गुजरात कैडर के IAS अफसर K Rajesh और Gaurav Dahiya को केंद्र ने सेवा से हटाया
अहमदाबाद, दो अक्टूबर गुजरात कैडर के आईएएस अधिकारियों के. राजेश और गौरव दहिया को केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने उनकी सेवा संबंधी रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद समय से पहले सेवानिवृत्त कर दिया है। सरकार के शीर्ष सूत्रों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि डीओपीटी ने गुजरात कैडर के 2011 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी राजेश और 2010 बैच के आईएएस अधिकारी गौरव दहिया को समय से पहले सेवानिवृत्त करने का फैसला किया है।
राजेश जुलाई 2022 से निलंबित हैं। उन्हें सुरेंद्रनगर के जिलाधिकारी के रूप में कार्यकाल के दौरान कथित रिश्वतखोरी के एक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद निलंबित किया गया था। वहीं, निलंबन के बाद बहाल किए जाने पर दहिया को गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त के पद पर तैनात किया गया था।
सीबीआई के अनुसार, राजेश ने अपात्र लोगों को शस्त्र लाइसेंस मंजूर करने, अयोग्य लाभार्थियों को सरकारी जमीन आवंटित करने और सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण को नियमित करने के लिए कथित तौर पर रिश्वत ली थी। सीबीआई की हिरासत के बाद राजेश को साबरमती केंद्रीय जेल में रखा गया था। अगस्त 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत के आदेश के बाद उन्हें हिरासत में लिया, जब उसने सीबीआई के मामले के आधार पर अलग से जांच शुरू की।
बाद में सीबीआई ने शस्त्र लाइसेंस जारी करने, सरकारी जमीन आवंटित करने और अन्य आरोपों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में राजेश के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। बाद में उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। गिरफ्तारी के समय राजेश गांधीनगर में सामान्य प्रशासन विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे।
गिरफ्तारी के बाद गुजरात सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। दिल्ली की एक महिला द्वारा दो शादियां करने, धोखाधड़ी और आपराधिक धमकी देने का आरोप लगाए जाने के बाद दहिया को अगस्त 2019 में निलंबित कर दिया गया था। महिला ने आरोप लगाया था कि दहिया ने पहले से विवाहित होने की बात बताए बिना फरवरी 2018 में उससे शादी की थी।
महिला ने उन पर प्रताड़ित करने और निजी तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करने का भी आरोप लगाया था। दहिया ने इन आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि महिला ने उन्हें ‘‘मोहपाश’’ में फंसाया तथा ब्लैकमेल कर रही थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी शादी की बताई जा रही तस्वीरों के साथ छेड़छाड़ की गई थी।
गुजरात सरकार ने आरोपों की जांच के लिए एक जांच समिति गठित की थी, जबकि महिला की शिकायत मिलने के बाद गांधीनगर पुलिस ने अलग से जांच की। इसके बाद जुलाई 2023 में दहिया को बहाल कर दिया गया और गांधीनगर में अतिरिक्त विकास आयुक्त नियुक्त किया गया। सूत्रों ने बताया कि दोनों अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त करने का फैसला केंद्र द्वारा उनके सेवा रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद लिया गया।
ममता बनर्जी की 2021 की चोट फर्जी थी, साबित करने के लिए मेडिकल सबूत मौजूद: Suvendu Adhikari
नंदीग्राम, दो अक्टूबर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को दावा किया कि 2021 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान नंदीग्राम में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट ‘‘फर्जी’’ थी और दावा किया कि इसे साबित करने के लिए उनके पास दस्तावेजी सबूत हैं। शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम-दो विकासखंड के बिरुलिया बाजार में एक सभा को संबोधित कर थे। यही वह स्थान है जहां पांच साल पहले बनर्जी घायल हुई थीं।
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि अगर उन्हें कभी चुनौती दी गई तो वह इन सबूतों को सार्वजनिक कर देंगे। उन्होंने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री बनने के बाद मैं एसएसकेएम अस्पताल गया था। मैं अस्पताल समिति का अध्यक्ष हूं क्योंकि यह भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र में आता है, जहां का मैं निर्वाचित प्रतिनिधि हूं।’’ मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘एक्स-रे की प्लेट संबंधित मरीज को दी जाती है, लेकिन रिपोर्ट की एक प्रति अस्पताल के पास रहती है।
अब वह कागज मेरे पास है। उस समय वह (ममता बनर्जी) मुख्यमंत्री थीं। उनके डॉक्टरों ने लिखा था, ‘कोई फ्रैक्चर नहीं है।’ ’’ नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ के समर्थन में प्रचार कर रहे शुभेंदु अधिकारी ने दावा किया कि बनर्जी जिस वाहन में यात्रा कर रही थीं, उसका खुला दरवाजा सड़क किनारे स्थित लोहे के एक खंभे से टकराकर वापस उनकी ओर आ गया था, जिससे उनके पैर में ‘‘मामूली चोट’’ लगी थी।
मुख्यमंत्री अधिकारी ने आरोप लगाया कि उन्होंने (ममता) ठीक पैर पर पट्टी बांध ली और इस घटना का इस्तेमाल पूरे नंदीग्राम को बदनाम करने के लिए किया। अधिकारी ने कहा, ‘‘अगर मुझे कभी चुनौती दी गई तो मैं इसे सार्वजनिक कर दूंगा। मैं अब पुलिस मंत्री भी हूं।
उन्होंने पूरे बिरुलिया इलाके और इस क्षेत्र का अपमान किया। सीआईडी ने उस घटना के सिलसिले में हमारे स्थानीय नेताओं को बार-बार तलब किया था। मैं इनमें से कुछ भी नहीं भूला हूं।’’ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को 10 मार्च, 2021 को चुनाव प्रचार के दौरान नंदीग्राम के बिरुलिया के रेयापाड़ा इलाके में बाएं पैर और कमर में गंभीर चोट लगी थी।
बनर्जी ने शुरू में कहा था कि कुछ अज्ञात लोगों ने जानबूझकर उन्हें उनकी खुली कार के दरवाजे की ओर धक्का दिया, जिससे दरवाजा उनके बाएं पैर पर जोर से लगा और भारी भीड़ के बीच उनका पैर कुचल गया। बाद में अस्पताल से जारी एक वीडियो संदेश में उन्होंने बताया था कि समर्थकों का अभिवादन करते समय बड़ी संख्या में लोग उनकी कार के पास आ गए थे, जिससे उनका पैर कुचल गया और उन्हें चोट लगी। चिकित्सकीय जांच में उनके बाएं टखने और पैर की हड्डी तथा लिगामेंट में गंभीर चोट की पुष्टि हुई थी।
इसके अलावा, उनके दाएं कंधे, बांह, गर्दन और कमर में चोट के निशान और दर्द था। उन्हें तुरंत कोलकाता वापस लाया गया और राज्य सरकार द्वारा संचालित एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया। विस्तृत जांच के बाद बनर्जी को 12 मार्च को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।
उनके बाएं पैर पर प्लास्टर लगा था और इसके बावजूद उन्होंने बाद में व्हीलचेयर पर बैठकर चुनाव प्रचार जारी रखा था। तृणमूल कांग्रेस ने उस विधानसभा चुनाव में शानदार जीत दर्ज की थी। पार्टी ने 294 में से 216 सीट पर जीत हासिल की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 77 सीट तक सीमित रह गई थी।
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