पूर्व हॉकी कप्तान Pargat Singh बने Punjab Congress के नए अध्यक्ष
चंडीगढ़, दो अक्टूबर हॉकी के मैदान से कांग्रेस की पंजाब इकाई की कमान संभालने तक का परगट सिंह का सफर खेल से राजनीति में आने के चुनिंदा उदाहरणों में से एक है। पूर्व ओलंपियन और भारतीय हॉकी टीम के कप्तान रहे सिंह अब राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जालंधर छावनी विधानसभा सीट से तीन बार के विधायक 61- वर्षीय सिंह को शुक्रवार को कांग्रेस की पंजाब इकाई का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।
उन्होंने लुधियाना से सांसद अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की जगह ली है। राज्य में अगले वर्ष की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं। पंजाब के दोआबा क्षेत्र से आने वाले जाट सिख नेता सिंह को ऐसे समय प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई है, जब राज्य इकाई के नेतृत्व को लेकर कई सप्ताह से अंदरूनी खींचतान चल रही थी और इससे विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी के अभियान पर असर पड़ने की आशंका थी।
पंजाब के पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद की दौड़ में आगे माना जा रहा था, लेकिन पार्टी आलाकमान ने आखिरकार खिलाड़ी से नेता बने सिंह को चुना। पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश इकाई के विभिन्न गुटों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है। हालांकि, सिंह का राजनीतिक सफर उनके उस लंबे सार्वजनिक जीवन का केवल एक हिस्सा है, जिसकी शुरुआत हॉकी के मैदान से हुई थी।
मार्च 1965 में जालंधर के मिठापुर में जन्मे सिंह ने हॉकी खिलाड़ी के रूप में 1992 के बार्सिलोना और 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह भारतीय हॉकी टीम के कप्तान भी रहे। सिंह अपने दौर में भारत के प्रमुख रक्षात्मक खिलाड़ियों में गिने जाते थे।
भारतीय हॉकी में उनके योगदान के लिए उन्हें 1989 में अर्जुन पुरस्कार और 1998 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया। अंतरराष्ट्रीय हॉकी से संन्यास लेने के बाद सिंह खेल प्रशासन से जुड़े। राजनीति में आने से पहले उन्होंने पंजाब में खेल निदेशक और पुलिस अधीक्षक के रूप में भी सेवाएं दीं।
उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत शिरोमणि अकाली दल (शिअद) से हुई। उन्होंने 2012 का पंजाब विधानसभा चुनाव जालंधर छावनी सीट से शिअद के टिकट पर लड़ा और कांग्रेस उम्मीदवार को 6,000 से अधिक मतों से हराया। सिंह को 2016 में शिरोमणि अकाली दल से निलंबित कर दिया गया।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले सिंह, नवजोत सिंह सिद्धू के मोर्चे ‘आवाज-ए-पंजाब’ में शामिल हो गए। सिद्धू और सिंह के अलावा सिमरजीत सिंह बैंस और बलविंदर सिंह बैंस भी इस मोर्चे का हिस्सा थे। बाद में सिंह ने सिद्धू के साथ कांग्रेस का दामन थाम लिया।
नवजोत सिंह सिद्धू को कांग्रेस की पंजाब इकाई का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का संगठन महासचिव नियुक्त किया गया। सिंह ने 2017 के विधानसभा चुनाव में भी जीत दर्ज की और शिरोमणि अकाली दल के सरबजीत सिंह मक्कड़ को 29,000 से अधिक मतों से हराया। पूर्व ओलंपियन ने 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) के उम्मीदवार को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी।
कांग्रेस के 117-सदस्यीय विधानसभा में केवल 18 सीट पर सिमट जाने के बावजूद सिंह लगातार तीसरी बार जालंधर छावनी सीट से चुनाव जीतने में सफल रहे। चरनजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार में सिंह के पास शिक्षा और खेल जैसे महत्वपूर्ण विभाग थे। पंजाब से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मुखर रहने वाले सिंह कानून-व्यवस्था, खेल, शिक्षा और अपने निर्वाचन क्षेत्र से संबंधित मामलों को लेकर समय-समय पर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं।
एक जुलाई को सिंह को 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की घोषणापत्र समिति का सह-अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। वह वर्तमान में जम्मू-कश्मीर के लिए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के प्रभारी सचिव भी हैं। पंजाब कांग्रेस के शीर्ष पद पर उनकी नियुक्ति को पार्टी के क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा जाट सिख हैं, जबकि जालंधर से सांसद चरनजीत सिंह चन्नी, जो दलित समुदाय से आते हैं, पार्टी की चुनाव प्रचार समिति का नेतृत्व कर रहे हैं। गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी जाट सिख हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में वडिंग को बदलने का फैसला पार्टी के पंजाब प्रभारी महासचिव सचिन पायलट की ओर से संगठन के बारे में मिली प्रतिक्रिया के बाद लिया गया।
पायलट को पांच सितंबर को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया था। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने प्रदेश कांग्रेस के नेताओं के साथ कई दौर की बैठकें करने के बाद नेतृत्व में बदलाव पर फैसला लेने के लिए अपनी रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को सौंपी थी।
Congress के नए कार्यकारी अध्यक्ष Imran Masood बोले, पार्टी हित सर्वोपरि रहेगा
लखनऊ, दो अक्टूबर कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद ने शुक्रवार को कहा कि वह पार्टी नेतृत्व की ओर से उन पर जताए गए भरोसे पर खरा उतरने की पूरी कोशिश करेंगे और पार्टी का हित उनके लिए सर्वोपरि रहेगा। सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को जब शुक्रवार शाम कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की खबर आई, उस समय वह एक शादी समारोह में थे। मसूद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि वह पार्टी के हित में लिए गए फैसलों को लागू करने के लिए पूरी ऊर्जा के साथ चौबीसों घंटे काम करेंगे।
उन्होंने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मेरे लिए पार्टी का हित सर्वोपरि है। नेतृत्व ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, मैं उस पर खरा उतरने और अपनी जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा से निभाने की हरसंभव कोशिश करूंगा।’’ मसूद की नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीट बंटवारा होना है। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने हाल में कहा था कि पार्टी सपा के साथ गठबंधन में 150 से कम सीट पर चुनाव नहीं लड़ेगी।
इस बारे में पूछे जाने पर मसूद ने कहा, ‘‘मुझे इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। लेकिन अगर हमारे प्रदेश प्रभारी ने कोई संख्या बताई है तो हम उस पर कायम रहेंगे। हालांकि, गठबंधन का ब्योरा इस तरह फोन पर बातचीत में तय नहीं होगा।
अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व लेगा और पार्टी जो कहेगी, हम वही मानेंगे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आप सब मुझे जानते हैं, मैं जैसा हूं वैसा ही रहूंगा।’’ मसूद ने कहा कि वह यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी स्तर पर पार्टी के हितों से समझौता न हो। हाल में मसूद ने कहा था कि देशभर में राहुल गांधी ही विपक्ष की वह आवाज हैं जो भाजपा को चुनौती दे सकती है। इसके जवाब में कैराना से सपा सांसद इकरा हसन ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को हराने में अखिलेश यादव सक्षम हैं और कांग्रेस अपने दम पर ज्यादा कुछ हासिल नहीं कर पाएगी।
दोनों नेताओं के इन बयानों से 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों सहयोगी दलों के बीच नेतृत्व और सीट बंटवारे को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए थे। मसूद ने कहा, ‘‘हम अच्छा करेंगे और यह सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद से पार्टी का जो ग्राफ ऊपर जा रहा है, वह आगे भी बढ़ता रहे। आप देखेंगे कि 2027 में उत्तर प्रदेश में पार्टी की वापसी की पटकथा लिखी जाएगी।
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