी कार खरीदते समय विक्रेता से यह प्रमाणपत्र मांगने पर उसके बीमा रिकॉर्ड की जांच करने में मदद मिल सकती है।
पुरानी कार की क्लेम हिस्ट्री जांचने के 3 तरीके
1. IIB पोर्टल से लें जानकारी
इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (IIB) पोर्टल पर वाहन की बीमा पॉलिसी और उपलब्ध क्लेम रिकॉर्ड की जानकारी देखी जा सकती है। इसके लिए पोर्टल पर जाकर क्विक लिंक्स में संबंधित विकल्प चुनें। इसके बाद वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करें। कुछ मामलों में इंजन और चेसिस नंबर भी मांगे जा सकते हैं। ध्यान रखें कि पोर्टल पर जानकारी अपडेट होने में समय लग सकता है।
2. नो क्लेम बोनस की जांच करें
कार की मौजूदा इंश्योरेंस पॉलिसी में दर्ज NCB भी उपयोगी जानकारी दे सकता है। लगातार पांच साल तक कोई क्लेम नहीं करने पर यह छूट अधिकतम 50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। अगर पुरानी कार की पॉलिसी में NCB शून्य है, तो विक्रेता से इसकी वजह पूछें। हालांकि, पॉलिसी लैप्स होने या NCB ट्रांसफर होने से भी यह शून्य हो सकता है।
3. बीमा कंपनी से करें संपर्क
कार की मौजूदा बीमा कंपनी का नाम पता होने पर उसके ग्राहक सेवा विभाग से संपर्क किया जा सकता है। हालांकि, गोपनीयता के कारण कंपनी क्लेम की पूरी जानकारी केवल पंजीकृत पॉलिसीधारक को दे सकती है। इसलिए विक्रेता से जरूरी दस्तावेज साझा करने के लिए कहें।
क्लेम रिकॉर्ड में इन बातों पर दें ध्यान
10,000 से 15,000 रुपये के छोटे क्लेम मामूली डेंटिंग, पेंटिंग या बंपर बदलने से जुड़े हो सकते हैं। वहीं, कार की IDV के 30 से 50 प्रतिशत तक का क्लेम बड़े नुकसान का संकेत हो सकता है। अगर कार पहले टोटल लॉस घोषित हुई है या बाढ़ में डूबी है, तो खरीदने से पहले विशेष सावधानी बरतें।
खरीदने के बाद इंश्योरेंस कराएं ट्रांसफर
कार खरीदने के बाद बीमा पॉलिसी अपने नाम पर ट्रांसफर कराना जरूरी है। पुराने मालिक का NCB उसके साथ जुड़ा रहता है, जबकि नए खरीदार को अपनी पात्रता के अनुसार NCB मिलता है।
इसलिए पुरानी कार खरीदने से पहले क्लेम हिस्ट्री, बीमा दस्तावेज और मरम्मत के बिल जरूर जांचें। साथ ही, किसी भरोसेमंद मैकेनिक से कार के इंजन, चेसिस और इलेक्ट्रिकल सिस्टम का निरीक्षण कराएं।
(मंजू कुमारी)
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