म्यांमार के स्कैम गैंग पर चीन की बड़ी कार्रवाई, 11 अपराधियों को एक साथ फांसी पर लटकाया
चीन ने म्यांमार में सक्रिय एक बड़े आपराधिक गिरोह के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 11 लोगों को फांसी दी है. जानकारी के अनुसार, ये सभी कुख्यात ‘मिंग फैमिली’ गैंग से जुड़े थे, जो ऑनलाइन धोखाधड़ी और अन्य गंभीर अपराधों में शामिल था. चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक, इन लोगों को पिछले साल सितंबर में हत्या, गैरकानूनी हिरासत, धोखाधड़ी और अवैध कैसीनो चलाने जैसे अपराधों में दोषी पाया गया था. इसके अलावा इस मामले में शामिल 23 अन्य लोगों को पांच साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा सुनाई गई है. चीन ने साफ किया है कि वह अपने नागरिकों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगा.
मिंग फैमिली के बारे में जानकारी
मिंग फैमिली गैंग उत्तरी म्यांमार में सक्रिय था और उसे वहां के चार बड़े आपराधिक परिवारों में गिना जाता था. यह गिरोह सैकड़ों ऑनलाइन स्कैम सेंटर चलाता था. इन केंद्रों से फोन कॉल और इंटरनेट के जरिए लोगों को ठगा जाता था. इसके अलावा यहां वेश्यावृत्ति और ड्रग्स बनाने जैसी गैरकानूनी गतिविधियां भी होती थीं.
Eleven members of the Ming family criminal syndicate in northern Myanmar have been executed. The syndicate was involved in gambling fraud exceeding 10 billion yuan and caused 14 deaths and multiple injuries. pic.twitter.com/qcisN6UKTL
— China Perspective (@China_Fact) January 29, 2026
रिपोर्ट के अनुसार, इस गैंग की गतिविधियों के कारण कम से कम 14 चीनी नागरिकों की मौत हुई, जबकि कई अन्य घायल हुए. दो दोषियों ने फैसले के खिलाफ अपील की थी, लेकिन चीन की सर्वोच्च अदालत ने निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा. अदालत ने कहा कि अपराध बेहद जघन्य थे और मृत्युदंड उचित है.
चीन की कार्रवाई
चीनी अधिकारियों ने बताया कि फांसी से पहले दोषियों को अपने परिवार से मिलने की अनुमति दी गई थी. चीन ने यह भी कहा कि वह म्यांमार, थाईलैंड और कंबोडिया जैसे देशों के साथ मिलकर सीमा पार धोखाधड़ी पर लगाम लगा रहा है. म्यांमार अब तक 53,000 से ज्यादा संदिग्धों को चीन को सौंप चुका है. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ऐसे स्कैम सेंटरों का जाल दुनिया भर में फैला हुआ है, जहां लाखों लोग इस धोखाधड़ी नेटवर्क में फंसे हुए हैं.
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अफगानिस्तान सीमा बंद रहने से पाकिस्तान को भारी आर्थिक नुकसान
इस्लामाबाद, 30 जनवरी (आईएएनएस)। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा चौकियों के लंबे समय से बंद रहने के कारण पाकिस्तान को गंभीर आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। खासतौर पर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की आय में भारी गिरावट दर्ज की गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से सीमा पर व्यापार निलंबित रहने के चलते प्रांत के राजस्व में 53.02 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिसके बाद प्रांतीय सरकार ने संघीय सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है।
पाकिस्तान के प्रमुख दैनिक अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, खैबर पख्तूनख्वा में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट सेस (आईडीसी) के संग्रह में भारी कमी आई है। चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीनों में आईडीसी संग्रह घटकर 3.48 अरब पाकिस्तानी रुपये रह गया, जबकि इसी अवधि में पिछले वर्ष यह 7.42 अरब रुपये था।
खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री के वित्तीय सलाहकार मुजम्मिल असलम ने पाकिस्तान के वाणिज्य मंत्री जम कमाल को पत्र लिखकर प्रांतीय और संघीय स्तर के हितधारकों की एक आपात बैठक बुलाने का अनुरोध किया है। इस बैठक में प्रांत पर पड़ रहे राजस्व प्रभाव, निर्यातकों और व्यापारियों की समस्याओं, फंसे हुए भुगतानों और व्यापारिक गतिविधियों के ठप होने जैसे मुद्दों पर चर्चा किए जाने की उम्मीद है।
असलम ने कहा कि सीमा पर लंबे समय से जारी व्यवधान के कारण खैबर पख्तूनख्वा को राजस्व, अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्तर पर गंभीर नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में सेस संग्रह में कमी अदालत के स्थगन आदेश के कारण हुई थी, जिसे नवंबर में सुलझा लिया गया था। इसके बाद वसूली के प्रयास किए गए, लेकिन सीमा पार व्यापार बंद रहने के कारण कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सके।
उन्होंने यह भी कहा कि निर्यातक और व्यापारी गंभीर संकट में हैं, क्योंकि उनकी खेपें और भुगतान सीमा के दोनों ओर फंसे हुए हैं। कई व्यवसाय व्यापार निलंबन के कारण अपने वैधानिक सेस दायित्वों को पूरा करने में असमर्थ हो गए हैं।
गौरतलब है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा चौकियां अक्टूबर 2025 से बंद हैं, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है। यह स्थिति उस समय बनी जब पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और तालिबान के बीच आठ दिनों तक झड़पें हुई थीं। तनाव कम करने के लिए दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद अब तक सीमा नहीं खोली जा सकी है।
इस बीच, 4 जनवरी को खैबर पख्तूनख्वा के लांडी कोटल इलाके में लोगों ने तोरखम सीमा को तुरंत खोलने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ‘ऑल बॉर्डर्स कोऑर्डिनेटर्स काउंसिल’ के बैनर तले हुए इस प्रदर्शन में व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, आदिवासी बुज़ुर्ग, दिहाड़ी मजदूर, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और नागरिक समाज के सदस्य शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सीमा बंद होने से हजारों लोगों की “आर्थिक हत्या” हो रही है, जिनमें से अधिकांश आदिवासी हैं और पूरी तरह सीमा पार व्यापार पर निर्भर थे। उन्होंने तोरखम सीमा को मध्य एशिया तक पहुंच का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक द्वार बताते हुए कहा कि यह इलाका हजारों परिवारों की आजीविका का केंद्र था।
--आईएएनएस
डीएससी
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