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विश्व को जापानी सैन्यवाद के पुनरुत्थान से सावधान रहना चाहिए

बीजिंग, 29 जनवरी (आईएएनएस)। इस वर्ष जापान के आक्रमण के विरुद्ध चीनी जन प्रतिरोध युद्ध और विश्व फासीवाद-विरोधी युद्ध में विजय की 80वीं वर्षगांठ है। द्वितीय विश्व युद्ध में पराजित राष्ट्र के रूप में जापान को सैन्यवाद द्वारा किए गए गंभीर अपराधों पर गहन चिंतन करना चाहिए था।

फिर भी, जापान में कुछ व्यक्ति और ताकतें ऐतिहासिक तथ्यों को विकृत करने, युद्धकालीन अत्याचारों को छिपाने और जापान के आक्रामक युद्ध पर स्थापित निर्णयों को पलटने के प्रयासों को तेज़ कर रही हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि सैन्यवादी विचारधाराओं को पुनर्जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

इस प्रकार की कार्रवाइयां अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की इतिहास की साझा समझ के सीधे विपरीत हैं, अंतर्राष्ट्रीय सहमति और मानवीय विवेक का गंभीर रूप से उल्लंघन करती हैं, क्षेत्रीय और वैश्विक शांति और स्थिरता को गंभीर रूप से खतरे में डालती हैं, और युद्धोत्तर अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को चुनौती देती हैं।

नवंबर की शुरुआत में, जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने संसद सत्र के दौरान सार्वजनिक रूप से दावा किया कि तथाकथित थाइवान संकट एक अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है, जिससे जापान को सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करने की अनुमति मिल जाएगी।

1945 में जापान की पराजय के बाद यह पहली बार है कि किसी मौजूदा नेता ने औपचारिक रूप से यह विचार व्यक्त किया है कि थाइवान के लिए संकट जापान के लिए भी संकट है, और इसे सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार के प्रयोग से जोड़ा है।

यह पहली बार है जब जापान ने थाइवान मुद्दे में सैन्य हस्तक्षेप करने की महत्वाकांक्षा व्यक्त की है और पहली बार जापान ने चीन के खिलाफ़ बल प्रयोग की धमकी दी है।

(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)

--आईएएनएस

एबीएम/

डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

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बांग्लादेश ने 23 भारतीय मछुआरों को लौटाया, भारत ने 128 बांग्लादेशी मछुआरों को किया प्रत्यावर्तित

कोलकाता, 29 जनवरी (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय और भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) के बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ समन्वय के तहत गुरुवार को बांग्लादेश में हिरासत में लिए गए 23 भारतीय मछुआरों और उनकी दो भारतीय मछली पकड़ने वाली नौकाओं (आईएफबी) को सफलतापूर्वक स्वदेश वापस लाया गया।

इन भारतीय मछुआरों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) पार कर बांग्लादेश के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में मछली पकड़ने के आरोप में हिरासत में लिया गया था। यह प्रक्रिया आपसी प्रत्यावर्तन व्यवस्था का हिस्सा थी।

इस पारस्परिक व्यवस्था के तहत भारत सरकार ने भी 128 बांग्लादेशी मछुआरों और उनकी पांच मछली पकड़ने वाली नौकाओं को रिहा किया। इन बांग्लादेशी मछुआरों को भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में भारतीय तटरक्षक बल ने पकड़ा था और बाद में विदेशी अधिनियम के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई की गई थी।

मछुआरों और नौकाओं का यह आदान-प्रदान गुरुवार तड़के बंगाल की खाड़ी में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा पर संपन्न हुआ।

भारतीय तटरक्षक बल के जहाज आईसीजीएस समुद्र प्रहरी और आईसीजीएस विजय ने समन्वित तरीके से बांग्लादेशी मछुआरों को बांग्लादेश तटरक्षक बल के जहाज कामरुज्ज़मान और सोनार बांग्ला को सौंपा। वहीं, आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारतीय मछुआरों को भी भारतीय तटरक्षक बल को सौंप दिया गया।

इसके बाद तटरक्षक बल के जहाज मछुआरों और नौकाओं के साथ पश्चिम बंगाल तट की ओर रवाना हो गए। प्रत्यावर्तित 23 भारतीय मछुआरों और उनकी नौकाओं को राज्य प्रशासन को सौंपा जाएगा, जो उनके घर लौटने की व्यवस्था करेगा।

रक्षा मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, मछुआरों और उनकी नौकाओं का यह आपसी आदान-प्रदान विदेश मंत्रालय के प्रयासों का परिणाम है, जिसमें भारत की विस्तृत तटरेखा के साथ रहने वाले मछुआरा समुदायों की मानवीय और आजीविका संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखा गया।

बयान में कहा गया, “सफल प्रत्यावर्तन दोनों देशों की ओर से मछुआरों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा साझा समुद्री क्षेत्रों में समुद्री सहयोग और मानवीय प्रयासों के महत्व को रेखांकित करता है।”

इस बीच, भारतीय तटरक्षक बल के अधिकारियों ने भारतीय मछुआरों को बेहतर पकड़ की तलाश में अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा पार न करने की चेतावनी दी है। ऐसे मामलों में मछुआरों को हिरासत, उनके परिवारों को आर्थिक संकट और लंबे समय तक प्रत्यावर्तन में देरी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

अधिकारियों ने बताया कि आधुनिक मछली पकड़ने वाली नौकाएं जीपीएस और अन्य उपकरणों से लैस हैं, जिससे चालक दल समुद्र में अपनी स्थिति पर नजर रख सकता है। नौकाओं में सैटेलाइट से जुड़े डिस्ट्रेस अलर्ट ट्रांसपोंडर (डीएटी) भी लगे होते हैं, जो चालू रहने पर समुद्र में नौकाओं की निगरानी में मदद करते हैं।

हालांकि, सीमा पार करने के इरादे से कुछ लोग डीएटी को बंद कर देते हैं, जिससे उनकी सटीक स्थिति का पता नहीं चल पाता। यह स्थिति विशेष रूप से बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती मौसम के दौरान गंभीर हो जाती है, जब नौकाएं और मछुआरे लापता हो जाते हैं।

--आईएएनएस

डीएससी

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