हिमाचल में 7 दिन में नॉर्मल से 270% अधिक बारिश:आज दोबारा वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव होगा, 3 फरवरी तक बरसेंगे बादल, कोहरे की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश में बीते एक सप्ताह के दौरान नॉर्मल से 270 प्रतिशत अधिक बादल बरसे है। मौसम विभाग के अनुसार- राज्य में 22 से 29 जनवरी के बीच 25.1 मिलीमीटर सामान्य बारिश होती है, लेकिन इस बार 94.9 मिलीमीटर बादल बरस चुके हैे। इस दौरान ऊना जिला में सामान्य की तुलना में 741 फीसदी अधिक बारिश हुई। वहीं 12 अक्टूबर से 22 जनवरी के बीच सामान्य से 95 प्रतिशत कम बारिश-बर्फबारी हुई थी। राज्य में 23 जनवरी को 100 दिन से भी ज्यादा का ड्राइ स्पेल टूटा है। इसके बाद निरंतर अच्छी बारिश-बर्फबारी हो रही है। अगले दो सप्ताह भी जारी रहेगी बारिश-बर्फबारी: IMD मौसम विभाग (IMD) की माने तो अगले दो सप्ताह तक भी बारिश-बर्फबारी होती रहेगी। एक स्ट्रांग वेस्टर्न डिस्टबेंस आज रात से एक्टिव हो रहा है। इसका ज्यादा असर एक फरवरी को नजर आएगा। इस दिन ऊंचे पहाड़ों पर भारी हिमपात और निचले इलाकों में अच्छी बारिश होगी। इस दिन सभी 12 जिलों में आंधी-तूफान का यलो अलर्ट दिया है। प्रदेश में मौसम तीन फरवरी तक खराब बना रहेगा। 8 जिलों में कोहरे की चेतावनी मौसम विभाग आज 8 जिलों में घने कोहरे की चेतावनी जारी की है। यह चेतावनी ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा, चंबा, सोलन, मंडी और सिरमौर जिला को दी गई है। इनमें सुबह 10 बजे तक कोहरे के कारण विजिबिलिटी 100 मीटर से भी नीचे गिर सकती है। इसे देखते हुए वाहन चालकों को सावधानी से गाड़ी चलाने की सलाह दी गई है। आज ऊंचे इलाकों में बारिश-बर्फबारी वहीं आज प्रदेश के निचले व मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम साफ रहेगा। मगर अधिक ऊंचे क्षेत्रों में कल भी बारिश-बर्फबारी शुरू होगी। 31 जनवरी से पूरे प्रदेश में बारिश-बर्फबारी के आसार है।
हिमाचल में 4 फुट बर्फ में ड्यूटी पर निकले कर्मचारी:VIDEO; माइनस 6° तापमान, नाममात्र मानदेय, फिर भी जान जोखिम में डाल पेयजल योजना बहाल
हिमाचल प्रदेश के शिमला जिला के दुर्गम क्षेत्र डोडरा-क्वार (रोहड़ू) में जल शक्ति विभाग के दो कर्मचारियों की जांबाजी की खूब चर्चाएं हो रहीं हैं। भारी बर्फबारी, कड़ाके की ठंड और जानलेवा हालात के बीच नाममात्र मानदेय पर काम करने वाले इन कर्मचारियों ने 4 फुट बर्फ के बीच 3 किमी पैदल पहाड़ी की चढ़ाई की। दोनों कर्मचारी शाम तक पेयजल योजना बहाल करके वापस घर लौटे। दरअसल, डोडरा-क्वार क्षेत्र में 23 जनवरी को पौने तीन फीट और 27 जनवरी को डेढ़ से दो फीट तक बर्फ गिरी। इससे ‘सटू सौर पेयजल स्कीम’ पर एक पेड़ गिर गया और पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे धंदरवाड़ी गांव के करीब 300 घरों में पानी की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई। इससे ग्रामीणों की चिंताएं बढ़ने लगीं। वीर मोहन और सुशील ने पेश की कर्तव्यनिष्ठा मिसाल कड़ाके की सर्दी में जब दिन में भी तापमान माइनस 6 डिग्री सेल्सियस तक गिरा हुआ था, ऐसे हालात में जल शक्ति विभाग के दो कर्मचारी वीर मोहन और सुशील कुमार पानी बहाल करने के लिए निकल पड़े। दोनों अपने घरों से गर्म कपड़े पहनकर और अपना साजो-सामान लेकर निकले। तीन घंटे तक चढ़ाई चढ़ने के बाद दोनों उस स्थान पर पहुंचे, जहां स्कीम क्षतिग्रस्त हुई थी। थोड़ी सी भी चूक पड़ सकती थी भारी इसके बाद बर्फ में दबी पेयजल लाइन की पाइपों को बाहर निकाला और क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को जोड़ा। इनका यह सफर किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि बर्फ पर फिसलने से थोड़ी सी भी चूक जानलेवा साबित हो सकती थी। मगर दोनों ने इसकी परवाह नहीं की। इनके प्रयासों से गांव में तीसरे दिन पानी की सप्लाई शुरू हो पाई। चांशल दर्रे से सटे क्षेत्र से शुरू होती है पेयजल योजना बता दें कि यह पेयजल योजना करीब 15 हजार फुट ऊंचाई पर स्थित चांशल दर्रे से सटी है। चांशल घाटी में 7 से 8 फीट बर्फ बताई जा रही है। इसी घाटी के निचले क्षेत्र से यह पेयजल योजना शुरू होती है। सिस्टम की सच्चाई सामने यह घटना न सिर्फ कर्मचारियों की कर्तव्यनिष्ठा को उजागर करती है, बल्कि सिस्टम के उस सच को भी सामने लाती है, जिसमें बेहद कम मानदेय पर काम करने वाले कर्मचारी दुर्गम इलाकों में जीवन रेखा बनी सेवाओं को जिंदा रखे हुए हैं। जल शक्ति विभाग के अलावा बिजली, पुलिस और PWD कर्मचारी भी भारी बर्फबारी के दौरान अपनी जान को जोखिम में डालकर काम करते देखे गए।
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