सपा के टिकट पर चुनाव लड़ना चाहता है निलंबित Constable, ड्यूटी से था गायब
गोरखपुर (उप्र), दो अक्टूबर गोरखपुर का एक निलंबित पुलिस कांस्टेबल समाजवादी पार्टी (सपा) के एक कार्यक्रम में दिखाई दिया, जहां वह विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार कर रहा था। वहीं, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी लंबे समय से ड्यूटी से उसकी गैरहाजिरी की जांच कर रहे हैं। कांस्टेबल श्याम सुंदर चौहान ने शुक्रवार को फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि उनका मानना है कि वह नेता बनकर लोगों की मदद कर सकते हैं।
चौहान गोरखपुर में डायल-112 में तैनात था और कथित तौर पर करीब एक साल तक ड्यूटी से गैरहाजिर रहा। करीब तीन महीने पहले उसकी अनियमित उपस्थिति का पता चलने के बाद उसे निलंबित कर दिया गया था। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि उस पर विभागीय कार्रवाई के बावजूद पुलिस लाइन में रिपोर्ट नहीं करने का भी आरोप है।
पिछले महीने चौहान सपा के एक कार्यक्रम में शामिल होते हुए दिखाई दिया था। वहां उसने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के लिए समर्थन मांगा था। चौहान ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि वह लंबे समय से सपा की विचारधारा से प्रभावित रहा है और चुनावी राजनीति में प्रवेश करना चाहता है।
उन्होंने संत कबीर नगर से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा भी जताई। चौहान ने कहा, “मुझे लगा कि पुलिस विभाग में रहते हुए मैं लोगों को न्याय नहीं दिला सकता। इसलिए मैंने राजनीति में आने का फैसला किया।
मैं पिछले तीन साल से इस विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय हूं और लोगों की मदद कर रहा हूं। अगर सपा मुझे संत कबीर नगर से टिकट देती है तो मैं लोगों के लिए काम करूंगा।” संत कबीर नगर के महुली थाना क्षेत्र के नैना झला गांव के रहने वाले चौहान उत्तर प्रदेश पुलिस के 1994 बैच के हैं। वर्ष 2023 में उनका तबादला कुशीनगर से गोरखपुर की डायल-112 इकाई में हुआ था।
उत्तर प्रदेश सरकार के सेवा आचरण नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों को सेवा में रहते हुए राजनीतिक दलों से जुड़ने या चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं है। पुलिस अधीक्षक (अपराध) अयोध्या सिंह ने कहा कि चौहान लंबे समय से ड्यूटी पर हाजिरी नहीं लगाने के कारण निलंबित था। सिंह ने कहा, “उससे संपर्क करने और अनुपस्थिति के कारणों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
गुजरात कैडर के IAS अफसर K Rajesh और Gaurav Dahiya को केंद्र ने सेवा से हटाया
अहमदाबाद, दो अक्टूबर गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारियों के. राजेश और गौरव दहिया को केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने उनकी सेवा संबंधी रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद समय से पहले सेवानिवृत्त कर दिया है। सरकार के शीर्ष सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डीओपीटी ने गुजरात कैडर के 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी राजेश और 2010 बैच के आईएएस अधिकारी गौरव दहिया को समय से पहले सेवानिवृत्त करने का फैसला किया है।
राजेश जुलाई 2022 से निलंबित हैं। उन्हें सुरेंद्रनगर के जिलाधिकारी के रूप में कार्यकाल के दौरान कथित रिश्वतखोरी के एक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद निलंबित किया गया था। वहीं, निलंबन के बाद बहाल किए जाने पर दहिया को गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त के पद पर तैनात किया गया था।
सीबीआई के अनुसार, राजेश ने अपात्र लोगों को शस्त्र लाइसेंस मंजूर करने, अयोग्य लाभार्थियों को सरकारी जमीन आवंटित करने और सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण को नियमित करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत ली थी। सीबीआई की हिरासत के बाद राजेश को साबरमती केंद्रीय जेल में रखा गया था। अगस्त 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत के आदेश के बाद उन्हें हिरासत में लिया, जब उसने सीबीआई के मामले के आधार पर अलग से जांच शुरू की।
बाद में सीबीआई ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने, सरकारी जमीन आवंटित करने और अन्य आरोपों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में राजेश के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। गिरफ्तारी के समय राजेश गांधीनगर में सामान्य प्रशासन विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे।
गिरफ्तारी के बाद गुजरात सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। दिल्ली की एक महिला द्वारा दो शादियां करने, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी देने का आरोप लगाए जाने के बाद दहिया को अगस्त 2019 में निलंबित कर दिया गया था। महिला ने आरोप लगाया था कि दहिया ने पहले से विवाहित होने की बात बताए बिना फरवरी 2018 में उससे शादी की थी।
महिला ने उन पर प्रताड़ित करने और निजी तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करने का भी आरोप लगाया था। दहिया ने इन आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि महिला ने उन्हें ‘‘मोहपाश’’ में फंसाया तथा ब्लैकमेल कर रही थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी शादी की बताई जा रही तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई थी।
गुजरात सरकार ने आरोपों की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की थी, जबकि महिला की शिकायत मिलने के बाद गांधीनगर पुलिस ने अलग से जांच की। इसके बाद जुलाई 2023 में दहिया को बहाल कर दिया गया और गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त नियुक्त किया गया। सूत्रों ने बताया कि दोनों अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त करने का फैसला केंद्र द्वारा उनके सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद लिया गया।
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