शाह बोले-असम में 64-लाख घुसपैठिए, 7 जिलों में इनका बहुमत:कांग्रेस ने राज्य को बंदूक-गोली, संघर्ष और युवाओं की मौत के अलावा क्या दिया
गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को असम में बदलती डेमोग्राफी पर कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। गृह मंत्री ने कहा, मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि उनकी पार्टी ने असम को बंदूकें, गोलियों, संघर्ष और युवाओं की मौत के अलावा क्या दिया है। शाह ने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान असम में घुसपैठियों की आबादी शून्य से बढ़कर 64 लाख हो गई और सात जिलों में घुसपैठिए बहुमत में हो गए। मोदी सरकार राज्य में डेमोग्राफिक ट्रेंड को उलटने का काम कर रही है। शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर नॉर्थईस्ट का अपमान करने का भी आरोप लगाया। असम के डिब्रूगढ़ में खानिकर परेड ग्राउंड में एक जनसभा को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि गणतंत्र दिवस पर विदेशियों सहित सभी गणमान्य व्यक्तियों ने सम्मान के प्रतीक के रूप में स्कार्फ पहना था, लेकिन राहुल ने इनकार कर दिया था। शाह ने आगे कहा कि राहुल गांधी जो चाहें कर सकते हैं, लेकिन जब तक बीजेपी सत्ता में है। हमारी पार्टी नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति का अपमान बर्दाश्त नहीं करेगी। शाह ने कहा- असम से राज्यसभा सांसद रहे मनमोहन सिंह भी काम नहीं कर पाए केंद्रीय गृह मंत्री ने असम में घुसपैठियों को बसने से रोकने में मिसिंग समुदाय की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, घुसपैठ को रोकना मिसिंग समुदाय की जिम्मेदारी है। आपको बंदूक उठाने की जरूरत नहीं है। डिब्रूगढ़ और धेमाजी को जोड़ने वाली ब्रह्मपुत्र नदी पर बोगीबील पुल के बारे में बात करते हुए, शाह ने कहा कि यह पूरी दुनिया के सामने भारत की प्रगति का प्रतीक है। उन्होंने कहा, हालांकि, भारत में बहुत कम लोग जानते हैं कि बोगीबील पुल मिसिंग समुदाय के मेरे भाइयों और बहनों की कड़ी मेहनत और पसीने से बनाया गया था। आज, यह पुल देश भर में और विश्व स्तर पर एक नए भारत की सोच का एक शक्तिशाली प्रतिनिधित्व बन गया है। केंद्रीय गृह मंत्री ने आगे कहा कि असम से राज्यसभा सांसद मनमोहन सिंह 10 साल तक प्रधानमंत्री रहे, लेकिन यह पुल अधूरा ही रहा। असम के लोगों ने मोदी जी पर भरोसा किया और उनके नेतृत्व में यह पुल सिर्फ चार साल में पूरा हो गया। शाह बोले- असम की चाय यूरोपीय देशों में भेजी जाएगी शाह ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने असम और उसके चाय उद्योग को बदनाम करने के लिए एक टूलकिट जारी किया था। उन्होंने कहा कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से यह सुनिश्चित होगा कि असम की चाय यूरोपीय देशों में बिना किसी टैरिफ के भेजी जाएगी। शाह ने कहा कि बीजेपी ने पिछले चुनावों में वादा किया था कि उसकी सरकार असम को बाढ़ मुक्त बनाएगी। इस दिशा में कदम 2026 के चुनावों से पहले ही उठाए जा चुके हैं। उन्होंने असम के मतदाताओं से अपील की कि "विकास, शांति, सुरक्षा, औद्योगिक और कृषि प्रगति सुनिश्चित करने और असम को घुसपैठ और बाढ़ से मुक्त बनाने के लिए लगातार तीसरी बार बीजेपी को चुनें। --------------------- ये खबर भी पढ़ें… शाह बोले- तमिलनाडु में देश की सबसे भ्रष्ट सरकार:कहा- परिवारवाद से विकास नहीं होगा अमित कहा कि तमिलनाडु में देश की सबसे भ्रष्ट सरकार है। यहां DMK सरकार परिवारवाद की राजनीति कर रही है और अब राज्य से डीएमके के परिवारवाद काे खत्म करने का समय आ गया है। शाह ने कहा कि DMK डीएमके का सपना है कि परिवार की राजनीति को आगे बढ़ाया जाए, लेकिन यह सपना अब पूरा नहीं होगा। शाह ने AIADMK से गठबंधन में चुनाव लड़ने की भी बात कही। पूरी खबर पढ़ें…
देश की पहली LNG ट्रेन चलने को तैयार:एक बार टैंक फुल करने पर 2200 किलोमीटर तक चलेगी, डीजल की तुलना में तीन गुना खर्च कम
भारत की रेल सुविधाओं में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। क्योंकि देश की पहली लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) से चलने वाली ट्रेन अहमदाबाद पहुंच गई है। इस हाईटेक ट्रेन की खास बात यह है कि यह एक बार पूरी तरह से भरे टैंक में 2200 किलोमीटर तक की लंबी दूरी तय कर सकती है। मेहसाणा और साबरमती में चल रहा ट्रायल गुजरात के मेहसाणा और साबरमती खंड के बीच ट्रेन का ट्रायल चल रहा है। ये ट्रेन अब तक 2000 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर चुकी है। आने वाले समय में इस खंड की 8 से 10 और ट्रेनों में एलएनजी तकनीक को अपनाने की योजना है। सफल ट्रायल के बाद इस तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के तहत, लगभग 1400 हॉर्सपावर क्षमता वाली ट्रेनों को एलएनजी ईंधन प्रणाली में परिवर्तित किया गया है। प्रदूषण में आएगी भारी कमी अहमदाबाद के डीआरएम वेद प्रकाश ने बताया कि एलएनजी डीजल से सस्ता होने के कारण ट्रेन चलाने की कुल लागत कम हो जाती है। एलएनजी ईंधन से प्रदूषण में भी भारी कमी आती है। कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और धूल के कण जैसे हानिकारक तत्व कम मात्रा में उत्पन्न होते हैं। इससे रेलवे ट्रैक के आसपास की हवा भी शुद्ध रहती है। इसके साथ ही, ईंधन की लागत में भी काफी बचत होती है। वेद प्रकाश ने आगे बताया कि एलएनजी ईंधन प्रणाली के साथ इंजन की शक्ति या प्रदर्शन में कोई कमी नहीं आती। इंजन की विश्वसनीयता भी डीजल इंजन के समान ही बनी रहती है। एक एलएनजी टैंक से डीपीसी ट्रेन लगभग 2200 किलोमीटर तक चल सकती है, इसलिए बार-बार ईंधन भरने की आवश्यकता नहीं होती।
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others




















