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देश की 97 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में भारतनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध: Jyotiraditya Scindia

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बृहस्पतिवार को कहा कि देशभर की 97 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में भारतनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध करा दी गई है। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए सिंधिया ने कहा कि भारतनेट दुनिया की सबसे बड़ी ग्रामीण दूरसंचार परियोजनाओं में से एक है और इसे चरणबद्ध तरीके से देश की सभी ग्राम पंचायतों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “भारतनेट-एक और दो परियोजनाओं के तहत चिन्हित लगभग 2,22,000 ग्राम पंचायतों में से 2,15,000 ग्राम पंचायतों को पहले ही कनेक्टिविटी प्रदान की जा चुकी है। इसका अर्थ है कि 97 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 100 प्रतिशत कवरेज हासिल न हो पाने के पीछे कुछ क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति, उनसे जुड़ी कठिनाइयां और वामपंथी उग्रवाद जैसी चुनौतियां प्रमुख कारण हैं। उन्होंने बताया कि शेष लगभग तीन प्रतिशत लक्ष्य, यानी करीब 7,000 ग्राम पंचायतों में अब तक कनेक्टिविटी नहीं पहुंच पाई है, क्योंकि ये क्षेत्र अत्यंत पहाड़ी, दुर्गम हैं और कुछ स्थानों पर वामपंथी उग्रवाद की समस्या भी है।

सिंधिया ने कहा कि परियोजना के शुरुआती चरण में ‘राइट ऑफ वे’प्राप्त करने में काफी कठिनाई हो रही थी, जिसके बाद सरकार ने इस संबंध में राजपत्रित अधिसूचना जारी की।

उन्होंने बताया कि ‘राइट ऑफ वे’ का तात्पर्य सार्वजनिक और निजी संपत्तियों पर दूरसंचार सेवा प्रदाताओं द्वारा बुनियादी ढांचे की स्थापना करने और उनके संचालन से जुड़े नियमों और अधिकारों से है।

सिंधिया ने कहा कि अब संबंधित राज्य सरकारों को यह बताया जा रहा है कि ‘राइट ऑफ वे’ प्राप्त करने में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए। भारतनेट परियोजना को 25 अक्टूबर 2011 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी।

इस परियोजना का क्रियान्वयन एक विशेष प्रयोजन इकाई ‘भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड’ (बीबीएनएल) द्वारा किया जा रहा है, जिसकी स्थापना 25 फरवरी 2012 को भारतीय कंपनी अधिनियम, 1956 के तहत की गई थी। उन्होंने बताया कि 30 अप्रैल 2016 को दूरसंचार आयोग ने इस परियोजना को तीन चरणों में लागू करने की स्वीकृति दी थी।

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UGC के Controversial नियमों पर Supreme Court का 'स्टे', Akhilesh Yadav बोले- कानून का उद्देश्य स्पष्ट हो

समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूएनआई) के नए समानता संबंधी नियमों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा लगाई गई रोक का स्वागत किया है। अखिलेश यादव ने कहा कि न्यायालय ने यह सुनिश्चित किया है कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा, क्योंकि वे एक अधिक एकीकृत समाज के लिए प्रयासरत हैं। अखिलेश यादव ने X पर एक पोस्ट में कहा कि सच्चा न्याय किसी के साथ अन्याय नहीं करता; माननीय न्यायालय ने ठीक यही सुनिश्चित किया है। कानून की भाषा स्पष्ट होनी चाहिए, और उसका उद्देश्य भी स्पष्ट होना चाहिए। यह केवल नियमों की बात नहीं है, बल्कि उद्देश्य की भी बात है। किसी पर अत्याचार न हो, किसी के साथ अन्याय न हो। किसी पर ज़ुल्म या अत्याचार न हो, किसी के साथ अन्याय न हो।
 

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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना) विनियम, 2026 में सामान्य वर्ग के खिलाफ कथित "भेदभाव" को लेकर देश भर में मचे बवाल के बीच, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इन विनियमों पर रोक लगा दी। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि फिलहाल 2012 के यूजीसी विनियम लागू रहेंगे। न्यायालय ने कहा कि विनियम 3 (सी) (जो जाति-आधारित भेदभाव को परिभाषित करता है) में पूरी तरह अस्पष्टता है और इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। न्यायालय ने कहा, "भाषा में संशोधन की आवश्यकता है।"

23 जनवरी को अधिसूचित नए यूजीसी विनियमों को विभिन्न याचिकाकर्ताओं ने 'मनमाना, बहिष्करणकारी, भेदभावपूर्ण' बताते हुए और संविधान तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम, 1956 का उल्लंघन करने वाला बताते हुए चुनौती दी थी। कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए लागू किए गए नए नियमों के तहत संस्थानों को अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए विशेष समितियां और हेल्पलाइन स्थापित करने की आवश्यकता है।
 

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अधिकांश सामान्य वर्ग के छात्रों ने उन नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जो परिसरों में समानता के बजाय भेदभाव को बढ़ावा देते हैं। छात्रों ने बताया कि इस नियम में सामान्य वर्ग के छात्रों के खिलाफ दर्ज फर्जी शिकायतों के समाधान का कोई प्रावधान नहीं है।

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EU से आने वाले सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी 50% से घटकर 20% हुई, हिमाचल की 5500 करोड़ की इंडस्ट्री पर संकट

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