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इंदौर दूषित जल त्रासदी: उमंग सिंघार ने न्यायिक जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार से किए सवाल, मुआवजा लागू करने की मांग
मध्यप्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भागीरथपुरा दूषित पेयजल त्रासदी और न्यायिक जांच रिपोर्ट को लेकर प्रेस वार्ता की। इंदौर स्थित रेसीडेंसी में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि स्वच्छता के लिए देशभर में पहचान रखने वाले इंदौर में दूषित पेयजल से बीमारी और मौतों की घटना नागरिकों के जीवन, सुरक्षित पेयजल और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़े कई सवाल खड़े करती है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट द्वारा गठित न्यायिक जांच आयोग ने भागीरथपुरा में पेयजल प्रदूषण के कारणों, बीमारी और मौतों के साथ प्रशासनिक एवं तकनीकी खामियों तथा जिम्मेदारी की जांच की है। आयोग की रिपोर्ट में पेयजल के दूषित होने, प्रशासनिक देरी और महत्वपूर्ण तकनीकी अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने से जुड़े तथ्य सामने आए हैं।
दूषित पानी से हुई घटना पर उठाए सवाल
उमंग सिंघार ने कहा कि इंदौर देश के सबसे स्वच्छ शहरों में अपनी पहचान रखता है। ऐसे में भागीरथपुरा में दूषित पानी की आपूर्ति और उससे हुई मौतों ने पेयजल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल की मूलभूत आवश्यकता भी शामिल है।
कांग्रेस नेता ने कहा कि पर्याप्त प्रशासनिक संसाधनों वाले इंदौर जैसे बड़े शहरी और आर्थिक केंद्र में इस तरह की घटना होना चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि दूषित पेयजल, बीमारी और मौतों को लेकर पहले भी सवाल उठाए गए थे जिसके बाद हाईकोर्ट ने पूरे मामले की जांच के लिए न्यायिक जांच आयोग गठित किया।
न्यायिक जांच की रिपोर्ट का हवाला दिया
नेता प्रतिपक्ष ने न्यायिक जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आयोग के अनुसार भागीरथपुरा में आपूर्ति किया जा रहा पेयजल दूषित और मानव उपभोग के लिए अनुपयुक्त पाया गया। जांच में सीवेज के पेयजल पाइपलाइन में प्रवेश को प्रदूषण का प्रमुख कारण बताया गया है। उन्होंने कहा कि आयोग ने 36 मौतों का परीक्षण किया जिनमें से 22 मौतों को दूषित पानी से संबंधित माना गया। रिपोर्ट में जल और सीवरेज व्यवस्था की योजना, रखरखाव, निगरानी और पर्यवेक्षण में व्यवस्थागत कमियों की ओर भी संकेत किया गया है।
इंजीनियरिंग रिकॉर्ड नहीं मिलने पर भी सवाल पूछे
उमंग सिंघार ने कहा कि जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण तकनीकी और इंजीनियरिंग दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। इनमें लेआउट प्लान, ब्लूप्रिंट, डिजाइन ड्रॉइंग, पाइपलाइन अलाइनमेंट मैप और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड शामिल हैं। उन्होंने सवाल किया कि जल और सीवरेज व्यवस्था से जुड़े इतने महत्वपूर्ण सरकारी रिकॉर्ड जांच आयोग के सामने उपलब्ध क्यों नहीं थे। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड के संरक्षण और उन्हें उपलब्ध कराने में हुई लापरवाही की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सीवरेज कार्य में देरी पर सरकार को घेरा
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि न्यायिक जांच में भागीरथपुरा में सीवेज और अपशिष्ट जल पाइपलाइन से जुड़े कार्यों में हुई देरी का भी परीक्षण किया गया। रिपोर्ट में टेंडर प्रक्रिया, फाइल मूवमेंट और कार्य निष्पादन समेत अलग-अलग चरणों में हुई प्रशासनिक देरी की ओर संकेत किया गया है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर हुई देरी और कमियों की जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए, क्योंकि समय पर जरूरी काम पूरे नहीं होने से पेयजल व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा।
66 दिन तक फाइल लंबित रहने पर किए सवाल
उमंग सिंघार ने कहा कि न्यायिक जांच के दौरान यह बात सामने आई कि संबंधित फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए 66 दिनों तक लंबित रही। उन्होंने कहा कि आयोग ने केवल फाइल मेयर के हस्ताक्षर के लिए लंबित रहने के आधार पर मेयर की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय नहीं की। कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि आखिर इतनी महत्वपूर्ण परियोजना की फाइल 66 दिनों तक किस स्तर पर और किसके पास लंबित रही। उन्होंने सरकार और नगर निगम से इस देरी की प्रशासनिक जिम्मेदारी स्पष्ट करने को कहा।
मुआवजा देने की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि न्यायिक जांच आयोग ने मृतकों के परिवारों और प्रभावित मरीजों के लिए मुआवजे एवं सहायता की सिफारिश की है। इसमें मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये तथा प्रभावित मरीजों के लिए आर्थिक और चिकित्सकीय सहायता का प्रावधान शामिल है। उमंग सिंघार ने सरकार से पूछा कि आयोग की इन सिफारिशों को कब लागू किया जाएगा और प्रभावित परिवारों को वास्तविक भुगतान किस तारीख तक मिलेगा। उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा के लोगों को पूरे मामले में पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय मिलना चाहिए।
कब मिलेगा इंदौर की जनता को शुद्ध पानी?
भागीरथपुरा की दर्दनाक त्रासदी के बाद मैंने लगातार मुख्यमंत्री जी को दूषित पानी की गंभीर समस्या से अवगत कराया, लेकिन मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार अब तक जनता को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं करा पाई है।
त्रासदी के बाद भी सरकार की नींद… pic.twitter.com/JMmYZiByTn
— Umang Singhar (@UmangSinghar) October 2, 2026
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