Tamil Nadu Politics | विपक्ष के निशाने पर मुख्यमंत्री विजय, स्टालिन का तंज- भाजपा से क्यों डरते हैं टीवीके प्रमुख, मुख्यमंत्री की तरह आचरण करें
तमिलनाडु में छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के प्रचार के दौरान सूबे का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर)-मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) विवाद पर चुप्पी साधने को लेकर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर तीखा हमला बोला है। स्टालिन ने तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के संस्थापक विजय पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से डरने का गंभीर आरोप लगाया है। स्टालिन ने छह अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव के लिए यहां एक रैली को संबोधित करते हुए कहा कि टीवीके सरकार को समर्थन देने वाले दल भी सवाल कर रहे हैं कि विजय ने एसआईआर-सीईसी विवाद पर कुछ क्यों नहीं कहा।
टीवीके को बाहर से समर्थन दे रहे वाम दल कई मुद्दों को लेकर विजय के नेतृत्व वाली सरकार की आलोचना करते रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री जी, आपको किस बात का डर है? जब देश भर के सभी नेता इस मुद्दे पर बोल रहे हैं, तो आप इस पर भी मुंह नहीं खोल पा रहे हैं, इसकी क्या वजह है? मुख्यमंत्री जी, क्या आप भाजपा से इतना डरते हैं?’’ स्टालिन ने कहा कि कुछ दिन पहले यहां प्रचार करने आए विजय ने सच बोल दिया था। उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने यह स्वीकार करके सच बोल दिया कि टीवीके भाजपा की एक शाखा है।’’
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उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने विधानसभा की गरिमा को धूमिल किया है, उन्होंने विधानसभा को उस जगह में बदल दिया जहां मीसा कानून के तहत जेल में रहने के दौरान हुई उनकी तकलीफ़ों का मजाक उड़ाया गया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को इस तरह आचरण करना चाहिए कि लोग उन्हें सम्मान के साथ मुख्यमंत्री कहें। स्टालिन ने विजय से कहा, ‘‘मुख्यमंत्री की तरह व्यवहार कीजिए और घटिया मंत्री में मत बदलिए। मैं दोहराता हूं, कृपया मुख्यमंत्री की तरह आचरण कीजिए, घटिया मंत्री की तरह व्यवहार मत कीजिए।
वैश्विक तनाव के बीच UN Chief Antonio Guterres ने की गांधीवादी मूल्यों को अपनाने की अपील
संयुक्त राष्ट्र, तीन अक्टूबर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने कहा कि बढ़ते विभाजन और संघर्ष के मौजूदा दौर में महात्मा गांधी की शिक्षाएं हमें नए सिरे से सचेत करती हैं। गुतारेस ने साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहानुभूति की उस भावना को आत्मसात करने का आह्वान किया जिसकी पैरवी महात्मा गांधी करते थे। गांधी जयंती यानी दो अक्टूबर को हर वर्ष मनाए जाने वाले ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ के अवसर पर जारी अपने संदेश में गुतारेस ने कहा, “इस अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर हम महात्मा गांधी के असाधारण जीवन और विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।” उन्होंने कहा कि गांधी ने अपने पूरे जीवन में शांति के सिद्धांतों पर अडिग रहते हुए गहरे और स्थायी बदलाव लाने का प्रेरणादायी उदाहरण पेश किया।
गुतारेस के मुताबिक, गांधी ने दिखाया कि अन्याय का मुकाबला करने का सबसे अच्छा तरीका व्यवस्था में मौजूद भेदभाव और दमन की क्रूरता तथा हिंसा का उसी तरह जवाब देना नहीं है, बल्कि संवाद और अहिंसा के माध्यम से आपसी समझ बनाना, गरिमा सुनिश्चित करना और स्थायी बदलाव लाना है। उन्होंने कहा, “बढ़ते विभाजन, तनाव और संघर्ष के इस दौर में गांधी की शिक्षाएं हमें नए सिरे से सचेत करती हैं।’’ संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, ‘‘ लोग पीड़ित हैं, गरीबी और असमानता ने संपन्न और वंचित लोगों के बीच खाई बढ़ा दी है। शांति और विकास की बुनियाद-संयुक्त राष्ट्र चार्टर, मानवाधिकार, अंतरराष्ट्रीय कानून, कूटनीति और संवाद को नजरअंदाज किया जा रहा है और उनका खुले तौर पर उल्लंघन किया जा रहा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ इस बेहद तनावपूर्ण समय में आइए, गांधी के जीवन में दिखाई देने वाले साहस, सहानुभूति, गरिमा और साझा मानवता को अपनाएं।
वास्तविक संवाद और कूटनीति के माध्यम से विभाजन को दूर करने, पीड़ा समाप्त करने और अहिंसा के जरिए शांतिपूर्ण विश्व बनाने के लिए काम करें।’’ इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने ‘शांति और विकास के साधन के रूप में अहिंसा’ विषय पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि सर्वोदय की अवधारणा के माध्यम से व्यक्त गांधी की विकास दृष्टि आज दुनिया में समावेशी, समानतापूर्ण और सतत विकास की मौजूदा जरूरत को पूरा करती है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के प्रति गांधी की सजगता उनकी इस बात में दिखाई देती है कि पृथ्वी हर व्यक्ति की जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन देती है, लेकिन हर व्यक्ति के लालच को पूरा करने के लिए नहीं।
उन्होंने कहा कि यह विचार आज जलवायु संबंधी चिंताओं के बीच काफी प्रासंगिक है और सतत जीवनशैली तथा पृथ्वी के प्रति जिम्मेदार संरक्षण का आह्वान करता है।
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