बांग्लादेश में चुनाव से पहले बढ़ती हिंसा को लेकर अमेरिकी दूतावास ने जारी किया सुरक्षा अलर्ट
ढाका, 30 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले 13वें संसदीय चुनाव और रेफरेंडम की तैयारी जोरशोर से चल रही है। इस बीच देश में हिंसा और राजनीतिक अपराधों से जुड़े मामले में भी तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।
अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को एक सुरक्षा अलर्ट जारी किया, जिसमें दक्षिण एशियाई देश में अमेरिकी नागरिकों से सावधानी बरतने की अपील की गई और चेतावनी दी गई कि शांतिपूर्ण रैलियां टकराव में बदल सकती हैं।
अमेरिकी दूतावास ने चुनाव के दौरान राजनीतिक हिंसा या कट्टरपंथियों के हमलों के खतरे के बारे में बताया। इनमें रैलियों, पोलिंग स्टेशनों और चर्च, मंदिर और मस्जिदों जैसी धार्मिक जगहों को निशाना बनाया जा सकता है।
अमेरिकी दूतावास की तरफ से जारी एडवाइजरी में कहा गया, “बांग्लादेश 12 फरवरी को एक साथ पार्लियामेंट्री चुनाव और नेशनल रेफरेंडम कराएगा। चुनाव के दौरान, राजनीतिक हिंसा या कट्टरपंथी हमले हो सकते हैं, जिनमें रैलियों, पोलिंग स्टेशनों और चर्च, मंदिर, मस्जिदों जैसी धार्मिक जगहों और दूसरी धार्मिक अहमियत वाली जगहों को निशाना बनाया जा सकता है।
एडवाइजरी में आगे कहा गया, अमेरिकी नागरिकों को सावधान रहना चाहिए और याद रखना चाहिए कि शांति से किए जाने वाले प्रदर्शन या रैलियां टकराव या हिंसा में बदल सकती हैं। आपको प्रदर्शनों से बचना चाहिए और किसी भी बड़ी भीड़ के आसपास सावधानी बरतनी चाहिए।”
इसमें आगे कहा गया, “बांग्लादेश सरकार ने 10 फरवरी से मोटरसाइकिल और 11 और 12 फरवरी को सभी तरह के ट्रांसपोर्ट पर रोक लगाने की घोषणा की है। इसके अनुसार, ढाका में अमेरिकी दूतावास में 11 और 12 फरवरी को सीमित ऑनसाइट सेवाएं उपलब्ध होंगी।”
अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को सलाह दी है कि ज्यादा भीड़ और प्रदर्शनों से बचें। हमेशा अपने आसपास का ध्यान रखें। स्थानीय मीडिया और खबरों पर नजर रखें।
बुधवार को स्थानीय मीडिया ने बताया कि जैसे ही बांग्लादेश चुनाव के लिए कैंपेन शुरू हुआ, हिंसा बढ़ गई, जिसमें उम्मीदवारों और पुलिसवालों को निशाना बनाकर धमकियां और हमले शामिल हैं। बढ़ते आपराधिक मामलों ने पूरे देश में चुनाव प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
चुनाव कैंपेन की शुरुआत से ही कई चुनाव क्षेत्रों में गोलीबारी, चाकूबाजी, तोड़-फोड़ और झड़पों की घटनाओं में कथित तौर पर कई लोग घायल हुए हैं और कई लोगों की मौत भी हुई है। इसमें अल्पसंख्यक हिंदुओं को निशाना बनाकर मौत के घाट उतारा गया है।
बांग्लादेशी अखबार ढाका ट्रिब्यून ने बताया कि कई क्षेत्रों में, चुनाव से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में तोड़फोड़ की गई या उन्हें लूट लिया गया। इसमें कैंप, माइक्रोफोन, ऑफिस, गाड़ियां और यहां तक कि पोलिंग स्टेशनों पर लगे सीसीटीवी कैमरे भी शामिल हैं। इसी बीच, कई उम्मीदवारों ने पुलिस स्टेशनों में जनरल डायरी (जीडी) दर्ज कराई है, जिसमें जान से मारने की धमकियां और उनके खिलाफ साजिश का डर बताया गया है।
--आईएएनएस
केके/एबीएम
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रेलवे की बड़ी उपलब्धि: पश्चिम रेलवे में KAVACH 4.0 का सफल कमीशनिंग
लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा करना अब पहले से ज़्यादा सुरक्षित होने जा रहा है क्युकी जिस KAVACH 4.0 के कमीशनिंग का इंतज़ार था वो ख़त्म हो चुका है। पश्चिम रेलवे ने रेल सुरक्षा के क्षेत्र में KAVACH 4.0 परियोजना को एक बड़ी उपलब्धि बताया है। इस परियोजना को 397 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई थी। नागदा–वडोदरा–सूरत–विरार–मुंबई सेंट्रल सेक्शन के रेल मार्ग पर KAVACH 4.0 सुरक्षा प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। इसी योजना के तहत वडोदरा–सूरत–विरार के बीच लगभग 344 किलोमीटर लंबे सेक्शन में कावच का काम पूरा कर लिया गया है और 30 जनवरी 2026 को इस हिस्से में सिस्टम को औपचारिक रूप से चालू कर दिया गया।
क्या है KAVACH और क्यों है यह गेम-चेंजर ?
KAVACH एक आधुनिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो ट्रेन परिचालन को अतिरिक्त सुरक्षा कवच प्रदान करता है। इसका मुख्य उद्देश्य मानवीय भूलों से होने वाले हादसों को कम करना है। यह सिस्टम सिग्नल पासिंग एट डेंजर, ओवरस्पीडिंग और हेड-ऑन व रियर-एंड टकराव को रोकने में सक्षम है। इसके अलावा लेवल क्रॉसिंग पर ऑटो व्हिसलिंग और खराब मौसम या कोहरे की स्थिति में कैब के अंदर सिग्नल रिपीट करने जैसी सुविधाएँ भी देता है। इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि KAVACH 4.0 पूरी तरह भारत में तैयार तकनीक है। इसे किसी विदेशी कंपनी से नहीं खरीदा गया, इसी वजह से यह सिस्टम भारतीय हालात, ट्रैफिक और मौसम के अनुसार बेहतर तरीके से काम करता है। वेस्टर्न रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी विनीत अभिषेक ने जानकारी देते हुए न्यूज़ नेशन को बताया की KAVACH की लागत यूरोप में इस्तेमाल होने वाले ETCS जैसे सुरक्षा सिस्टम के मुकाबले काफी कम है, यानी कम खर्च में ज्यादा सुरक्षा मिलती है। यही कारण है कि यह तकनीक न सिर्फ सुरक्षित है, बल्कि भारतीय रेलवे के लिए व्यावहारिक और टिकाऊ समाधान भी है।
जटिल तकनीक, तेज़ रफ्तार और भविष्य की तैयारी
वडोदरा–विरार सेक्शन पर कावच लागू करने के लिए हर स्टेशन और ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सेक्शन की अलग योजना तैयार की गई। ट्रैक पर 8,000 से अधिक RFID टैग लगाए गए, 57 रेडियो टावर खड़े किए गए और पूरे रूट में OFC केबल बिछाई गई। स्टेशनों, लेवल क्रॉसिंग और इंजनों में अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए तथा व्यापक ट्रायल और टेस्टिंग की गई। फिलहाल WAP-7 इंजनों पर कावच सक्षम है और पश्चिम रेलवे में अब तक 364 लोकोमोटिव्स इससे लैस हो चुके हैं। आने वाले महीनों में पूरे BG रूट पर कवच लागू करने की दिशा में काम तेज़ी से जारी है।
इस परियोजना पर जनवरी 2023 में वडोदरा–सूरत–विरार सेक्शन पर काम शुरू हुआ और 30 जनवरी 2026 को 344 किलोमीटर लंबे इस खंड में कावच सिस्टम का सफल कमीशनिंग कर दिया गया। इससे पहले दिसंबर 2025 में वडोदरा–अहमदाबाद सेक्शन पर कावच लागू किया जा चुका है। अब तक पश्चिम रेलवे के कुल 435 रूट किलोमीटर में यह अत्याधुनिक सुरक्षा प्रणाली चालू हो चुकी है।
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