सोशल मीडिया की दीवानगी या लापरवाही, सड़क पर बैठकर रील शूट करती युवती का वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर इन दिनों एक चौंकाने वाला वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर ज्यादातर लोग हैरान हैं. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक युवती बीच सड़क पर आराम से बैठकर वीडियो शूट करवा रही होती है. इसी दौरान एक शख्स अपनी कार से गुजरते हुए पूरे घटनाक्रम को कैमरे में रिकॉर्ड करता है.
वीडियो में यह भी नजर आता है कि सड़क पर किसी तरह की परवाह किए बिना युवती बेफिक्र होकर रील शूट कराने में व्यस्त है. न तो ट्रैफिक का डर दिखाई देता है और न ही किसी संभावित हादसे की चिंता. यही वजह है कि इस वीडियो ने सोशल मीडिया यूजर्स के बीच बहस छेड़ दी है.
रील बनाने का बढ़ता जुनून
वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने कहा कि आज के समय में हर कोई रीलबाज बनने की होड़ में लगा हुआ है. लाइक और व्यूज की चाह में लोग अपनी और दूसरों की जान तक जोखिम में डाल रहे हैं. बीच सड़क पर बैठकर वीडियो शूट करना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि यह गंभीर दुर्घटना को भी न्योता दे सकता है.
पहले भी सामने आ चुके हैं खतरनाक मामल
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का वीडियो सामने आया हो. आए दिन सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो वायरल होते रहते हैं, जिनमें लोग रील बनाने के दौरान खतरनाक स्टंट करते नजर आते हैं. कई मामलों में लोग हादसे का शिकार भी हो चुके हैं, जिसमें गंभीर चोटें जान तक चली गई है.
आखिर कहां का है ये वीडियो?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह वीडियो कब और कहां का है. हालांकि, वीडियो की सच्चाई चाहे जो भी हो, लेकिन इसने एक बार फिर सोशल मीडिया पर बढ़ती लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
2 chapri couple doing photoshoot in middle of high speed highway saved by emergency braking by car driver
— Frontalforce ???????? (@FrontalForce) January 30, 2026
These chapris deserve UAPA type punishment pic.twitter.com/BnU41KngdQ
लोगों की प्रतिक्रिया
वीडियो देखने के बाद यूजर्स लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं. ज्यादातर लोगों ने इस हरकत को बेहद खतरनाक और गैरजिम्मेदाराना बताया है. कई यूजर्स ने ऐसे कंटेंट पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके.
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बांग्लादेश में 2025 में 522 सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं, अधिकार संगठन का दावा
ढाका, 30 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले मानवाधिकार संगठन बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई यूनिटी काउंसिल ने दावा किया है कि वर्ष 2025 में देशभर में सांप्रदायिक हिंसा की कम से कम 522 घटनाएं हुईं। यह आंकड़ा मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दावे से बिल्कुल अलग है, जिसमें कहा गया था कि केवल 71 घटनाओं में ही सांप्रदायिक तत्व शामिल थे।
ढाका में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए यूनिटी काउंसिल के कार्यवाहक महासचिव मोनिंद्र कुमार नाथ ने संगठन की वार्षिक समीक्षा रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि ये आंकड़े जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच राष्ट्रीय अखबारों और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 522 सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं में 66 लोगों की मौत हुई, जबकि महिलाओं के खिलाफ हिंसा के 28 मामले सामने आए, जिनमें बलात्कार और सामूहिक बलात्कार भी शामिल हैं। इसके अलावा 95 धार्मिक स्थलों पर हमले, 102 घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर हमले दर्ज किए गए।
यूनिटी काउंसिल ने 38 अपहरण, जबरन वसूली और यातना के मामले, 47 मौत की धमकी और शारीरिक हमले, ईशनिंदा के आरोपों में 36 गिरफ्तारियां और यातना तथा 66 मामलों में जमीन, घर और कारोबार पर जबरन कब्जे की घटनाएं भी दर्ज की हैं। यह जानकारी बांग्लादेश के प्रमुख अखबार ढाका ट्रिब्यून ने भी प्रकाशित की है।
12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव से पहले संगठन ने चेतावनी दी है कि चुनावी माहौल में भी सांप्रदायिक हिंसा जारी है। यूनिटी काउंसिल के अनुसार, 1 जनवरी से 27 जनवरी के बीच 42 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 11 हत्याएं, एक बलात्कार, मंदिरों और चर्चों पर 9 हमले, तथा लूटपाट, आगजनी और जमीन कब्जाने के 21 मामले शामिल हैं।
मोनिंद्र कुमार नाथ ने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोग मतदान के जरिए अपने नागरिक अधिकारों का प्रयोग करना चाहते हैं, लेकिन जीवन, आजीविका, संपत्ति और सम्मान को लेकर उनका डर अब भी दूर नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा, “अगर अल्पसंख्यक मतदाताओं को हतोत्साहित किया जाता है, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार, प्रशासन, चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की होगी।”
यूनिटी काउंसिल ने 19 जनवरी को मोहम्मद यूनुस द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट की भी निंदा की, जिसमें कहा गया था कि 2025 में अल्पसंख्यकों से जुड़े 645 मामले सामने आए, लेकिन उनमें से केवल 71 को ही सांप्रदायिक माना गया, जबकि बाकी 574 को गैर-सांप्रदायिक बताया गया।
नाथ ने आरोप लगाया कि “सरकारी परिभाषा के मुताबिक हत्या, बलात्कार, घरों में आगजनी, जमीन कब्जा और लक्षित हमले तब तक सांप्रदायिक नहीं माने जाते, जब तक वे मंदिर परिसरों के भीतर न हों।” उन्होंने अंतरिम सरकार के रुख को “बेतुका और भ्रामक” बताया।
संगठन ने अल्पसंख्यक नेताओं को परेशान करने और अपराधीकरण का भी आरोप लगाया। रिपोर्ट में प्रमुख हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी और यूनिटी काउंसिल के वरिष्ठ नेताओं पर दर्ज मामलों का जिक्र किया गया, जिसके चलते कई नेताओं को छिपने पर मजबूर होना पड़ा।
यूनिटी काउंसिल का कहना है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में बांग्लादेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ी है और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है, जिस पर देश और विदेश के कई मानवाधिकार संगठनों ने गहरी चिंता जताई है।
--आईएएनएस
डीएससी
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