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Uttarakhand Tourism को बड़ा Boost! कॉर्बेट-फाटो में नई जिप्सियों को मंजूरी, महिलाओं को मिलेगा रोजगार

Uttarakhand Tourism: उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. कॉर्बेट-फाटो क्षेत्र में नई जिप्सियों को संचालन की मंजूरी दी गई है. खास बात ये है कि इस पहल से 24 महिलाओं को रोजगार का मौका मिलेगा. इससे जहां पर्यटकों के लिए जंगल सफारी के विकल्प बढ़ेंगे, वहीं स्थानीय स्तर पर महिलाओं की आर्थिक भागीदारी भी मजबूत होगी. वहीं, सरकार और पर्यटन विभाग की इस पहल को क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने और स्थानीय लोगों को सीधे रोजगार से जोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. अधिक जानकारी के लिए देखें पूरा वीडियो-

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Gujarat Govt: गुजरात में UCC लागू करने का रास्ता साफ, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधेयक को दी मंजूरी

गुजरात में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू करने का रास्ता साफ हो गया है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात समान नागरिक संहिता विधेयक, 2026 को मंजूरी दे दी है. राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक विधेयक को 17 सितंबर 2026 को स्वीकृति मिली. इसके साथ ही गुजरात उत्तराखंड के बाद UCC कानून को आगे बढ़ाने वाला देश का दूसरा राज्य बन गया है.

गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में इस विधेयक को सात घंटे से ज्यादा चली चर्चा के बाद बहुमत से पारित किया था. कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था तैयार करना है. हालांकि, कानून के प्रावधान अनुसूचित जनजातियों (ST) और संविधान के तहत विशेष रूप से संरक्षित कुछ समूहों पर लागू नहीं होंगे.

बहुविवाह पर लगेगी रोक

गुजरात UCC के सबसे महत्वपूर्ण प्रावधानों में से एक बहुविवाह पर रोक है. कानून के तहत किसी व्यक्ति का पहले से जीवनसाथी जीवित होने की स्थिति में दूसरी शादी करना मान्य नहीं होगा. यानी विवाह के समय दोनों पक्षों में से किसी का भी पहले से कोई जीवित जीवनसाथी नहीं होना चाहिए. इस प्रावधान के जरिए अलग-अलग समुदायों में विवाह से जुड़े नियमों के बजाय एक समान व्यवस्था लागू करने की कोशिश की गई है. कानून में विवाह की न्यूनतम आयु भी निर्धारित है. पुरुष के लिए न्यूनतम आयु 21 वर्ष और महिला के लिए 18 वर्ष रखी गई है.

विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन जरूरी

UCC के तहत विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा. इसके साथ ही तलाक से संबंधित अंतिम आदेशों के पंजीकरण का भी प्रावधान किया गया है. कानून में विवाह और तलाक से जुड़े मामलों के लिए एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का प्रावधान है. इसका उद्देश्य विवाह संबंधी रिकॉर्ड को आधिकारिक रूप से दर्ज करना और उससे जुड़े कानूनी अधिकारों को स्पष्ट करना है. विधेयक में विवाह, तलाक, वैवाहिक विवाद, न्यायिक अलगाव और विवाह को रद्द करने से जुड़े मामलों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं.

लिव-इन रिलेशनशिप का भी होगा रजिस्ट्रेशन

गुजरात UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी व्यवस्था के दायरे में रखा गया है. लिव-इन संबंधों के पंजीकरण और उनके औपचारिक रूप से समाप्त होने की प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है. यानी ऐसे संबंधों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रशासनिक रिकॉर्ड में दर्ज करना होगा. यह प्रावधान गुजरात के UCC को केवल विवाह और तलाक तक सीमित नहीं रखता, बल्कि विवाह से बाहर साथ रहने वाले जोड़ों से जुड़े मामलों को भी कानून के दायरे में लाता है.

बच्चों के अधिकारों पर भी प्रावधान

विधेयक में बच्चों की कानूनी स्थिति से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं. कानून के दस्तावेज के मुताबिक विवाह के भीतर या बाहर जन्मे बच्चों तथा सहायक प्रजनन तकनीक के जरिए जन्मे और गोद लिए गए बच्चों को समान आधार पर मान्यता देने की व्यवस्था की गई है. इसका उद्देश्य बच्चों के अधिकारों को उनके माता-पिता के वैवाहिक संबंध की स्थिति से अलग रखते हुए कानूनी सुरक्षा देना है.

किन लोगों पर लागू नहीं होगा UCC?

गुजरात UCC के प्रावधान पूरे राज्य में लागू होंगे और गुजरात के वे निवासी जो राज्य से बाहर रहते हैं, उन पर भी इसके कुछ प्रावधान लागू होने की व्यवस्था है. हालांकि, अनुसूचित जनजातियों और संविधान के तहत विशेष अधिकारों से संरक्षित कुछ समूहों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है.

अब लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद गुजरात में UCC को लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठ चुका है. विधानसभा से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की स्वीकृति इस विधेयक को कानून बनने की प्रक्रिया में अहम चरण है. गुजरात से पहले उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में UCC कानून पारित किया था. गुजरात का कानून विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत कानून से जुड़े मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने की दिशा में है.

 

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  Sports

India vs Pakistan गोल्ड मेडल मैच में नहीं दिखेंगे Mohsin Naqvi, पदक वितरण से रहेंगे दूर

भारत और पाकिस्तान के बीच एशियाई खेलों में होने वाले बहुप्रतीक्षित पुरुष क्रिकेट फाइनल से पहले एशियाई क्रिकेट परिषद के अध्यक्ष मोहसिन नकवी के जापान नहीं पहुंचने की पुष्टि हो गई है। शनिवार को आइची-नागोया एशियाई खेलों में भारत और पाकिस्तान के बीच स्वर्ण पदक का मुकाबला खेला जाना है, लेकिन नकवी इस मुकाबले के दौरान वहां मौजूद नहीं होंगे।

एशियाई क्रिकेट परिषद ने शुक्रवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा है कि उसके अध्यक्ष मोहसिन नकवी आइची-नागोया 2026 के अंतिम दिन होने वाले मुकाबलों में शामिल नहीं हो पाएंगे। हालांकि, उन्होंने स्वर्ण और कांस्य पदक के मुकाबलों में हिस्सा लेने वाली सभी 4 टीमों को शुभकामनाएं दी हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, नकवी ने भी अपने संदेश में कहा है कि कुछ जरूरी जिम्मेदारियों के कारण वह नागोया नहीं जा सकेंगे। उन्होंने एशियाई खेलों में हिस्सा लेने वाले सभी खिलाड़ियों और टीमों को स्वर्ण तथा कांस्य पदक के मुकाबलों के लिए शुभकामनाएं दी हैं और कहा है कि वह इन मुकाबलों में रोमांचक क्रिकेट देखने की उम्मीद कर रहे हैं। नकवी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष भी हैं।

बता दें कि पुरुष क्रिकेट में स्वर्ण पदक के मुकाबले से पहले श्रीलंका और बांग्लादेश के बीच कांस्य पदक का मुकाबला खेला जाना है। इसके बाद भारत और पाकिस्तान की टीमें स्वर्ण पदक के लिए आमने-सामने होंगी। दोनों देशों के बीच क्रिकेट मुकाबले को लेकर पहले से ही काफी चर्चा है और ऐसे में नकवी की गैरमौजूदगी को भी अहम माना जा रहा है।

गौरतलब है कि हाल ही में महिला एशिया कप के दौरान मोहसिन नकवी से जुड़ा एक विवाद सामने आया था। उस दौरान भारतीय महिला टीम ने उनके हाथों ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद से ही यह सवाल उठ रहा था कि एशियाई खेलों में भारत की पुरुष टीम को पदक कौन प्रदान करेगा और क्या नकवी इस समारोह में मौजूद रहेंगे।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, पदक प्रदान करने से जुड़ा फैसला अकेले एशियाई क्रिकेट परिषद नहीं करती है। यह जिम्मेदारी एशियाई ओलंपिक परिषद और आइची-नागोया एशियाई खेल तथा एशियाई पैरा खेल आयोजन समिति के बीच तय होती है। ऐसे में स्थानीय आयोजकों के सामने भी भारत-पाकिस्तान फाइनल के दौरान समारोह को लेकर कई बातों का ध्यान रखना था।

भारत और जापान के बीच लंबे समय से अच्छे राजनयिक संबंध हैं। इसी साल दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है। इसी मौके पर 22 सितंबर को भारत और जापान के बीच एक द्विपक्षीय क्रिकेट मुकाबला भी खेला गया था।

यह मुकाबला क्रिकेट के लिहाज से भी खास रहा है, क्योंकि भारत मौजूदा विश्व चैंपियन है, जबकि जापान अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सहयोगी देश है और उसकी विश्व रैंकिंग 41वीं है। ऐसे में भारत और जापान का यह मुकाबला दोनों देशों के संबंधों के साथ-साथ क्रिकेट के विस्तार के लिहाज से भी खास माना गया है।

मोहसिन नकवी के जापान नहीं आने से भारत और पाकिस्तान के फाइनल में पदक वितरण को लेकर उठ रही चर्चाओं पर भी फिलहाल विराम लग गया है। अब सभी की नजरें शनिवार को होने वाले मुकाबले पर टिकी हैं, जहां दोनों टीमें स्वर्ण पदक के लिए मैदान में उतरने वाली हैं।

Fri, 02 Oct 2026 20:15:00 +0530

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