बजट के बाद कैसा रहता है शेयर बाजार का प्रदर्शन, जनिए पिछले 15 बार का ट्रेंड
मुंबई, 30 जनवरी (आईएएनएस)। हर निवेशक या ट्रेडर के मन में यह सवाल आता है कि बजट के बाद शेयर बाजार कैसा प्रदर्शन करेगा। इसलिए हम आपके लिए पिछले 15 बजट के बाद शेयर बाजार की चाल का पूरा विश्लेषण लेकर आए हैं।
एसबीआई सिक्योरिटीज की रिपोर्ट में बताया गया कि बजट पेश होने के एक हफ्ते बाद सेंसेक्स ने 15 में से 11 बार सकारात्मक रिटर्न दिया है। इन दौरान निवेशकों को सकारात्मक 2.10 प्रतिशत का रिटर्न मिला है। इस दौरान सेंसेक्स केवल चार बार नुकसान में बंद हुआ है और इस दौरान औसत नुकसान 2.05 प्रतिशत का रहा है।
बजट पेश होने के तीन महीने की अवधि के बाद सेंसेक्स ने 15 में से नौ बार सकारात्मक रिटर्न दिया है और इस दौरान औसत मुनाफा 6.77 प्रतिशत रहा है। वहीं, छह बार सेंसेक्स ने नकारात्मक रिटर्न दिया है और औसत नुकसान 5.28 प्रतिशत का रहा है।
निफ्टी में भी कुछ इसी तरह का ट्रेड देखने को मिला है। बजट पेश होने के एक हफ्ते बाद निफ्टी ने 15 में से 12 बार सकारात्मक रिटर्न दिया है। इस दौरान औसत मुनाफा 2.04 प्रतिशत रहा है और तीन बार नकारात्मक रिटर्न दिया है, जिसमें औसत नुकसान 2.65 प्रतिशत रहा है।
बजट पेश होने के तीन महीने की अवधि के बाद निफ्टी ने 15 में से नौ बार सकारात्मक रिटर्न दिया है, जिसमें औसत रिटर्न 7.40 प्रतिशत रहा है और छह बार एनएसई के मुख्य सूचकांक ने नकारात्मक रिटर्न दिया है, जिसमें औसत नुकसान 5.46 प्रतिशत रहा है।
लार्जकैप की तरह ही छोटे और मझोले सूचकांकों का प्रदर्शन रहा है।
बजट पेश होने के एक हफ्ते बाद 15 में से 11 बार निफ्टी मिडकैप इंडेक्स और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स ने सकारात्मक रिटर्न दिया है। इस दौरान इनका औसत रिटर्न क्रमश: 3.1 और 3.3 प्रतिशत रहा है। केवल चार बार इन दोनों इंडेक्स ने नकारात्मक रिटर्न दिया है और औसत नुकसान 2.7 प्रतिशत और 3 प्रतिशत रहा है।
बजट पेश होने के तीन महीने की अवधि के बाद निफ्टी मिडकैप इंडेक्स ने 15 में से 10 बार सकारात्मक रिटर्न दिया है और औसत रिटर्न 8.67 प्रतिशत रहा है, जबकि पांच बार नकारात्मक रिटर्न दिया और इस दौरान औसत नुकसान 7.77 प्रतिशत रहा है।
दूसरी तरफ, स्मॉलकैप इंडेक्स ने 15 में से 7 बार सकारात्मक रिटर्न दिया है और इसका औसत रिटर्न 14.54 प्रतिशत रहा है, जबकि आठ बार नकारात्मक रिटर्न दिया है और औसत नुकसान 8.77 प्रतिशत रहा है।
--आईएएनएस
एबीएस/
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अगर आप भी बर्तन धोने वाले स्पंज को महीनों करते हैं इस्तेमाल, हो सकते हैं इस खतरनाक बीमारी का शिकार
Kitchen Cleaning Tips: हम सभी अपने घर की सफाई का खास ख्याल रखते हैं, खासकर रसोईघर का. रोजाना खाना बनाने और परिवार को खाने के लिए सुरक्षित माहौल देने के लिए बर्तन और किचन की साफ-सफाई जरूरी है. बर्तन धोने के लिए ज्यादातर लोग स्पंज या झाबे का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन क्या आपने सोचा है कि यही स्पंज खुद गंदा हो जाए तो क्या होगा? चलिए विस्तार से आपको बताते हैं इसके बारे में.
स्पंज क्यों बनता है बैक्टीरिया का घर?
बर्तन धोने वाला स्पंज अक्सर गीला रहता है. दिन में कई बार इस्तेमाल होने के कारण यह सूख नहीं पाता. इसके छोटे-छोटे छिद्रों में खाना फंस जाते हैं. नमी और गंदगी बैक्टीरिया के पनपने के लिए आदर्श वातावरण बनाती है. शोध बताते हैं कि पुराने स्पंज में E. coli और Salmonella जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए जा सकते हैं. यह टॉयलेट सीट से भी ज्यादा गंदा हो सकता है.
बैक्टीरिया से क्या-क्या हो सकता है?
गंदे स्पंज से फूड पॉइजनिंग, दस्त, उल्टी, पेट दर्द, आंतों में संक्रमण और त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है. जब आप इसी स्पंज से बर्तन धोते हैं, तो बैक्टीरिया बर्तनों के जरिए खाने में पहुंच जाते हैं. स्पंज में फफूंद लगना, तेज बदबू आना या उसका नरम और चिपचिपा हो जाना ऐसे संकेत हैं कि इसे तुरंत बदलना चाहिए.
कितने दिन में बदलें स्पंज?
विशेषज्ञों के अनुसार हर 7 से 10 दिन में स्पंज बदल देना चाहिए. अगर रोज ज्यादा बर्तन धोते हैं तो इसे 7 दिन में बदलें. कम इस्तेमाल होने पर भी दो हफ्ते से ज्यादा न रखें. केवल दिखावट पर भरोसा न करें, क्योंकि बैक्टीरिया नजर नहीं आते.
स्पंज को साफ रखने के तरीके
स्पंज को हर 2-3 दिन में गर्म पानी और सिरके में 5-10 मिनट भिगोकर साफ करें. माइक्रोवेव में 1 मिनट रखने से बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं. इसके बाद स्पंज को अच्छी तरह निचोड़कर सूखी जगह पर रखें. बेहतर विकल्प के लिए सिलिकॉन ब्रश या स्टील स्क्रब का इस्तेमाल करें. ये लंबे समय तक टिकते हैं और साफ करना आसान होता है.
Disclaimer: यह जानकारी रिसर्च स्टडीज और विशेषज्ञों की राय पर आधारित है. इसे मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें. किसी भी नई गतिविधि को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर सलाह लें. न्यूज नेशन इसकी पुष्टि नहीं करता है.
यह भी पढ़ें: स्पेन में वैज्ञानिकों ने की अब तक के सबसे खतरनाक कैंसर के इलाज की खोज, क्या है इससे बचने का तरीका?
होम
जॉब
पॉलिटिक्स
बिजनेस
ऑटोमोबाइल
गैजेट
लाइफस्टाइल
फोटो गैलरी
Others
News Nation






















