BJP कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर सपा और कांग्रेस का मुकाबला करें, Vinod Tawde का आह्वान
वाराणसी (उत्तर प्रदेश), दो अक्टूबर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उत्तर प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े ने शुक्रवार को पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने और समाजवादी पार्टी (सपा) तथा कांग्रेस के दावों का जवाब देने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकसभा क्षेत्र वाराणसी में आयोजित एक सोशल मीडिया कार्यशाला को संबोधित करते हुए तावड़े ने भाजपा कार्यकर्ताओं से जमीनी स्तर के साथ-साथ डिजिटल माध्यमों से भी चुनावी अभियान चलाने को कहा। वाराणसी महानगर भाजपा अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि ने बताया कि तावड़े ने पार्टी कार्यकर्ताओं से सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के दावों का जवाब देने और केंद्र एवं उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों की ओर से किए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाने को कहा।
तावड़े ने कहा कि आज का समय युवाओं को केवल अपनी बात सुनाने का नहीं, बल्कि उनकी बात सुनने का भी है। उन्होंने कहा कि 2000 के बाद पैदा हुई पीढ़ी ने 2014 से पहले की सरकारों के दौर को प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा है, इसलिए युवाओं को तथ्यों के साथ पहले और अब की स्थिति का अंतर बताया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसी सामग्री साझा की जाए जो बदलाव और विकास की कहानी बताए।
तावड़े ने कार्यकर्ताओं से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष और काशी में हुए विकास कार्यों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने फेसबुक, ‘एक्स’ और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया मंचों का प्रभावी इस्तेमाल करने पर जोर दिया। तावड़े ने विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने और यह सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया कि इन योजनाओं के बारे में राज्यभर में लोगों को जानकारी मिले।
अग्रहरि ने बताया कि तावड़े ने पार्टी कार्यकर्ताओं से यह भी कहा कि सरकारी योजनाओं की जानकारी डिजिटल माध्यम से हर गांव और अंततः प्रत्येक लाभार्थी के मोबाइल फोन तक पहुंचनी चाहिए। कार्यशाला में पार्टी पदाधिकारियों, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
सुन्नी Waqf Board राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज करने का आदेश DM को नहीं दे सकता: High Court
लखनऊ, दो अक्टूबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में कहा है कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड अपनी सामान्य शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जिलाधिकारी (डीएम) को वक्फ संपत्ति के राजस्व अभिलेख में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज या बदलने का निर्देश नहीं दे सकता। पीठ ने साफ किया कि राजस्व अभिलेख में नामांतरण के लिए उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता में निर्धारित प्रक्रिया का ही पालन करना होगा। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की पीठ ने यह फैसला शम्स तबरेज की याचिका खारिज करते हुए पारित किया है।
याची का कहना था कि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड लखनऊ ने प्रतापगढ़ के वक्फ संख्या 1339 में 13 जनवरी 2025 को कासिम नदीम का नाम हटाकर उसको प्रबंध समिति का सचिव नियुक्त किया है। याची ने मांग की थी कि वक्फ संपत्ति के राजस्व अभिलेख में भी बदलाव के लिए जिलाधिकारी को बोर्ड के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया जाए। याची की ओर से दलील दी गई कि वक्फ कानून की धारा 28 के तहत बोर्ड जिलाधिकारी को निर्देश दे सकता है।
वहीं राज्य सरकार की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया कि राजस्व अभिलेख में नामांतरण के लिए राजस्व संहिता की धारा 34 में विशेष प्रक्रिया निर्धारित है। पीठ ने कहा कि विशेष कानून के रहते सामान्य शक्ति का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। पीठ ने कहा कि वक्फ अधिनियम की धारा 41 के तहत बोर्ड वक्फ रजिस्टर में बदलाव कर सकता है, लेकिन राजस्व अभिलेख में नामांतरण का अधिकार संबंधित तहसीलदार को है।
इसने कहा कि धारा 34 के तहत तहसीलदार दावे और आपत्तियों पर विचार करने के बाद नामांतरण का आदेश पारित कर सकता है। पीठ ने कहा कि जिलाधिकारी को राजस्व अभिलेख में नामांतरण का आदेश देने का अधिकार धारा 34 में नहीं दिया गया है। इसलिए वह वक्फ बोर्ड के निर्देश पर नामांतरण करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है।
पीठ ने याचिका खारिज करते हुए याची को धारा 34 के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष नामांतरण के लिए आवेदन करने की छूट दी है।
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