चिपचिपे बालों से मुश्किल हो रहा स्टाइल करना, आयुर्वेद में छिपा है इससे निपटने का सही तरीका
नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। अक्सर बालों को धोने के बाद भी बाल चिपचिपे रह जाते हैं या फिर धोने के कुछ देर बाद ही बालों में तेल और चिपचिपापन आने लगता है।
ऐसे में बालों पर गंदगी अधिक मात्रा में चिपकनी शुरू हो जाती है और बालों को स्टाइल करना भी मुश्किल हो जाता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाल चिपचिपे क्यों होते हैं और इनसे छुटकारा पाने के लिए क्या किया जा सकता है?
पहले जानते हैं कि बाल चिपचिपे क्यों होते हैं? बालों के चिपचिपे होने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं। स्कैल्प के ऑयली होने से, गलत शैम्पू के प्रयोग से, गंदे हाथों से बार-बार बालों को छूने, अलग-अलग हेयर प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना और हार्मोन के असंतुलन की वजह से बाल चिपचिपे हो जाते हैं। इसके अलावा, स्कैल्प को अच्छे से नहीं धोने की वजह से भी बालों में चिपचिपापन बन रहता है।
आयुर्वेद में कुछ घरेलू उपाय बताए गए हैं, जिससे बालों के चिपचिपेपन को कम कर नई ऊर्जा दी जाती है। इसके लिए नीम या शिकाकाई से बालों को धोना चाहिए। नीम या शिकाकाई को पानी में भिगोकर उबालना चाहिए और उस पानी से बालों को धोना चाहिए। धोने के बाद बालों में फ्रेश एलोवेरा जेल को लगाना चाहिए और हफ्ते में एक बार बालों में मुल्तानी मिट्टी का लेप जरूर लगाएं। ये स्कैल्प को साफ करने के साथ-साथ अतिरिक्त तेल को सोखता है और बालों को स्कैल्प को पोषण देता है।
दूसरा, सही शैम्पू का इस्तेमाल करें। बालों को चिपचिपा होने से रोकने के लिए सल्फेट फ्री शैम्पू का यूज करें और बालों में हफ्ते में 1 बार तेल लगाएं और ज्यादा तेल लगाने से बचें। सदियों से ये माना जा रहा है कि तेल लगाने से बालों की जड़े मजबूत होती हैं, जो सही भी है लेकिन एक सीमित मात्रा तक। स्कैल्प में 1 हफ्ते में 1 बार ही तेल लगाएं और फिर अच्छे से बालों को साफ करें।
अगर स्कैल्प हल्दी रहेगी तो बाल खुद-ब-खुद लंबे होंगे और उनमें चमक भी बरकरार रहेगी, इसलिए बालों की सही देखभाल के लिए हफ्ते में एक बार ये उपाय जरूर करें।
--आईएएनएस
पीएस/डीकेपी
डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.
अस्थिर वैश्विक भू-राजनीति परिदृश्य के बावजूद भारत के मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्र में तेजी जारी : आर्थिक सर्वेक्षण
नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और तेजी से बदलते टेक्नोलॉजी इनोवेशन के दौर में भारत के मौद्रिक और वित्तीय क्षेत्र ने वित्त वर्ष 26 (अप्रैल से दिसंबर 2025) में जोरदार प्रदर्शन किया है। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से गुरुवार को पेश किए गए आर्थिक सर्वेक्षण में दी गई।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया कि अनिश्चितता से भरे इस दौर की चुनौतियों के समाधान के लिए नियामक नवाचार, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व महत्वपूर्ण हैं। सर्वेक्षण में आगे कहा गया कि घरेलू वित्त के लिए नए और समावेशी माध्यम आवश्यक हैं, क्योंकि ये वैश्विक वित्त की अस्थिरता से बचाव का कार्य करते हैं।
भारत का वित्तीय नियामक ढांचा मई 2025 में जारी आरबीआई के ऐतिहासिक नियामकों को स्पष्ट मान्यता देता है। यह फ्रेमवर्क एक पारदर्शी, परामर्शी और प्रभाव केंद्रित मौदिक प्रबंधन नियमन को संस्थागत करता है।
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत का मौद्रिक प्रबंधन सामाजिक लक्ष्यों के साथ सूक्ष्म आर्थिक उद्देश्यों को संतुलित करता है। वित्तीय क्षेत्र नियमन की गुणवत्ता, आर्थिक सुदृढ़ता और सतत विकास के महत्वपूर्ण पहलू के रूप में उभरी है। दस्तावेज के अनुसार मूल्य स्थिरता बरकरार रखते हुए, वित्तीय स्थिरता को समर्थन और समावेशी विकास को बढ़ावा देते हुए मौद्रिक नीति देश के सतत विकास और आर्थिक समृद्धि के मुख्य पहलू के रूप में कार्य कर रही है।
आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया कि मुद्रास्फीति में नरमी को देखते हुए रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर में कमी और नकद जमा अनुपात (सीपीआर) में कमी कर ओपन मार्केट ऑपरेशंस (ओएमओ) के जरिए तरलता सुनिश्चित की है। इन कटौतियों का उद्देश्य क्रेडिट प्रवाह, निवेश और संपूर्ण आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना रहा। इसके अतिरिक्त, इन उपायों को प्रभावी रूप से ऋण दरों पर लागू किया।
वित्तवर्ष 2026 में आरबीआई तरलता प्रबंधन के जरिए बैंकिंग क्षेत्र में पर्याप्त तरलता सुनिश्चित करता रहा। इस पहल ने आर्थिक उत्पादकता आवश्यकताओं के अनुरूप मुद्रा और क्रेडिट मार्केट को प्रभावी बनाए रखा। पर्याप्त तरलता के बीच अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के ऋण और जमा दर में गतिशीलता जारी रही।
--आईएएनएस
एबीएस/
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