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₹500 की SIP से बनिए ऑफिस टावर और मॉल के हिस्सेदार, म्यूचुअल फंड के जरिए REIT-InvIT में निवेश का मौका

SIP In Real Estate: सालों तक भारतीय रिटेल निवेशक बड़ी कमर्शियल बिल्डिंग्स, यानी ऑफिस टावर, मॉल और बिजनेस पार्क में काम तो कर सकते थे, लेकिन उनका एक छोटा हिस्सा खरीदने का मौका आम निवेशकों के पास नहीं था. 2026 में यह तस्वीर बदली है. इस साल REIT और InvIT पर फोकस करने वाले पहले म्यूचुअल फंड लॉन्च हुए हैं. इनमें ₹500 जैसी छोटी SIP से भी इनकम देने वाले रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में निवेश किया जा सकता है. साथ ही किराये जैसी नियमित डिस्ट्रीब्यूशन मिलने की संभावना भी रहती है. आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं

क्या होते हैं REIT और InvIT?

REIT यानी रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट एक लिस्टेड वाहन होता है, जो निवेशकों से पैसा जुटाकर ऑफिस टावर, शॉपिंग मॉल और IT पार्क जैसी कमाई वाली प्रॉपर्टी खरीदता, चलाता और किराये पर देता है. इसकी कमाई मुख्य रूप से किराये से होती है और नियमों के मुताबिक इसे अपना ज्यादातर नेट कैश फ्लो यूनिटहोल्डर्स में बांटना होता है. InvIT यानी इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट भी इसी तरह काम करता है. लेकिन यह सड़क, पुल, पावर ट्रांसमिशन लाइन और पाइपलाइन जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर एसेट्स में निवेश करता है. इसकी कमाई टोल, एन्युटी और ट्रांसमिशन चार्ज से आती है.

भारत में अभी मुख्य रूप से कमर्शियल रियल एस्टेट पर फोकस करने वाले कुछ ही लिस्टेड REIT हैं, जबकि सड़क, पावर और दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्रों में करीब 9 लिस्टेड InvIT हैं. पहले रिटेल निवेशकों को इनके यूनिट सीधे एक्सचेंज से खरीदने पड़ते थे. इसमें होल्डिंग्स बिखरी रहती थीं और डिस्ट्रीब्यूशन पर टैक्स के नियम भी कॉम्प्लिकेटेड थे.

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म्यूचुअल फंड की एंट्री

अगस्त 2026 में देश का पहला समर्पित REIT-आधारित म्यूचुअल फंड आया, एडलवाइस निफ्टी REITs एंड रियल्टी इंडेक्स फंड. यह एक पैसिव स्कीम है, जो निफ्टी REITs एंड रियल्टी टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करती है. इस इंडेक्स में आमतौर पर करीब 60% हिस्सा REITs का और 40% रियल एस्टेट डेवलपर कंपनियों के शेयरों का होता है. 

इसी के आसपास WhiteOak कैपिटल म्यूचुअल फंड ने अपने डिविडेंड यील्ड फंड का दायरा बढ़ाकर उसमें REIT और InvIT को भी शामिल कर लिया. यह एक एक्टिव फंड है, जो REITs में 60% तक और InvITs में 10% तक निवेश कर सकता है. बाकी पैसा इक्विटी और आर्बिट्राज में लगता है, ताकि यील्ड और पूंजी बढ़ोतरी का मिक्स मिल सके. नवी समेत कुछ और फंड हाउस भी REITs, InvITs और रियल्टी शेयरों के मेल से रियल एस्टेट में सेक्टोरल एक्सपोजर देने वाले प्रोडक्ट पर काम कर रहे हैं. यानी एक ही SIP से आपको कई REIT और InvIT की टोकरी में निवेश का मौका मिल जाता है. इससे छोटे टिकट साइज, लिक्विडिटी और तिमाही डिस्ट्रीब्यूशन को दोबारा निवेश करने जैसी दिक्कतें दूर होती हैं.

टैक्स के नियम क्या हैं?

REIT-InvIT म्यूचुअल फंड स्कीम्स को इक्विटी-ओरिएंटेड फंड नहीं माना जाता, क्योंकि REIT-InvIT यूनिट 65% इक्विटी वाली शर्त पूरी नहीं करते. दो साल से ज्यादा होल्ड करने पर मुनाफे पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है, जबकि दो साल के भीतर रिडेम्पशन पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स देना होगा. इसलिए ये फंड शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग से ज्यादा लंबे समय में धीरे-धीरे पैसा जोड़ने के लिए बेहतर माने जाते हैं.

ब्याज दरों का असर

REIT और InvIT यील्ड वाले एसेट हैं, इसलिए आमतौर पर इनकी वैल्यू ब्याज दरों के उलट चलती है. 2025 में RBI ने चार बार में कुल 125 बेसिस पॉइंट की रेपो रेट कटौती की थी, जिससे REIT और InvIT के दामों को सहारा मिला और यील्ड घटी. लेकिन अगर RBI दरें बढ़ाने के दौर में जाता है या सख्त पॉलिसी का संकेत देता है, तो इनकी वैल्यूएशन पर दबाव आ सकता है और उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है. इसी वजह से कई एक्सपर्ट इन्हें पोर्टफोलियो में सैटेलाइट होल्डिंग की तरह रखने की सलाह देते हैं, यानी वैल्यूएशन ठीक लगने पर धीरे-धीरे पैसा लगाना, एक साथ पूरा पैसा डालना नहीं.

किन निवेशकों को सोचना चाहिए?

ये फंड ऐसे निवेशकों के लिए हैं जो चाहते हैं:

- कमर्शियल रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर में बिना प्रॉपर्टी या अलग-अलग ट्रस्ट यूनिट खरीदे निवेश करना.
- सैलरी या दूसरी आमदनी के साथ नियमित डिस्ट्रीब्यूशन का एक संभावित जरिया, जो किराये की प्रॉपर्टी जैसा हो.
- पारंपरिक इक्विटी और डेट से अलग डायवर्सिफिकेशन. ध्यान रहे कि ये कम उतार-चढ़ाव वाले डेट प्रोडक्ट नहीं हैं, बल्कि अपने जोखिमों वाली "तीसरी" एसेट क्लास हैं.

अगर आपका लक्ष्य लंबी अवधि में संपत्ति बनाना है, आप कुछ आमदनी भी चाहते हैं और मध्यम से ज्यादा उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं, तो SIP के जरिए इन फंड्स में छोटा हिस्सा रखना ठीक हो सकता है. लेकिन ब्याज दरों के असर और प्रोडक्ट के अभी विकसित होते स्ट्रक्चर को देखते हुए समझदारी यही है कि पहले इन्हें वॉचलिस्ट में रखें, स्कीम इन्फॉर्मेशन डॉक्यूमेंट ध्यान से पढ़ें और एकमुश्त पैसा लगाने की बजाय चरणों में निवेश करें. 

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Disclaimer: यह जानकारी अलग-अलग एनालिस्ट और ब्रोकरेज फर्मों की राय पर आधारित है. इसे निवेश की सलाह न माना जाए. शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा होता है, इसलिए निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर से सलाह जरूर लें.

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Drishyam 3 Movie Release: आखिर कैसा है Drishyam 3 का वो आखिरी राज? Ajay Devgn के क्लाइमैक्स पर जनता का फैसला जानकर चौंक जाएंगे!

Drishyam 3 Movie Release: अजय देवगन की फिल्म 'दृश्यम 3' आज 02 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। रिलीज के बाद से फिल्म को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। सोशल मीडिया पर फैंस फिल्म की कहानी, क्लाइमैक्स और कलाकारों की परफॉर्मेंस पर अपनी राय साझा कर रहे हैं।

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  Sports

IPL से पहले Sunrisers Hyderabad छोड़ सकते हैं Abhishek Sharma, कई फ्रेंचाइजी की नजर

आईपीएल की अगली नीलामी से पहले टीमों के बीच खिलाड़ियों को बनाए रखने और रिलीज करने को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच सनराइजर्स हैदराबाद के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा को लेकर सबसे ज्यादा हलचल देखने को मिल रही है। टीम में कप्तानी की जिम्मेदारी ईशान किशन को दिए जाने के बाद अभिषेक के भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं।

मौजूद जानकारी के अनुसार, सनराइजर्स हैदराबाद के साथ अभिषेक शर्मा के रिश्तों में पिछले सीजन से ही खटास की स्थिति बनी हुई है। अभिषेक लंबे समय से इस टीम का हिस्सा हैं और 2019 में फ्रेंचाइजी से जुड़े थे। वह टीम की कप्तानी करने की इच्छा भी रखते रहे हैं। ऐसे में ईशान किशन को कप्तान बनाए जाने के बाद उनके नाराज होने की बात सामने आई है।

हालांकि, अभिषेक शर्मा के अगले सीजन में सनराइजर्स हैदराबाद छोड़ने को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, कई फ्रेंचाइजी के साथ अनौपचारिक स्तर पर बातचीत हुई है, लेकिन अब तक कोई ठोस बात सामने नहीं आई है। मुंबई इंडियंस, गुजरात टाइटंस और पंजाब किंग्स को संभावित विकल्पों के तौर पर देखा जा रहा है।

दिल्ली कैपिटल्स का नाम भी इस चर्चा में शामिल है। इसकी एक वजह अभिषेक के पुराने मार्गदर्शक युवराज सिंह का टीम से जुड़ना है। युवराज सिंह की मौजूदगी अभिषेक के लिए दिल्ली कैपिटल्स को संभावित विकल्प बना सकती है। हालांकि, अभी यह केवल संभावनाओं और अंदरूनी चर्चाओं तक ही सीमित है।

बता दें कि सनराइजर्स हैदराबाद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के. शनमुगम से जब इस बारे में प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने इन खबरों को सही नहीं बताया है। इससे साफ है कि फ्रेंचाइजी की तरफ से अभिषेक को लेकर अलग होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

गौरतलब है कि 2027 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। ऐसे में पैट कमिंस की उपलब्धता को लेकर भी सवाल बने हुए हैं। इसी वजह से सनराइजर्स हैदराबाद में कप्तानी को लेकर ईशान किशन पर भरोसा जताने की चर्चा को अहम माना जा रहा है। अभिषेक के लिए भी मौजूदा समय में कप्तानी का विकल्प सीमित दिखाई दे रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, अगर सनराइजर्स हैदराबाद और अभिषेक शर्मा अलग होने पर सहमत होते हैं तो अगला सवाल यह होगा कि वह किस टीम में जाएंगे और यह बदलाव किस तरीके से होगा। खिलाड़ी को सीधे खरीदने के लिए नकद राशि का इस्तेमाल, खिलाड़ी की अदला-बदली या कोई दूसरा रास्ता अपनाने जैसे कई विकल्प हो सकते हैं।

इस समय अभिषेक शर्मा टी20 क्रिकेट के सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले बल्लेबाजों में शामिल हैं। वह मौजूदा समय में दुनिया के दूसरे नंबर के टी20 बल्लेबाज हैं और उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने उन्हें कई टीमों के लिए आकर्षक खिलाड़ी बनाया है। यही वजह है कि आने वाले दिनों में उनके नाम को लेकर चर्चाएं और तेज हो सकती हैं।

हालांकि, खिलाड़ी के करीबियों की तरफ से अभी तक यही कहा गया है कि ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। दूसरी ओर, आईपीएल से जुड़े लोगों की नजर सनराइजर्स हैदराबाद और अभिषेक शर्मा के बीच चल रही स्थिति पर बनी हुई है।

सभी टीमों के पास दिसंबर में होने वाली छोटी नीलामी से पहले अपने मुख्य खिलाड़ियों को तय करने के लिए 1 महीने से ज्यादा का समय है। इसलिए अभिषेक शर्मा का मामला तुरंत किसी नतीजे पर पहुंचे, यह जरूरी नहीं है। फिलहाल उनकी टीम के साथ बने रहने या नई टीम में जाने को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है और आने वाले हफ्तों में इस पर तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

Fri, 02 Oct 2026 20:34:00 +0530

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