ओडिशा की सभी Gram Panchayats को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए 44 दिन का विशेष अभियान शुरू
भुवनेश्वर, दो अक्टूबर ओडिशा सरकार ने राज्यभर की ग्राम पंचायतों को ‘बाल श्रम मुक्त’ बनाने के लिए शुक्रवार को 44-दिवसीय अभियान शुरू किया। अभियान की शुरुआत दो अक्टूबर को ग्राम सभाओं में बाल श्रम के खिलाफ प्रस्ताव पारित करने के साथ हुई और यह 14 नवंबर यानी बाल दिवस तक चलेगा। ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “बच्चे हमारे राज्य की अमूल्य संपत्ति हैं।
यह सुनिश्चित करना कि उनका बचपन श्रम-मुक्त हो तथा उन्हें शिक्षा और सुरक्षा के मौलिक अधिकार मिलें, प्रत्येक नागरिक और समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।” मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर ओडिशा के लोगों से अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और राज्य को बाल श्रम मुक्त बनाने में योगदान देने की अपील की। महिला एवं बाल विकास विभाग का प्रभार संभाल रहीं उपमुख्यमंत्री प्रभाती परिदा तथा श्रम एवं ईएसआई और पंचायती राज विभाग के मंत्री रबी नारायण नायक ने भी वीडियो संदेश जारी किए। उन्होंने नागरिकों और सभी संबंधित पक्षों से मिलकर ओडिशा की प्रत्येक ग्राम पंचायत को बाल श्रम मुक्त बनाने के लिए काम करने का आग्रह किया।
अभियान में समुदाय के नेतृत्व वाले दृष्टिकोण को अपनाया गया है और ग्राम पंचायत को कार्रवाई की प्राथमिक इकाई बनाया गया है। एक अधिकारी के अनुसार, इसके तहत बिना किसी समानांतर व्यवस्था का गठन किए मौजूदा जमीनी स्तर की संस्थाओं और व्यवस्थाओं को सक्रिय किया जाएगा। इनमें पंचायती राज संस्थाएं (पीआरआई), स्कूल और स्कूल प्रबंधन समितियां (एसएमसी), मिशन शक्ति स्वयं सहायता समूह (एसएचजी), अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ता और श्रम प्रशासन शामिल हैं।
समन्वित तरीके से अभियान के क्रियान्वयन के लिए विभागवार निर्देश जारी किए गए हैं। इसके लिए पंचायती राज एवं पेयजल विभाग, मिशन शक्ति तथा स्कूल एवं जन शिक्षा विभाग के संयुक्त संचार के माध्यम से निर्देश जारी किए गए हैं, जबकि श्रम एवं ईएसआई विभाग ने इसकी सक्रिय शुरुआत की है। अभियान के तहत ग्राम पंचायतों को समुदायों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने, संवेदनशील बच्चों की पहचान करने, स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति और उन्हें स्कूल में बनाए रखने को बढ़ावा देने, बाल श्रम के हानिकारक प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने तथा बाल श्रम के मामले सामने आने पर समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
SRFTI Kolkata में हिंसक झड़प के बाद पांचवें दिन भी कक्षाएं और शूटिंग ठप
कोलकाता, दो अक्टूबर सत्यजीत रे फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान (एसआरएफटीआई) में हिंसा के बाद शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन भी कक्षाएं और फिल्मों की शूटिंग निलंबित रहीं। छात्र सख्त सुरक्षा उपायों और बाहरी राजनीतिक कार्यक्रमों पर रोक की मांग को लेकर शैक्षणिक गतिविधियों का बहिष्कार जारी रखे हुए हैं। छात्रों और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध उपभोक्ता जागरूकता संगठन अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (एबीजीपी) के सदस्यों के बीच 27 सितंबर को हुई हिंसा के बाद से संस्थान में कक्षाएं नहीं हो रही हैं।
एसआरएफटीआई छात्र संघ के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हमारा बहिष्कार जारी है। छात्रों ने शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ फिल्मों की शूटिंग भी रोक दी हैं। हम परिसर में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और फिल्म से जुड़े काम से असंबंधित बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध चाहते हैं।’’ एसआरएफटीआई छात्र संघ ने 27 सितंबर को विरोध प्रदर्शन शुरू किया था।
छात्रों ने सवाल उठाया था कि निजी दक्षिणपंथी राजनीतिक संगठन को परिसर की उन सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति क्यों दी गई, जो परंपरागत रूप से केवल फिल्म प्रदर्शन और अकादमिक सिनेमा के लिए आरक्षित हैं। बाद में सभागार के अंदर विरोध प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया, जिसमें करीब 30 छात्र और दो शिक्षक घायल हो गए। छात्रों ने आरोप लगाया कि उन्हें ‘‘राष्ट्र-विरोधी’’ कहा गया।
दूसरी ओर, एबीजीपी ने आरोप लगाया कि छात्रों ने उसके कानूनी कार्यक्रम में बाधा डाली, पोस्टर और भारत माता की तस्वीर को नुकसान पहुंचाया तथा उसके सदस्यों के साथ मारपीट की। पश्चिम बंगाल सरकार ने हिंसा की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। बांग्ला फिल्म जगत और राष्ट्रीय सिनेमा से जुड़े 90 से अधिक प्रमुख फिल्मकारों एवं कलाकारों ने हिंसा की निंदा की है।
इनमें वरुण ग्रोवर, पायल कपाड़िया, दिबाकर बनर्जी, रीमा दास और चैती घोषाल जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल हैं।
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